मिथिला उद्यमी केँ अमुल केर श्वेत क्रान्ति सँ शिक्षा लेबाक जरूरत

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अमुल सँ सीखबाक आवश्यकता
 
A सँ Anand, M सँ Milk, U सँ Union आ L सँ Limited – पूरा नाम Amul – भारतक एक दुग्ध सहकारिता उद्यम, गुजरातक आनन्द मे अवस्थित अछि। एकर स्थापना १९४८ ई. मे भेल। गुजरात को-ओपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (GCMMF) केर व्यवस्थापन मे ३६,००,००० (छत्तीस लाख) दुग्ध उत्पादकक स्वामित्व मे ‘अमुल’ चलैत आबि रहल अछि।
 
समूचा भारत मे अमुल द्वारा श्वेत क्रान्ति केर प्रेरित करबाक कार्य कयल गेल जाहि सँ ई देश विश्वक सब सँ पैघ दुग्ध व दुग्ध उत्पादक उत्पादनकर्ताक स्थान पाबि सकल। सरदार वल्लभभाई पटेल तथा वर्गीज कुरियन केर सम्मिलित मार्गदर्शन व प्रेरणा सँ एक कृषक त्रिभुवनदास पटेल केर नेतृत्व मे ई श्वेत क्रान्ति आरम्भ भेल छल। काइरा डिस्ट्रीक्ट मिल्क युनियन केर स्थापना हिनकहि द्वारा १९४६ मे कयल गेल जेकर संस्थापक अध्यक्ष स्वयं त्रिभुवनदास भेलाह आर मृत्युकाल धरि एकर नेतृत्व कयलनि। तदोपरान्त डा. कुरियन द्वारा एहि श्वेत क्रान्ति केँ नेतृत्व दैत अमुल केर लोकप्रियता देश आ बाहरी मुल्क धरि पहुँचायल गेल। भारतक एक सफलतम खाद्य ब्रान्ड बनलाक बाद आइ अमुल लगभग २० गोट देशक बाजार मे निवेश कयने अछि। आब २० सँ अधिक देश मे एकर ब्रान्ड बाजार मे नीक मांग स्थापित कय चुकल अछि।
 
अमूल केर इतिहास
 
एकर स्थापना – १४ दिसम्बर १९४६ केँ दुग्ध ब्यापारी व दलाल आदि सँ उपेक्षित दुग्ध उत्पादकक शोषणक परिणामक रूप मे ‘सहकारिता संस्था’क रूप मे ‘अमुल सहकारी’ केर रूप मे भेल। ताहि समय एकमात्र पोल्सन डेयरी छल जेकरा ब्रिटीश सरकार द्वारा ग्रामीण भाग सँ दुग्ध संकलन आ बम्बई केर बाजार धरि मे वितरण केर अधिकार देने रहैक। पोल्सन डेयरी धरि माल पहुँचाबय मे मनमाना ढंग सँ दामक निर्धारण, गर्मीक मास मे आरो अधिक बिचौलिया दोहन जाहि सँ अधिकांश दूध फाटि जाइत छलैक, एहि सभ सँ आजिज भऽ काइरा जिलाक कृषक सब सरदार वल्लभभाई पटेल सँ स्थानीय कृषक नेता त्रिभुवनदास के. पटेल केर नेतृत्व मे भेंट करैत अपन समस्या बतौलनि। तदनुसार सरदार पटेल हुनका लोकनि केँ एकटा ‘सहकारी संस्था’ केर निर्माण करैत पोल्सन केँ बिना कोनो बिक्री कएने सीधा बम्बई दुग्ध आयोजना केँ आपूर्ति करबाक बाट देखौलनि। पोल्सन सेहो यैह कार्य करय, लेकिन दुग्ध ब्यापारी केँ बहुत कम दाम आ मनमानी ढंग सँ व्यवहार करय। सरदार पटेल ताहि समय मे मोरारजी देसाई केँ पठाकय सब किसान केँ संगठित कयलनि। एहि तरहें १९४६ मे सब किसान हड़ताल पर चलि गेल आर एकर परिणाम ई भेल जे तत्कालीन ब्रिटीश सरकार सहकारी संस्था केँ ई अधिकार देलक जे ओ दुध आ दुधक विभिन्न उत्पाद केर निर्माण करय तथा वैह सब किसान सँ दुधक संकलन करय, ओकरा अलग-अलग रूप मे प्रोसेस (अन्य उत्पाद तैयार) करय। एहि तरहें दुध संकलन एकाधिकार केँ विकेन्द्रीकृत करैत १-२ लिटर दुध तक उपलब्ध करौनिहार किसान सब केँ जोड़ि-जोड़िकय प्रत्येक गाम-गाम मे ‘सहकारी संस्था’ केर निर्माण कयल गेल। जून १९४८ मे बम्बई मिल्क स्कीम लेल पैश्चुराइज तक करय लागल, दूध सँ छाल्ही आदि निकालबाक कार्य करैत ओहि आयोजना केँ आपूर्ति करबाक कार्य करबाक अधिकार सेहो भेट गेलैक।
 
बाद मे डा. वर्गीज कुरियन तथा एच. एम. डलाया द्वारा एहि सहकारी संस्थादिक कुशल व्यवस्थापन सँ संस्थानक गतिविधि केँ विकसित करैत महींसक दुध सँ स्कीम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) सेहो बनायब आरम्भ भऽ गेल। ई काज विश्व मे पहिल बेर भारतहि मे एहि सहकारी संस्था द्वारा कयल गेल छल। एकर किछुए समय बाद गुजरातक आणन्द मे एकटा अत्याधुनिक दुग्ध आयोजना (डेयरी) केर स्थापना कयल गेल जे ताहि समयक स्थापित उत्पादक सभ संग वैश्विक प्रतिस्पर्धा करय मे सक्षमता हासिल कय लेलक। कुरियन केर सम्बन्धी (शाला) के. एम. फिलीप द्वारा मार्केटिंग केर कतेको नव-नव तौर-तरीका सँ ब्रान्ड केर लोकप्रियता आ परिचिति बढेबाक दिशा मे कार्य करबाक प्रेरणा देल गेल छल। एहि तरहें त्रिदेव – त्रिभुवनदास के. पटेल, कुरियन आ डलाया केर संयुक्त प्रयास मे गुजरातज आणन्द सँ पड़ोसी जिला (इलाका) मे सेहो ई क्रान्ति पसैर गेल छल। किछुए समय मे मेहसाणा, बनस्कंठा, बड़ौदा, सबरकंठा आ सुरत – एहि पाँच जिला मे संस्थाक कार्य-गतिविधि पसैर गेल छल। एहि अभियान केँ मैनेजमेन्ट कोर्स मे ‘आणन्द पैटर्न’ सेहो कहल जाइत अछि। बाद मे काइरा युनियन सँ गुजरात कोओपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड जे आजुक समय मे अमुल केर बाजार-व्यवस्थापन देखैत अछि – आर एकरे तकनीक भारतक लगभग अन्य-अन्य भागहु मे लोकप्रियता संग स्थापित कयल जा चुकल अछि, आइ अमुल भारतहि टा नहि विश्व केर एकटा अति-लोकप्रिय ब्रान्ड केर रूप मे स्थापित अछि। काल्हिये ३० सितम्बर २०१८ केँ प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अमुल केर एकटा चोकलेट प्लान्ट केर उद्घाटन कयल गेल अछि। एहि अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी कहलनि अछि जे विश्व केर कतेको अर्थतंत्र सँ आगू बढत भारत जल्द, जाहि मे विशेष तौर पर ओ बेलायती अर्थतंत्रक नाम सेहो लेलनि। 
 
मिथिला मे दुधक मांग अनुसार उत्पादनक अभाव मे एहि तर्ज पर सहकारिता संस्कृति सँ उपलब्धिमूलक काज कयल जा सकैत अछि।
 
हरिः हरः!!
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