हाथी चले बजार – कुत्ता भुके हजारः सन्दर्भ ५ अगस्त मिथिलावाद लेल दिल्ली मे बनल २ इतिहास

दिल्ली मे ५ अगस्त केँ २ टा ऐतिहासिक आयोजन भेल, दुनू महत्वपूर्ण छल

५ अगस्त केँ दिल्ली मे मिथिलावाद दू तरहें स्थापित भेल। एकटा क्रान्तिकारी प्रदर्शन कय केँ मिथिला डेवलपमेन्ट बोर्ड केर गठन लेल सरकार पर दबाव बनेबाक लेल काज केलक, ओत्तहि दोसर मिथिलाक हेराइत लोकसंस्कृति केँ बचेबाक लेल मधुश्रावणी सनक पाबैन केँ व्यक्तिगत घरक चौखैट सँ बाहर निकालिकय सामूहिकताक प्रदर्शन करैत मधुश्रावणी महोत्सवक रूप मे मनाओल गेल। दुनू काज ओतबे महत्वपूर्ण आ मिथिलावाद केर संरक्षण लेल अनिवार्य कार्यक श्रेणी मे छल। एकटा मिथिला स्टुडेन्ट यूनियन द्वारा आ दोसर अखिल भारतीय मिथिला संघ द्वारा आयोजित छल। एकटा सड़क आन्दोलन छलैक जाहि मे लगभग २००० आदमीक विशाल सहभागिता जे मिथिला लेल कोनो तरहक आन्दोलन मे पहिल कहल जा सकैत अछि; दोसर सेहो तेहने ऐतिहासिक जाहि मे १०० सँ ऊपर मधुश्रावणी पूजनिहाइर मिथिलानीक संग किछु बुढो बरद सब अपन-अपन पुरान स्मृति केँ ताजा कय फेर सँ जबान बनबाक लेल अपन-अपन कनियाँ संग गेंठ जोड़िकय बड़-बुजुर्ग सँ आशीर्वाद सेहो लैत मधुश्रावणी महोत्सव मनौलनि। रंग-बिरंगक फूल-पत्ती सँ डाली सजाओल गेल, सखी-बहिनपा सब खूब गीत सब गेलनि आर अपन मिथिलाक सुसभ्य सांस्कृतिक समृद्धि सँ उपस्थित जनमानस केँ खूब आनन्द दियबैत कथमपि मूल सभ्यता आ मूल भाषा ओ वेश आदि नहि बिसरबाक एकटा सशक्त सन्देश देलनि। लेकिन एक्के दिन ई दुनू उत्सव भेलाक कारण गोटेक टिपौरीलाल अपना-अपना तरहें एक-दोसराक आयोजन पर समर्थन-विरोधक विभिन्न स्वादक बात सब लिखि सामाजिक संजाल मे एहि चर्चा केँ कनेक लंबा बना देलनि, तेकरो हम स्वागत करी।
 
फोटो मे मधुश्रावणी महोत्सव केर दृश्य देखि रहल छी। एहि मे अभिभावक विजय चन्द्र बाबू युगल जोड़ी सब केँ आशीर्वाद दय रहल देखाइत छथि। अखिल भारतीय मिथिला संघ द्वारा दिल्ली मे आयोजित मधुश्रावणी महोत्सव मे फूल लोढी आ गीत गायन सभक कार्यक्रम भेल। किसलय कृष्ण कहने छलाह जे रिपोर्ट पठायब, पूरा बात नहि बुझि सकलहुँ कारण रिपोर्ट नहि आबि सकल। लेकिन जेना मिथिला मे होइत छैक जे स्वयं किछु करब नहि आ दोसर जे करत तेकरा पर टीका-टिप्पणी सब करैत अपना मोन केँ सन्तोष देब जे चिन्ता नहि करे प्रवीण नारायण, तहुँ मनुक्खे छँ से ओ जे केलकैक तेकर टीका-टिप्पणी कय केँ अपन मोन केँ मना ले। 😉 बस, फेर कि! जखन मोन कहिये देलक तऽ लगलहुँ दोसर द्वारा कयल गेल कोनो आयोजन पर यथाभावी बात सब लिखय…. एम्हर झगड़ा लगेलहुँ, ओम्हर लगेलहुँ, एकरा बोकियेलहुँ, ओकरा बोकियेलहुँ आ ताहि चक्कर मे अपना जीवने केँ बोकिया लेलहुँ से ओहि बोकियेनिहार टीका-टिप्पणी मे लागल लोक केँ शुरू-शुरू मे पता नहि चलैत छैक…. अन्त समय जखन गुंह गिजिकय मृत्युशैय्या पर मृत्युक प्रतीक्षा करैत रहैत अछि तखन ओकरा ई अनुभव होएत छैक जे रे हरासंख, ओकरा सँ त गलती-सही जे भेलैक ओ केलकैक… रे तूँ भैर जीवन दोसरेक केलहा पर टीका-टिप्पणी छोड़ि अपनो किछु केलें जे लोक तोरा यादो करतौक…!
 
खैर! टिपौरीलाल केर काज ओ जीवन भरि करिते रहत। एतय सवाल छैक जे दिल्ली मे बसनिहार किंवा प्रवास कयनिहार मैथिलीभाषी आखिर कियैक एहि तरहें मिथिलावाद (मिथिलत्व) केर संरक्षण मे आगाँ बढि रहला अछि। निज मिथिलाक भूमि पर जे चुप्पी देखाएछ – एतय कोनो उत्साह आ आनन्दक मौलिक आयोजन आखिर होइतो अछि वा नहि, ताहि पर कतहु चर्चा कियैक नहि होएत अछि। मिथिलाक भूमि पर बाकी बचल लोक कि अपन सभ्यता बिसैर रहल छथि या एतय ई सब आयोजन होइते नहि छैक। – ई किछु रास सवाल पर विमर्श हेबाक चाही। मिथिला डेवलपमेन्ट बोर्ड लेल छात्रक समूह दिल्ली हिला देलक, लेकिन निज मिथिलावासी आमजन – सामान्य जनता मे एहि लेल कोनो ललक सच मे कतहु सुनबो केलियैक? चुनाव बीत गेलाक बाद एतुका चुनल गेल जनप्रतिनिधि जनता केँ लुल्हुआबैत रहल, जनता सेहो बिन पैनक बरद जेकाँ घसमोरने रहल, मूरी गोंतने रहल, एहिना त चलैत छैक। जखन कतहु कोनो तरहक आन्दोलन मूल भूमि पर हेब्बे नहि करतैक त दिल्लीक जन्तर-मन्तर आ संसद मार्ग मे त सब दिन कोनो न कोनो आयोजन होएत छैक, आर तेकर देखादेखी मिथिलाक उत्साही युवा सब किछु करत तेकरा स्वाभाविके मानू। ओना ई कहि दी जे अपन मौलिकताक महत्व मौलिक स्थान सँ दूर भेलापर लोक केँ बेसी बुझय मे अबैत छैक। तहिना गाम-घर मे मधुश्रावणी मे सामूहिकता मे कतहु महोत्सव केर औचित्य शायद लोक केँ बुझय मे नहि अबैत हेतैक, मुदा एखन कतहु जायब त नव-विवाहिता कन्या लोकनि समूह मे फूल लोढबाक लेल गामक मन्दिर या फूलबारी वगैरह मे समूह गान करैत अबिते छथि, एकठाम बैसिते छथि आ सब कियो सुखी दाम्पत्य जीवन लेल – पतिक आयूक रक्षा लेल नागलोक, पितरलोक, देवलोक आदि सँ अपन विनती करिते छथि। दिल्ली मे सामूहिकता केँ स्थापित करबाक लेल संस्थागत प्रयासक सराहना हेबाक चाही। टिपौरीलाल केर टिप्पा पर सिर्फ जोरदार ठहाका लगेबाक चाही। ई सब उत्प्रेरक केर काज नीक करैत छथि। हमरा तरफ सँ मिसू आ अभामिसं दुनू केँ धन्यवाद। दुनूक अलग-अलग धार पर काज भले एक्के दिन भेल, दुनू अपन स्वतंत्र तैयारी मे दू टा महत्वपूर्ण कार्य कयलक, एहि लेल हम सब मिथिलावादी काफी प्रसन्न छी। अस्तु! पुनः धन्यवाद।
 

हरिः हरः!!

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