काठमांडू मे मोदी देलनि जनकपुरक दृष्टान्त, कथित नाकाबन्दी लेल तरे-तरे विरोधक छल माहौल

विचार

प्रवीण नारायण चौधरी, मई १२, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!!

नेपाल मे कथित अघोषित भारतीय नाकाबन्दीक पृष्ठभूमि

नेपाल मे नव संविधानक घोषणा भारतक इच्छा अनुरूप नहि कयल गेल छलैक। भारतक अनुरोध जे असन्तुष्ट मधेसी केँ सेहो विश्वास मे लैत सर्वसम्मति सँ नव संविधान जारी कयल जाय। एहि प्रस्तावक संग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीक विशेष दूत राजनयिक एस. एस. जयशंकर केर अकस्मात् काठमांडू यात्रा संविधान घोषणा करबाक घोषित तारीख सँ मात्र गोटेक दिन पहिने कराओल गेल छलैक। परञ्च नेपाली राजनीतिक शक्ति द्वारा भारतक ओहि प्रस्ताव केँ नहि मानल जेबाक कारण भारतीय पक्ष मे नेपाल मे जारी मधेसवादी राजनीतिक शक्ति द्वारा कयल जा रहल आन्दोलन केर समाधान लेल चिन्ता पसरबाक स्थिति बनि गेल रहैक। भारतक चिन्ता नेपाल मे अशान्ति आ गृहयुद्ध केर स्थिति सँ बनल रहैक, जाहि कारण नेपालक संविधान सभा मे प्रमुख राजनीतिक शक्ति सँ ओ शान्तिपूर्ण समाधान ताकि रहल छल। मुदा आखिरकार भारतक एहि प्रस्ताव केँ ठुकरबैत नेपाल द्वारा नव संविधान जारी कयल गेलैक जाहि पर भारत बाकायदा असन्तोष प्रकट करबाक काज बाकायदा विज्ञप्ति जारी कय केँ केने छल।

एम्हर मधेस मे जारी अनिश्चितकालीन बन्द आरो वीभत्स रूप लय लेने रहैक, दर्जनों आन्दोलनकारी नेपालक सुरक्षाकर्मीक गोली सँ अपन प्राणक शहादति देने छलैक। संविधान जारी कयला उत्तर जतय एक दिस प्रमुख राजनीतिक शक्ति द्वारा दीपावली मनेबाक घोषणा कयल गेल छलैक ततय मधेसवादी आन्दोलनी सभ द्वारा संविधान केँ जरेबाक आ काला दिवस मनेबाक लेल ‘ब्लैक आउट’ केर घोषणा भेल छलैक। एहेन द्वंद्वक स्थिति मे अचानक भारतक विदेश मंत्रालय द्वारा विज्ञप्ति जारी कय केँ भारतक परिवहन सभक ट्रक द्वारा नेपाल लक्षित मालवाहक ट्रक केर आवाजाही ड्राइवरक जीवनपर खतरा रहबाक कारण बाधित होयबाक बात कहल गेल छलैक। एहि बात केँ नेपाल मे भारत द्वारा “अघोषित नाकाबन्दी” कयल जेबाक चर्चा खूब जोर पकड़ि लेलकैक आर लगातार नेपाल द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय सँ भारत पर ई नाकाबन्दी खत्म करबाक लेल दबाव बनायब शुरू कयल जा रहल छलैक, जखन कि भारत एहि नाकाबन्दीक बात केँ पूर्णरूपेण खारिज करैत नेपालक भीतर जारी मधेसवादी राजनीतिक शक्तिक बन्दी आ नाकाबन्दीक हवाला दैत भारतक ट्रक ड्राइवरक जीवन असुरक्षित होयबाक बात कहिकय एकरा लेल आन्तरिक नाकाबन्दी समाप्त करबाक लेल उल्टे नेपाल पर दबाव देल जा रहल छलैक।

नेपालक आन्तरिक समस्या लेल बेर-बेर वार्ता भेलाक बादो मधेसवादी आन्दोलनकारी द्वारा आन्तरिक नाकाबन्दी नहि हँटायल जा रहल छलैक, परिणामस्वरूप नेपाल मे आपूर्ति व्यवस्था केँ सुचारू करबाक लेल सेना तथा सशस्त्र पुलिस केर सहयोग लैत सुरक्षा घेरा मे कस्टम सँ जाँचपास करायल माल केर आवाजाही कयल जा रहल छलैक। नेपाली राजनीतिक शक्ति तथा नेपाल सरकारक मंत्री लोकनि अन्तर्राष्ट्रीय फोरम पर पर्यन्त देशक भूपरिवेष्ठित रहबाक भौगोलिक परिस्थिति मे भारतक असहयोग केँ अघोषित नाकाबन्दीक संज्ञा दैत एकरा अमानवीय, असंवैधानिक आदि कहल जा रहल छलैक। हालांकि एहि तरहक प्रश्न संयुक्त राष्ट्र संघ मे नेपालक प्रतिनिधि द्वारा उठेलाक बाद भारत एकर मुंहतोड़ जबाब दैत अपन आन्तरिक समस्या केँ सुधार नहि करबाक कारण देखबैत नेपाल केँ मुंहे भरे खसौने छलैक, संगहि भारत द्वारा नेपाल मे जारी शान्ति प्रक्रियाक विभिन्न उदाहरण दैत माओवादी जनयुद्ध सँ लैत राजतंत्रक अन्त आ गणतांत्रिक लोकतंत्रक स्थापना सभ मे भारतक सहयोगात्मक भूमिकाक बात मोन पाड़ैत निज कर्तव्य प्रति नेपाल केँ आगाह करेने रहैक, मुदा नेपालक राजनैतिक अवस्था रणनीतिपूर्वक मधेस आन्दोलन लेल पर्यन्त भारत केँ जिम्मेदार मानि बारम्बार ओकरा नाकाबन्दी कहिकय प्रचारित करैत रहलाक कारण नेपालक आधा आबादी पहाड़ी मूलक जनता मे एक तरहक भारत विरोधी जनाक्रोश पैदा कय देलकैक, एहि बात केँ कियो नहि नकारि सकैत अछि। जखन कि मात्र २-३ दिनक बाद भारतक हरेक ओ कस्टम चेकपोस्ट जतय नेपालक भागक कस्टम चेकपोस्ट केँ सुरक्षित देखलकैक तेकरा चालू कय देने रहैक, मुदा ‘नाकाबन्दी-नाकाबन्दी’क आरोप आ हल्ला नेपालक मीडिया आ पहाड़ी जनमानस द्वारा सोशल मीडिया आदि मे खूब चर्चा मे देखल गेल। ‘बैकअफइंडिया’ हैश-टैग आदि सहित ट्विटर पर पर्यन्त यैह हल्ला सब ट्रेन्ड करैत रहल।

बाद मे धीरे-धीरे पुनः सब स्थिति साम्य होएत गेलाक बाद स्वयं नेपालक राजनीतिक शक्ति संविधान मे त्रुटि रहबाक बात केँ मानिकय संशोधन लेल हामी भरलाक बाद पुनः सब आन्दोलनी पक्ष सहित समस्त राजनीतिक शक्ति केँ गोलियबैत भारतहि केर मुख्य भूमिका मे नेपालक आन्तरिक समस्या आदिक समाधान निकालल गेल। आइ स्थिति एहेन छैक जे नव संविधान केँ लागू करबाक न्युनतम शर्त मुताबिक नेपाल मे तिनू तह – स्थानीय निकाय, प्रदेश तथा केन्द्र केर जनप्रतिनिधिक चुनाव संपन्न करा नव सरकार सब निकाय मे गठित करैत देश आगू बढि रहल अछि। एहि मे भारतक सहयोग कतेक आवश्यक छैक, कतेक अनिवार्य छैक, कतेक बाध्यकारी छैक… ताहि सब बात केँ एतुका राजनीतिक शक्ति बुझितो मात्र सत्ता धरि पहुँचबाक अपन मनसुबा केँ सफल बनेबाक लेल ‘वोट बैंक पोलिसी’ मे भारत विरोधी सेन्टीमेन्ट्स बनाकय राजनीति करबाक कलाकारी सँ बाज नहि आबि रहल अछि।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीक नेपाल भ्रमण पर कथित नाकाबन्दीक असर

दु दिनक नेपालक औपचारिक भ्रमण पूरा कय केँ मोदीजी आइ भारत वापस गेलाह। प्रधानमन्त्रीक रुप मे तेसर बेर नेपालक भ्रमण मे ओ अपनहि घोषणा मुताबिक प्रधानमंत्री कम आ प्रधान तीर्थयात्री बेसी बुझेलाह। मिथिलाक सांस्कृतिक राजधानी जे हाल नेपालक कुल ७ प्रदेश मध्य १ महत्वपूर्ण प्रदेश “प्रदेश संख्या २” थिकैक, ताहि जनकपुर मे जानकीक दर्शन करैत पुनः काठमांडूक पशुपतिनाथ आ मुस्तांग स्थित मुक्तिनाथ केर दर्शन-पूजन कयलन्हि। संगहि हुनका संग आयल भारतीय राजनयिकक टोली तथा अन्य डेलिगेट्स नेपालक भ्रमण मे अपन-अपन कार्य मे लगैत विभिन्न समझौता, उद्घाटन आदि मे प्रधानमंत्री मोदी केँ सहयोग करैत रहलाह। नेपालक प्रधानमंत्री ओलीजीक हालहि कयल गेल ३-दिवसीय भारत भ्रमण सँ आरम्भ तीन महत्वपूर्ण क्षेत्र जलसम्पर्क, रेलसम्पर्क, कृषिक्षेत्र-सहकार्य मे विभिन्न समझौता होयबाक संग भारत-नेपाल केर सहयोगक विभिन्न पूर्व-लम्बित परियोजना पर समीक्षा आ उद्घाटन आदि संपन्न भेल अछि।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीक दुइ स्थान पर ‘नागरिक अभिनन्दन’ करैत माहौल केँ एकदम उत्साहजनक बनाकय राखल गेल। जनकपुर त एकदम बारहबीघा मे खुल्ला मे कार्यक्रम राखिकय लाखों जनता केँ मोदी-दर्शनक अवसर देलक, मुदा काठमांडू मे ई काज एकटा बन्द सभागार मे सिर्फ गानल-चुनल लोकक सहभागिता मे सम्पन्न कयलक। मतलब साफ छैक। काठमांडू मे मोदी प्रति जे कथित नाकाबन्दी सँ आक्रोश आम जनमानस मे बनि गेलैक वा बना देल गेलैक तेकर समाधान हाल धरि नेपालक सरकार अथवा भारतक कूटनैतिक प्रयास सँ नहि भऽ सकल छैक। मोदीजी एकटा गूढ दृष्टान्त जनकपुर सँ जोड़िकय देलनि। ओ कहलनि जे जनक सँ हम सब शिक्षा ली, ओ शस्त्र केँ तोड़बेने छलाह आ स्नेह केँ नेह सँ जोड़ने छलाह। परञ्च उपस्थित बहुल्य पहाड़ी जनमानस मे ‘मोदी-मोदी’ केर चियरिंग साउन्ड त दूर तालियो मे कतहु न कतहु कोताही बुझाइत रहल। हँ, किछु लोक मोदीक स्मृति शक्ति, वाचन-चातुर्य आ प्रस्तुतिक शैली केँ बेर-बेर ठाढ भऽ-भऽ कय सम्मान दैत रहलाह।

तथापि मोदीजी अपन लगभग ३० घन्टाक भ्रमण मे प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति, विपक्षक नेता, मधेसवादी नेता सहित काठमांडू महानगरपालिकाक नागरिक अभिनन्दन समारोह मे सेहो हिस्सा लेलनि। काठमांडू महानगरपालिकाक अभिनन्दन समारोह मे सिर्फ सम्भ्रान्त आ उच्चकोटिक जनता केँ सहभागी देखि मोदीजी भाँपि गेलाह जे आखिर नेपालक पहाड़ी आमजनमानस केर सोझाँ हुनकर अभिनन्दन कियैक नहि कयल गेल। ओ बजलाह अपन पूर्व-परिचित शैली मे, काठमांडू, जनकपुर, नेपाल आ शास्त्रीय अवधारणा सब पर हुनकर संबोधन भेलनि – मुदा जे उत्साह आ प्रसन्नता सँ ओ जनकपुर मे अपनत्व देखेलनि से काठमांडूक व्यवस्था हुनका कतहु न कतहु मोन केँ तोड़ि देलकनि तेहेन बुझाइत छल। बड़ा प्रखर स्वर मे दु-दु बेर आ अपन आंगूर ठाढ करैत ओ इशारा मे अपन मनोधारणा राखि देलनि जे नेपाल केँ अपन आवश्यकता आ प्राथमिकता स्वयं निर्धारित करय पड़त। भारत नेपालहि केर इच्छा अनुरूप सदिखन संग देत। ई नेपाल केँ स्वयं तय करबाक छैक जे ओकर आवश्यकता आ प्राथमिकता कि छैक। समझदार लेल इशारा काफी होएत छैक।

नेपाल दुइ माँगि पर पैर राखिकय चलबाक प्रैक्टिस आइ कतेको दशक सँ करैत आबि रहल अछि आर भारतक ‘पड़ोसी पहिने’ केर सूची मे नेपाल सबसँ ऊपर रहितो भारत संग कतेक परियोजना मे सहकार्य-सहयोग लय सकैत अछि ताहि लेल भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नेपालहि केँ सब जिम्मेदारी दैत अपना तरफ सँ सहयोगक संभाव्य क्षेत्रक नीक व्योरा राखि ‘भारत-नेपाल मैत्री – अमर रहोस्’ केर नारा ३ बेर दोहरबैत नेपालक स्वागत आ सम्मान प्रति कृतज्ञता प्रकट करैत ‘गुडबाय’ कहि त्रिभुवन अन्तर्राष्ट्रीय विमानस्थल सँ एयर इंडियाक विमान सँ स्वदेश लेल प्रस्थान कय गेलाह।

नेपाल सरकारक इच्छाक विरुद्ध काठमांडू मे ‘विरोध कार्यक्रम’ केर सेहो होएत रहल तैयारी

विवेकशील साझा पार्टीक वरिष्ठ नेता रविन्द्र मिश्र अपन कार्यालयक देवाल पर एकटा बैनर टांगिकय भारतीय प्रधानमंत्री मोदीक नैतिक विरोध कथित नाकाबन्दी लेल लगाकय देबय चाहि रहल छलाह। हुनकर देवाल सँ ताहि बैनर केँ नेपाली पुलिस द्वारा जबरदस्ती हँटा देल गेल। ताहि पर ओ सम्बन्धित जिलाधिकारी समक्ष अपन पार्टीक अन्य नेता ओ प्रतिनिधि संग शिकायत करय लेल गेलाह। अपन अभिव्यक्तिक स्वतंत्रता केँ एना बर्बर ढंग सँ हनन करबाक विरोध दर्ज करौलन्हि। पुनः आबिकय दोसर बैनर लगेला पर फेरो हँटेबाक बात समाचार मे देखल। मुदा तैयो ओ अपन जिद्द पर अड़िकय बैनर लगाकय रहलाह।

दोसर दिस, नेपाल भ्रमण पर आयल भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीक विरोध मे कार्यक्रम करबाक प्रयास कयनिहार नेकपा क्रान्तिकारीक नेता सिपी गजुरेल सहित २९ गोटा केँ नेपालक प्रहरी द्वारा गिरफ्तार कयल गेल, सेहो समाचार सेतोपाटी लिखलक अछि। समाचार मुताबिक काठमांडू प्रहरी परिसरक प्रवक्ता डिएसपी मोहन थापाक अनुसार कार्यक्रम करय सँ पहिने हुनका लोकनि केँ प्रहरी द्वारा नियन्त्रणमे लेल गेल छल।

नेपाल भ्रमण हुनक प्रधानमंत्रीत्व काल मे तेसर बेर थिक। काठमांडू सँ किछु राजनीतिकर्मी तथा आम जनमानस द्वारा ‘नाकाबन्दी’ केर नाम पर विरोध कार्यक्रमक सेहो गुपचुप समाचार भेटि रहल अछि। मधेस आ मधेसीक मांग केँ संविधान मे सम्मान नहि भेटला पर मधेसी नेता आ जनता द्वारा नाकाबंदी केँ भारतक नाकाबंदी कहब शासकवर्ग केर एक रणनीति छलय नहि कि यथार्थ। नेपाल द्वारा राष्ट्रसंघ में अघोषित नाकाबंदी केर आरोपक कड़ा उत्तर आ तदोपरांत भारतक सहयोग व सदाशयता मे कमी हरेक राष्ट्रचिन्तक नेपाली भद्र नागरिक केँ बुझल बात अछि। मुलुक कतेक तरहक कसमकस सँ त्रुटिपूर्ण संविधान केर संशोधन आदिक आवश्यकता अनुभव करैत, पक्ष-विपक्ष आ गठबंधन मे बँटाइत आखिरकार संविधान लागू करबाक न्यूनतम शर्त मानि देश मे लोकतांत्रिक अभ्यास करैत तीनू तह केर चुनाव सम्पन्न करेलक। आब देश प्रगतिक राह पर बढ़बाक लेल प्रगतिकारक समझौता करय, आगू जाय। रविन्द्र मिश्र समान बुधियार नेता केँ देशहित बुझक चाही। ब्यर्थहि पड़ोसी मुलुक केँ अपन कमजोर चरित्र मधेसक मुद्दाक समाधान नहि निकालि सकबाक इंपोटेंसी केँ नुकेबाक लेल भारत पर गलत आरोप लगाकय नेपालक हित केर अनदेखी नीक बात नहि। राष्ट्रहित सर्वोपरि! क्षुद्र राजनीति बन्द हो।

नेपाल-भारत मित्रता अखंड आ अमर रहय!

हरिः हरः!!

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