भजन: निलकंठ मधुकर पदावली

– पंडित मधुकान्त झा ‘मधुकर’, ग्राम: चैनपुर, सहरसा, मिथिला

sitaram1जनकपुर स्थित कमनीय अनुपम कोबर मे सीताराम के।
शक्तिब्रह्म समक्ष माय सीताक अनुचरी के उक्ति॥
दूलहा राम के प्रति:

हिऔ मिथिला के दूलहा कमाल करै छी।
दीन दुखिया बेहाल के नेहाल करै छी॥
हिऔ मिथिला……

हम जानै छी, हम जानै छी,
कृपा सिया के महिमा बखानै छी!

हिरण्यकश्यप केँ नरसिंह बनि फारलौं,
कृष्ण बनि दुर्जन कंस बजारि मारलौं!
घर मे निर्धन के बनि कय मसाल जरै छी॥
हिऔ मिथिला….

द्रौपदी काज वसनावतारे भेलौं,
भक्त केवट केँ रज दय उद्धारे केलौं!
कखनो दीनो सुदामाक जंजाल हरै छी॥
हिऔ मिथिला….

कखनौ उगना बनि विद्यापतिक संग मे!
कखनौ गोपीक प्रेमक रंगल रंग मे!
कखनौ उजड़ल कय राम! मालो माल करै छी॥
हिऔ मिथिला के दूलहा….

अहाँ तारव धरि कहियो ई आश धेने छी,
सतत भक्त हृदय मे निवास केने छी!
नित्य निर्मल जन जानि नन्द लाल ढरै छी॥
हिऔ मिथिला के दूलहा….

अपने करुणा वरुणालय अनन्त नाम छी,
अहाँ रहिते एहि जग मे दहिन वाम छी!
अहीं सब जीव-जन्तुक प्रतिपाल करै छी॥
हिऔ मिथिला के दूलहा…

जानकीनाथ बिना ‘मधुकर’ क जान कि,
प्राण मिथिलाक जनकी नन्दिनी जानकी!
अहाँ गुदरी भरल घर मे लाल भरै छी॥
हिऔ मिथिला के दूलहा….

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