बागेश्वर बाबू लेल श्रद्धाञ्जलि सुमन अर्पण – नहि रहलाह मैथिलीक ‘श्रीदेव’

हँसैते हँसैते चलि देलाह बागेश्वर बाबू
 
संलग्न प्रथम तस्वीर २ वर्ष पहिलुका दिल्लीक गोविन्दुपुरी स्थित आदरणीय कृपानन्द झा सर केर निवासस्थल पर आयोजित कार्यक्रम स्वतंत्र भारत मे मिथिलाक योगदान आ वर्तमान अवस्था पर राखल गेल परिचर्चा गोष्ठीक समापन उपरान्त सामूहिक फोटोग्राफीक थिक – साभार रोहित यादव।
 
संलग्न दोसर तस्वीर यैह वर्ष इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र मे आयोजित मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर दोसर दिनक कवि गोष्ठी मे सहभागी बनला आदरणीय वागीश्वर बाबू द्वारा स्वयं केर खींचल एक सेल्फीक थिक – साभार हुनकहि फेसबुक एल्बम।
 
शोक समाचार
 
आइ सामाजिक संजाल पर वागीश्वर बाबूक साहित्यकार सुपुत्री श्रीमती अपर्णा झा द्वारा ई सूचना देल गेल छल जे आदरणीय Manikant बाबू शेयर करैत हमरो सब धरि प्रसारित कयलनि जे श्री वागीश्वर बाबू ब्रह्ममुहूर्तक ३ बजे अन्तिम साँस लेलनि। बहुत प्रतिभासम्पन्न, शान्त, सौम्य आ सम्भ्रान्त सज्जन पुरुष छलाह वागीश्वर बाबू।
 
हिनका संग दुइ बेर जीवन मे भेंट भेल। दुनू बेरक २ तस्वीर राखल अछि। मृदुल मुस्कानक संग सदिखन आह्लाद भरल शब्द सँ संबोधन – मानू जेना हृदयक भीतर ततेक प्रेम भरल रहैत छलन्हि जे नहियो चाहैत उझैक जाइत छलन्हि। हम कल्पनो नहि करैत रही जे वागीश्वर बाबू एहि तरहें अचानक गुम भऽ जेताह। हुनकर मन्द मुस्कान आ मृदुल वाणी हमरा एखनहुँ मोन केँ गुदगुदा रहल अछि।
 
प्रशान्त आ प्रखर – एक अभियन्ता आ सुलभ इन्टरनेशनल केर परियोजनाक एकटा योजनाकार बुझाइत रहला अपन विभिन्न प्रस्तुति आ शेयर्ड फोटो सभ मे। कहियो जी भरिकय बात करितहुँ से लौल लगले रहि गेल। लेकिन हिनकर विचार सब सोशल मीडिया पर जतेक पढय लेल भेटय से बहुत सुन्दर मार्गदर्शन कराबय आर ई विश्वास दियाबय जे मिथिलाक धरती पर आइयो सन्त-ऋषि-मुनि विभिन्न रूप मे छथि।
 
संस्मरण
 
पहिल भेंट भेल छल ऊपरवर्णित परिचर्चा गोष्ठी मे आर ताहि मे मिथिलाक अस्मिता मे बुद्धकालीन इतिहासक किछु चर्चा कएने छलाह। हम जिज्ञासा कएने छलियन्हि जे बुद्धक अनुगामी लोकनि द्वारा लिखल गेल साहित्य मे मिथिला कोन तरहें चर्चित भेल – किछु सन्दर्भक संग जनतब दी।
 
से देखू संयोग…. आइ सँ ठीक एक वर्ष पहिने १३.१०.२०१७ केँ हुनकर ई मैसेज भेटल छल मैसेन्जर मार्फतः
 
Dear Sh Chou.ji, welcome in my friends uh circle. You may remember a gathering held in last summer at Kripanand ji’s residence. You had asked a question about any references of Mithila in the Dhamma pada and I had said none. However in the Buddhist literature like Suttnikay, Jatak, Anguttarnikay etc there are a number of references about the expansion of Buddhism in Mithila, particularly in the region called Kosi Kshetra. Without going into details, I request you to read Mithila Bharati, a tri- monthly periodical of Patna, edn. 1-4, 2014.In it you will find three articles, well researched- 1मिथिलाक बौद्ध संदर्भ, ले. भवनाथ मिश्र 2. पछबारि मिथिलाक बौद्ध पर्यटन स्थल, ले.अशोक कुमार सिन्हा 3.चापाल चैत्यक खोज, ले. प्रफुल्ल कुमार सिंह ‘मौन’
 
आइ डा. वागीश्वर बाबूक सिर्फ ई संवाद रहि गेल, हुनकर आत्मीय स्नेह पुनः १७ मार्च, २०१८ केँ दिल्ली मे भेटल छल। दुनू प्राणी कवि गोष्ठी मे आयल छलथि। खहखह उज्जर धोती आ कुर्ता पर सँ बन्डी आ पाग पहिरने एकदम लाल टुहटुह चेहरा आ मिथिला चित्रकला वला विशिष्ट साड़ी मे मैडमजीक संग कवि गोष्ठीक राउन्ड टेबल पर संचालन डाइस केर नजदीक कैप्टेन श्याम दरिहरे सर संग बैसल मन्द-मन्द मुस्कुराइत अपन सब नवतुरिया सब केँ जी भरिकय निहारि रहल छलाह। कविताक आनन्द मे डूबल छलाह। समापन भेलापर हमरा देखिते दुनू हाथ सँ आशीर्वाद देलनि, आइ धरि ओ डगडग चेहरा हमरा मोन मे ओहिना नाचिये रहल अछि।
 
आब वागीश्वर बाबूक आत्मीय संगत मात्र बाँचि गेल अछि, पार्थिव शरीर केर अन्त्येष्टि अपर्णाजीक कथनानुसार आइ ३ बजे हुनक सुपुत्रक घर सँ दिल्लीक कोनो श्मासान स्थल धरि भेल हेतनि। दिन भरि हुनकर सुपरिचित लोकनि श्रद्धाञ्जलि सुमन अर्पित करैत देखेला अछि।
 
अन्त मे, ई श्रद्धासुमन केर किछु शब्द हमरो दिश सँ – अन्तिम टैग Bageshwar Jha – बेर-बेर प्रणामक संग!
 
हरिः हरः!!
पूर्वक लेख
बादक लेख

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