साक्षात् जानकीदूत हनुमानजीक समान छथि मैथिलीदूत विनोद बाबू

संस्मरण

– प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिलीक दूत विनोद बाबू

प्रस्तुत तस्वीर मे एक सँ एक मैथिलीक सपुत लोकनि देखा रहला अछि। सदिखन अपन मातृभाषा आ मातृसंस्कृति लेल जमीन आ आसमान एक कयनिहार कय गोटा शख्सियत केँ अपना सब एहि फोटो मे देखि रहल छी। अपन-अपन क्षेत्र मे सब कियो नीक योगदान दय रहला अछि। साक्षात् जानकीजी हिनका लोकनिक आत्मा मे अपन विशिष्ट शक्ति प्रविष्टि करौने छथिन। एखन अपने लोकनि मिशन मुम्बई पर भारतक आर्थिक राजधानी आ बालीवूड आदि उपनाम सँ प्रसिद्ध महानगर सँ ई फोटो सार्वजनिक कयलहुँ अछि। मुम्बई केँ मायानगरी सेहो कहल जाइत छैक। माया केर अर्थ बड़ा व्यापक – विश्व अर्थतंत्र मे मुद्रा केँ सेहो माया मानल जाइत छैक आर ताहि अनुसारे विश्व केर टौप-१० मेट्रो मे मुम्बई सेहो पड़ैत अछि आर ताहि ठाम एतेक रास जानकीजीक खास दूत सब एकत्रित हेता त कहू किछु न किछु त बात जरूर हेतैक। बातक रहस्य पर सँ पर्दा बाद मे उठायब…. एखन सीधे आंगूर रखैत छी बीच मे जे गोरे-गोरे हैन्डसम ब्वाइ इन सिक्सटी देखा रहला अछि – जिनकर नाम छन्हि श्री विनोद कुमार झा आ जे मैथिली लेखक संघ केर महासचिव थिकाह, जिनका लोक दुलार करैत-करैत ‘सरकार’ उपनाम सेहो देने छथिन, सीधे हिनकर पैर पर अपन हाथ सँ स्पर्श करैत प्रणाम कय अपने लोकनि केँ एकटा निजी अनुभूति सुनाबय जा रहल छी – ई साक्षात् बजरंगवली जेहेन वर्तमान मैथिली जगत् केर जानकीदूत थिकाह आर से बातक साक्षात्कार हमरा भेल छल, वैह अनुभव सुनायब। भऽ सकैत छैक जे पहिनहुँ कहने होइक…. लेकिन आइ ई तस्वीर देखि हमरा विशेष प्रेरणा भेल जे किछु फेर लिखी।
 
मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर आयोजनक एकटा मूल स्तम्भ छथि श्री विनोद बाबू। मैथिली लेखक संघ केर परिचिति केँ वैश्विक पटल पर स्थापित करय मे ओना त यथार्थतः एक सँ बढिकय एक पुरोधा लोकनि मूल मिथिला निहित भारतीय राज्य बिहारक राजधानी पटना मे अपन झंडा गारने देखाइत छथि, २-२ टा महत्वपूर्ण आयोजन पटना मे सम्पन्न करा ग्लोबल स्टेकहोल्डर्स केर दृष्टि मे मैथिलीक सामर्थ्य केँ स्थापित कयलनि। परञ्च पटना सँ ऊपर उठि सीधे देशक राजधानी मे झंडा गारल जाय ताहि महान् सोच केर संग अपने श्री विनोद बाबू बड़ा शालीनता आ गंभीरता सँ निरपेक्ष सोच आ भावनाक संग मैथिलीभाषी सकारात्मक शक्ति (युवा आ सर्जकवर्गक लोक सब) केँ जोड़ि आखिरकार मार्च २०१८ मे ३ दिवसीय मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, दिल्ली मे सफलतम आयोजन कय केँ अपन सक्षमता केँ पुनः स्थापिते टा नहि कयलनि बल्कि एहि कलियुग मे सेहो जानकीक अनुपम कृपापात्र हनुमानजी जेकाँ अष्ट सिद्ध नव निधि केर दाता बनिकय मातृभाषा मैथिलीक सैकड़ों स्रष्टाक महाकुम्भ लगाकय ई देखा देलनि जे धर्मक राज्य सदावर्त ढंग सँ चलैत रहल, चलैत रहत। कतबो पापाचारी, लोभी, अपनहि नामक पाछाँ बेहाल लोकक जमावरा लेल प्रसिद्ध अछि दिल्लीक दिलवाली भूमि – धरि जानकीदूत बजरंगवली जेकाँ दर्जनों सत्र, ससमय, सुनियन्त्रित, सम्पूर्ण सार्थकताक संग सम्पन्न करेनाय आ एको मिनट अपने आराम तक नहि केनाय…. एकटा जीन्स आ कुर्ता मे हवाक गति सँ चलैत नहि बल्कि उड़ैत सब काज यथा अतिथिक भोजन बनल कि नहि, भोजन परोसल गेल आ ओ सब केँ पुरत कि नहि, सत्र चालू भेल वा नहि, ऐगला सत्र लेल निर्धारित स्थान मे टेन्ट, कुर्सी, साउन्ड आदिक व्यवस्था पूरा भेल वा नहि, निर्धारित वक्ता-प्रस्तोता समय सँ आबि गेल छथि आ कि फोन कय केँ बजेबाक आवश्यकता अछि…. कोन अतिथि कतय रहता, किनका रूम मे मिनेरल वाटर केर बोटल्स पहुँचायल गेल, हिन्दी भवन, जैन भवन, प्राइवेट होटल, बाप रे बाप! एकदम पवनपुत्र हनुमान केर कैरेक्टर मे देखेला हमरा श्री विनोद कुमार झा।
 
संयोगवश आयोजन सँ पूर्वहि ‘सरकार’ केर आदेशानुसार हमरा दिल्ली पहुँचबाक युक्ति जानकीजी लगा देने छलीह। ताहि सँ पूर्वहि ‘दिल्लीक दिलवाली भूमि’ केर व्याख्या मे लिखल ‘अपन दिल्ली’ नामक स्मारपत्र हिनका पठा देने रहियैन, कारण काज करनिहार लोक लेल ब्लू प्रिन्ट (अवधारणा पत्र) परमावश्यक होएत छैक। गीता-बाइबिल जेकाँ ओ मार्गदर्शन करैत छैक आ तदनुसार सब कार्य केँ संयोजन करबाक लेल युक्ति दैत छैक। आर एक अनुभवी व्यक्ति लेल त सिर्फ इशारा काफी, संकेतहु मे देखायल-कहल बात दूरगामी जेकाँ आँखिक सोझें झलैक उठैत छैक। बिल्कुल सोचल-बुझल पूर्वानुमान जेकाँ एतेक पैघ आयोजन लेल दिल्ली मे विनोद बाबू मैथिली साहित्य सम्मेलन केर अध्यक्ष आ समर्पित सज्जन, ओतबे शालीन, गंभीर आ युक्तिकुशल व्यक्तित्व संजीव सिन्हाक सङोर मे एक-एक बात केँ पटरी पर आनैत एहि वृहत् आयोजन मे पूर्ण तल्लीन छलाह। दिल्ली मे बहुत बात भावना सँ नहि कयल जा सकैत छैक, ताहि लेल उचित विभागक पूर्वानुमति पत्र चाही – पत्र लेल टका (दस्तुरी) तिरब – सेक्युरिटी मनी डिपोजिट करब आ सेहो कम-सम मे नहि, हजारक-हजार मे खर्चा करब तखनहि सब काज समय पर होयत – एहि सब लेल विनोद बाबू आ संजीव सिन्हा जी केर गति आ स्फूरणा देखबाक सौभाग्य भेटल। थाना, अग्निशमन, ट्रैफिक, म्युनिसिपैलिटी, रेजिडेन्सियल अरैन्जमेन्ट्स, इवेन्ट स्पौट्स, सत्र व्यवस्थापनक तैयारी – ओ माइ गौड! हर कार्य मे श्री विनोद कुमार झा।
 
कखनहु जेबी खाली, कखनहुँ भुखले, कखनहुँ परेशान, कखनहुँ हैरान….. आर ताहि पर सँ दिल्लीक बादशाह मैथिल ‘नेताजी’ लोकनिक झार-फटकार वला फोन। बेचारा एक कान मे फोन लगौने, मुंह सँ फोन कयनिहारक शिकायत जे हमरा सँ पूछबो नहि करय छी आ हमरा दरकिनार करैत अहाँ कोनो आयोजन कय लेब से अहाँक दिन छी…. आदि केँ जबाब दैत, बाबू-नुनू-बच्चा कहिकय बोधैत…. आ दोसर दिस इशारा सँ डिजाइन बना रहल भाइ-बंधु केँ कंप्यूटर पर इंगित कय सुधार करय लेल कहैत, खने साझेदार प्रायोजक ‘मैथिली भोजपुरी अकादमी’ केर पदाधिकारी सँ तकनीकी पक्ष सब पर विमर्श, दौड़-बड़हा, उछल-कूद, ई सबटा मानू ओहिना जेना हनुमानजी मूर्च्छित लक्ष्मणजी केँ बचेबाक लेल रामचन्द्रजीक आदेश पर कखनहुँ सुषेण वैद्य केँ अपन गृह मे सुतले गृह सहित उठाकय आनि लेलनि, पुनः सुषेण वैद्य केर निर्देशानुसार संजीवनी बूटी लाबय लेल हिमालय पहाड़ कूच कय गेलाह, ओतय बूटीक पहिचान नहि होइत प्रतीत भेलापर पूरे पहाड़े उठाकय चलि देलनि, राह मे अयोध्याक आकाश मे भरतजी केँ आशंकाक कारण बिना फलवला बाण सँ मूर्च्छित भऽ धरती पर खसि पड़लाह, फेर शंका समाधान उपरान्त भरतजीक शक्तिबाण पर सवार पल भरि मे लंका पहुँचि गेलाह आर मेघनादक ब्रह्मबाण सँ मूर्च्छित लक्ष्मणजीक प्राण बचा लेलनि…. श्री विनोद कुमार झा आइ के समय मे मूर्च्छित पड़ल मैथिली केँ प्राण रक्षा लेल बिल्कुल हनुमानजी जेकाँ छथि। ई बात हमर मोन मे चलिये रहल छल कि पहिल दिनक आयोजन समाप्त भेला उपरान्त सब तरहक सरोकारक बात केँ सल्तनत करैत हिनका पर गोटेक लोक केँ जे क्रोधित भऽ अनाप-शनाप बजैत देखलहुँ, ताहि मे जे हिनकर विवशता देखायल आर तेकर प्रतिकार जाहि तरहें ई शान्त आ विनीत स्वर मे कयलन्हि – ई सब हिनका मे साक्षात् हनुमानजीक रूप हमरा प्रत्यक्ष देखा गेल। हम हृदय सँ हिनका साष्टांग दण्डवत् कयलहुँ। एको पल हिनकर सान्निध्य सँ हंटबाक इच्छा शेष नहि छल हमरा मे…. संजीव सिन्हा आ विनोद बाबू दुनू हमरा लेल परम ईष्ट केर रूप बनि गेल छलाह एखन धरि। जखन हम विनोद बाबूक एहि विशेषताक वर्णन कय रहल छी त संजीवजी एकदम गौण नहि छथि, ओ विनोद बाबूक छायारूप मे विद्यमान छथि हमर एक-एक भाव आ अभिव्यक्ति मे।
 
राति भरि हम सब एक्के ठाम बितेलहुँ। देर राति धरि ऐगला दिनक समीक्षा चलैत रहल। ई त बात सच छहिये जे जँ कोनो काज देवता वा पितर वा लोकोपकार लेल अहाँ करब आ बड़ थाकि जायब तैयो थकावट मिनट मे छूमन्तर भऽ जायत कारण अहाँ पर त अलौकिक शक्तिक महिमा प्रत्यक्षतः काज करैत रहैत अछि। वैह भेल, हमरो सनक अभागा एहि दुइ महाभाग संग रहिकय बीमार-बुखार मे सप्ताह बितेलाक बाद कमजोर रहितो एकदम स्फूर्तवान बनल रहलहुँ। भोरे उठलहुँ। पहिल दिनक पहिरल कपड़ा पुनः फेरिकय पहिरलहुँ कारण हमर बैग-बैगेज दूर साढू (विनीतजी) केर घर संतनगर-बुरारी मे छल। लेकिन कपड़ा आ देखाबा केँ के पूछैत अछि जखन अहाँ स्वयं भगवानक सान्निध्य मे छी आ भगवान् स्वयं वैह फेरलहबे कपड़ा पहिरिकय ठानल यज्ञ केँ निष्पादन लेल आतुर छथि। सचमुच, ई क्षण हमरा लेल अति-विशिष्ट रहल। ताहि पर सँ मैथिलीक १०० सँ ऊपर विद्वान् सर्जक लोकनि, सब विश्वकर्मा लोकनि, वशिष्ठ आ विश्वामित्र लोकनि, जनक आ दशरथ लोकनि, गौतम आ याज्ञवल्क्यक संग महान् लोकपुरुष सलहेस आ दीनाभद्री लोकनि, गार्गी आ मैत्रेयी लोकनि। आह! हे ईश्वर! अहाँक सत्कृपा हमर सम्पूर्ण मिथिलाक एहि विशिष्ट गण – सज्जन – महान लोकनि पर बनल रहय। विनोद बाबू आब जे नव सपना देशक आर्थिक राजधानी मुम्बई लेल निर्णय कय लेलनि अछि ताहि मे मरुद्गण महाराष्ट्र प्रवासी मैथिल लोकनिक सद्भाव जरूर भेटनि आर ओहो सब एहि आयोजनक प्रत्यक्षदर्शी बनिकय जीवन सफल करथि, एहि शुभकामनाक संग आदति मुताबिक लंबा लिखल ताहि लेल क्षमाप्रार्थना करैत लेख केँ विराम दैत छी। जय मिथिला – जय जानकी!!
 
हरिः एव हरः!!
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One Response to साक्षात् जानकीदूत हनुमानजीक समान छथि मैथिलीदूत विनोद बाबू

  1. संजीव कुमार सिन्‍हा

    सच मे, मैथिली लिटरेचर फेस्‍टिवल मे विनोद जीक प्रतिबद्धता आ कर्तृत्‍व जे हम निकट सं देखलहुं, से हमरा लेल सदैव प्रेरक रहत।

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