धर्म, संन्यास, कर्तब्य, अकर्तब्य, लोक-आस्था, कर्तव्यपरायणता: गंभीर आह्वान

umakant jha bakshiमैथिली जिन्दाबाद पर प्रकाशित ‘विशेष संपादकीय’ मे पुरी मठकेर शंकराचार्य आ हुनक मूल परिवारजनक दयनीयता पर मैथिली-हिन्दी कवि एवं अभियानी ‘उमाकान्त झा बक्शी’ केर भावुक लेकिन यथार्थ उद्बोधन करयवला मनोभावना आ सार्वजनिक आह्वान – राज्य सरकार, केन्द्र सरकार, समाजसेवी, बुद्धिजीवी एवं समस्त मैथिली-मिथिला अभियानी सँ। जरुर पढू!! स्वयं श्री बक्शी केर शब्द मे:

अनंत श्री विभूषित स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, ‘शंकराचार्य’, गोवर्धन मठ, स्वर्गद्वार पूरी।
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धानकर्षण संपादक, मैथिलि जिंदाबाद डॉट कॉम!

५ मई, २०१५ परम श्रद्धेय पुज्यपाद शंकराचार्य स्वामी श्री निशचलानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री मिथिला शारदीय दुर्गा पूजा समितिक प्रांगन, इन्द्र इनक्लेव दिल्ली -२ मे धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष पर जे हुनक ओजस्वी धर्मोपदेश भेल से हृदय मिश्रा दिल्ली निवासीक शब्द मे हुनकर पोस्ट दिनांक ७ मई २०१५ पर वर्णित अछि। ह्रदय मिश्र जी केर शब्द मे …

“प्रवचन मे सनातन धर्मक चारि स्तम्भ धर्म, अर्थ, काम आ मोक्ष मे सँ ‘धर्म और मोक्ष’ केँ लोक बिसरि गेल आ अर्थ तथा काम पर मोन सतति रखने रहैछ, एहि कारणे संसार मे एतेक अनाचार आ अत्याचार भऽ रहल अछि। राष्ट्र हितक लेल केंद्र तथा राज्य सरकारक कर्तब्य पर यंत्रक अत्यधिक उपयोग आ अतीत, वर्तमान आ भविष्य मे एहि सँ होमय बला दुस्परिणाम सँ त्रिकालदर्शी महाराज श्री अति चिन्तित छथि आ अपन एहि चिन्ता सँ लोक केँ सचेत कयलाह। स्पष्ट अछि जे विकाशक नाम पर कयल जा रहल विनाशक खेल केँ अति प्रभावी एवम् सरलता सँ श्रोता लोकनि केँ मध्य रखलन्हि। अन्त मे राज्य सरकार आ केन्द्र सरकार केर कमजोर नीतिक कारण अतीत, वर्तमान एवम् भविष्य मे होमयबला भयाबह परिणामक चर्चा निष्पक्ष भाव सँ केलन्हि।”

एहि सँ पूर्व “लाल बनल शंकराचार्य – पोसनिहारि जननी भेल ‘बताहि सँ बतहिया’” शीर्षक केर अंतर्गत अनंत श्री विभूषित स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, शंकराचार्य गोवर्धन मठ, स्वर्गद्वार पूरी केर जन्म स्थान हरिपुर बक्शीटोल आ हुनक संन्यास सँ पहिल परिवारक विवरण आ ताहि परिवारजन मे शंकराचार्यक लालन-पालन केनिहार माता-पितातूल्य जेठ भाइ व एक बाल-विधवा बहिनक वर्तमान आर्थिकअवस्था तथा सामाजिक असंवेदनशीलता पर विशेष आलेख सम्पादकीय मे प्रकाशित भेल छल।

हरिपुर मजरही टोल निवासी स्व. जयमंत मिश्र केर सुपुत्री प्रोफ़ेसर (श्रीमती) इंदिरा झा केँ एही समस्या पर ध्यान देबाक लेल हम मोबाइल पर संपर्क कयल। शंकराचार्यक दिल्ली कार्यक्रम मे व्यस्तताक कारणे बाद मे बात करब, ततेक आस्वाशन भेटल, परन्तु एखन धरि हुनका समय केँ समावेश नहि भेल या आशंका कतहु इहो अछि जे ओहो एहि सवाल पर उदासीन छथि।

शंकराचार्य जी द्वारा देल गेल प्रवचन में धर्मक जिक्र अछि। करोड़ों आस्थावान पर हुनक प्रत्येक आह्वानक प्रत्यक्ष असर पड़ैत अछि, कारण ओ आस्थाक एकटा अति महत्त्वपूर्ण आ सम्माननीय स्थान पर विराजित छथि। मुदा प्रश्न ई उठैत अछि “जे हुनकर लालन-पालन कयलन्हि, जेठ भाय, जेठ भौजाइ, बहिन जे एखन वृद्धावस्था मे करीब ९० वर्षक छथि, हुनका सबहक ऋण सँ संन्यासी आश्रम मे प्रवेश करैत ओ ऊऋण भऽ गेला?” एतय धर्म कि चुप अछि, कर्तब्य निर्वाह सँ धर्म प्रबल होइछ, कर्तब्यपरायणता धर्मक अभिन्न अंग थीक, अकर्तब्यक स्थिति तखन कियैक? एहना सन स्थिति मे कर्तब्य आ अकर्तब्य केर कि मापदण्ड हो? सनातन धर्म मे एकर कि औचित्य अछि?

राज्य सरकार शिक्षकक बहाली करैत अछि। परन्तु शंकराचार्यक भतीजी श्रीदेव झा केर बेटी जे पति-परित्यक्ता अछि, असहाय अछि, ओकरा लेल कोनो सहानुभूति आ अनुकम्पा नहि? श्रीदेव झा’क आयु १०० वर्ष हेतनि, हुनकर बहिन जिनक नाम बताहि छनि, उम्र ९० वर्षक करीब और शकराचार्य केर भौजाइक उम्र ८५ वर्ष करीब, ताहि संग एक पतिपरित्यकता शंकराचार्य केर भतीजीक उम्र ३० वर्ष – सब कियो असहाय दिन राति दुनु साँझक भोजन शंकराचार्य जी केर भतीजा जे दिल्ली मे रहैत अछि हुनकर दया पर निर्भर अछि।

एखन केंद्र मे हिंदुत्वक रक्षा कएनिहार सत्तापक्ष धरि हमर भावना प्रेषित हो। शंकराचार्यक जन्म स्थानक माँटि हरिपुर सँ पूरी मठ आ पूरा देश मे छीटल जा रहल अछि ताहि सँ मिथिला गौरवान्वित अछि, शकराचार्य हमरे। गाम मे दुर्गा पूजा मे ताम-झाम व्यवस्था आ देखाबटी ऊपर लाखों-लाख टाकाक खर्च होइत अछि। अष्टजाम-नवाह होइत अछि, सत्यनारायण भगवानक कथा आ सुन्दर काण्ड रामायण केर पाठ सेहो खूब धुमधाम सँ कैल जाइछ। कि एतेक विवेक नहि उत्पन्न होइछ किनको मे जे एहि परिवार सँ गाम व सगर मिथिलाक मान-सम्मान बढल तेकर वर्तमान दयनीयता केँ समाधान निकालि सकी?

राज्य सरकार, केन्द्र सरकार, गाम-समाज, मैथिली-मिथिलाक झंडा लय चलनिहार आ एहि मनोभावनाक सुननिहार प्रत्येक विवेकशील मानव सँ आह्वान अछि जे धर्मक गरिमाक निर्वहन हेतु अकर्तब्य केँ त्याग करैत वांछित कर्म कय समाज केँ सही दिशा प्रदान करय।

– उमाकान्त झा ‘बक्शी’

कोलकाता, भारत।

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One Response to धर्म, संन्यास, कर्तब्य, अकर्तब्य, लोक-आस्था, कर्तव्यपरायणता: गंभीर आह्वान

  1. प्रकाशनार्थ धन्यबादक संग मैथिली जिंदाबाद के शुभकामना छी।

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