मैथिली गजल – विद्यानन्द बेदर्दी

गजल

माथमे टिकुली, हाथमे चुड़ी, देहमे सारी अहाँकऽ
ठोर मधुरसके प्याला, नयन कजरारी अहाँकऽ

कहैछी अपन सप्पत बड्ड सोहाइयऽ,
गोर-गोर गाल पर तिलवा कारी अहाँकऽ

छी प्रेमरुपी भीख माइङग रहल,
देखु जेना रही हम भिखारी अहाँकऽ

मोन हमर जा धरि हियामे सांस रहै,
ता धरि जीवनरुपी दपर्णमे निहारी अहाँकऽ

साँझ-भोर जपैछी अहींके नामक माला,
हँ राधा हँ, हम छी प्रेम पुजारी अहाँकऽ

– विद्यानन्द वेदर्दी
रेडियो छिन्नमस्ता एफ. एम.
राजविराज, सप्तरी।

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