विश्वकर्मा पूजा विशेषः संछिप्त पूजा विधि सहित

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विश्वकर्मा पूजन विशेष

विश्वकर्मा पूजा : सम्पूर्ण विधि

आइ हम अहाँ केँ विश्वकर्मा पूजा करबाक सम्पूर्ण विधि बता रहल छी आर जानू २०१७ मे विश्वकर्मा पूजा केर तिथि.

– जसविंदर कौर रीन

(अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)

निर्माण और सृजन केर देवता मानल गेनिहार विश्वकर्मा जी हस्तलिपि कलाकार छथि। एहेन मान्यता अछि जे स्वर्ग लोक, लंका, हस्तिनापुर, द्वारकापुरी सेहो हिनकहि कला केर उदाहरण थिक। विश्कर्मा जयंती या विश्वकर्मा पूजा केर दिन ख़ासकय उद्योग काम आबय वला सारा वस्तु, औज़ार, मशीन तथा सब दोकान मे जतय कतहु किछु बनेबाक कार्य होइत छैक, ओतय पूजा कयल जाइत अछि।
विश्वकर्मा पूजा

विश्वकर्मा पूजा कोन दिन होबक चाही? ई लय केँ सेहो लोक अलग अलग विचार रखैत अछि। कियो ई दिवालीक दोसर दिन तऽ कियो ई भाद्रपद माह मे शुक्लपक्ष मे पड़यवला चतुर्थी केँ मनबैत अछि।

भाद्रपद माह मे एहि वर्ष विश्वकर्मा जयंती १७ सितम्बर २०१८ केँ अछि। आउ विस्तारपूर्वक जनैत छी, विश्वकर्मा पूजाक सम्पूर्ण विधि और एकर पाछाँक कथा केँ पौराणिक कथा केर वर्णन मे ई लिखल गेल अछि जे जखन एहि संसार केर सरंचना भेल छल तखन विष्णु जी समुद्र सँ प्रकट भेल छलाह आर विष्णु जी केर नाभि सँ ब्रह्मा जी एहि संसार मे एलाह।

ब्रह्मा जी केर पुत्र रत्नक नाम छलन्हि धर्म, जे वास्तु नामक कन्या सँ विवाह कयलनि। धर्म और वास्तु केँ ७ पुत्र रत्न केर सिद्धि प्राप्त भेलनि। जाहि मे सँ सब सँ छोट और ७म पुत्र केर नाम छल ‘वास्तु’ जे कला मे पारंगत छलाह। यैह वास्तु केर पुत्र भेलाह विश्वकर्मा जिनकर शिल्पकला पूरा विश्व मे अद्वितीय भेल।

पूजा विधि – कोनो पूजा प्रातःकल मे स्नान कयलाक बादे आरम्भ होइत अछि। ई पूजा अहाँ केँ अपन अर्धांगिनीक संग करक चाही। अपन पत्नीक संग मिलिकय यज्ञ मे सम्मिलित होबक चाही। हाथ मे चावल ग्रहण कय विश्कर्मा जी केँ स्मरण करैत एहि मंत्र केर उच्चारण करबाक चाही “ॐ आधार शक्तये नम:” और “ॐ कूमयि नम:”, “ॐ अनन्तम नम:”, “ॐ पृथिव्यै नमः” तथा “ॐ श्री सृष्टिनतया सर्वसिद्ध्या विश्वकर्माया नमो नमः”।

भगवान विश्वकर्मा

पूजा सामग्री मे धूपबत्ती, दीपक, सुपारी, फूल, गंध तिलक आदि केर प्रयोग कयल जेबाक चाही। पूजा स्थल पर जल सँ भरल गेल कलश रखबाक चाही। विश्वकर्मा जी केर मूर्ति या तस्वीर केँ स्थापित कय हुनकर पूजा करबाक चाही। तेकर बाद जतेको रास औज़ार, मशीन आदि अछि, ताहि सभक पूजा करबाक चाही। यज्ञ समापत होयबाक बाद प्रसाद वितरण कयल जेबाक चाही।

एहि पूजा केर फल हरेक व्यक्ति केँ भेटैत अछि, मुदा जखन व्यापारी एहि पूजा केँ करैत अछि, ओकरा धन धान्य केर प्राप्ति होइत छैक और ओकर कारोबार मे अपार वृद्धि होइत छैक।

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