बसन्त थिक लोकदेवता ‍- सत्यकथा

बसन्त थिक लोकदेवता

– प्रवीण नारायण चौधरी
 
मेहनतिक फल सब दिन आ सब ठाम मीठ होएत छैक। एहि कथनी केँ चरितार्थ करैत अछि बसन्तक जीवनचर्या आ ओकर कर्मठता। जातिक ओ भले मुसहर अछि, परञ्च ओकर भीतर रहल जिजीविषा ओकरा जीवन जियबाक अपन एकटा अलग कला आ शैली जे जातिगत परम्परा सँ सर्वथा भिन्न छैक से सिखा देने छैक।
 
ओ बिना केकरो कहने-सुनने स्वयं हाथ मे किताब लय नित्य विद्यालय जाएत अछि। छोट-छोट बच्चाक बीच कने बेसी उमेरगर देखायवला बसन्त सदा पर कियो हँसितो छैक, ताहि सँ ओकरा कोनो फर्क नहि पड़ैत छैक। ओहो ओहि हँसनिहार केँ प्रत्युत्तर मे अपन निर्दोष मुस्की टा दैत छै। मुदा मनहि-मन ओकरा अपन जीवनक लक्ष्य प्राप्ति मे ई शिक्षा आ शिक्षक केर सेवा कय केँ जेना-तेना किताबक ज्ञान सब सीखबाक प्रतिबद्धता छैक जे अलगे सन्तुष्टि प्रदान करैत छैक। लोकक हँसब ओकरा लेल आरो एकटा नया उर्जा दैत छैक, जतेक बेर लोक हँसल ओ ततेक बेर आरो मजगुत बनैत अछि।
 
भोरे-अन्हारे सुति-उठि पहिने भैर फूलडाली फूल तोड़िकय अनैत अछि। तेकर बाद अपन गुरुआइन (मैडमजी) केर घर जा कय हुनकर सब बर्तन-बासन, आंइठ-कुइठ, सबटा माँजि दैत छन्हि। फेर मैडमजी सँ मांगिकय एक कप चाह पिबैत अछि। हुनका सँ पूछि बैसैत छन्हि जे आरो कोनो काज – टहल अछि कि मैडमजी… ओ जेना कहैत छथिन से सब काज पूरा कय केँ फेर कनीकाल किताब-कापी खोलिकय मैडमजी लग पढाई करैत अछि आर पुनः घर वापसी करैत स्कूल वास्ते तैयारी।
 
नहाइत अछि। चालीसा पाठ करैत अछि। सब भगवान् केँ फूल चढबैत अछि। मोने-मन ओ अपन जीवनक सफलता लेल निश्चित प्रार्थना करिते टा अछि। ओ अपनहि लेल टा नहि, समस्त मानव हित लेल प्रार्थना करैत अछि। यैह सब गुण मिथिलाक जनसमुदाय मे विभिन्न जाति-समुदाय मे जन्म लेनिहार एक सँ बढिकय एक लोकदेवता मे देखल जाएत रहल छैक। बसन्त मे सारा लक्षण लोकदेवता वला छैक। पूजा-पाठ पूरा कय ओ मायक हाथक जे बनल भेटलैक से खेलक आ विद्यालय चलि गेल।
 
विद्यालय मे ओकर एज ग्रुप आ आन बच्चा (ओकर क्लासमेट) केर एज मे फरक होयबाक कारण ओकरा खेल-धूप करय लेल कियो संग नहि लैत छैक। तखन ओ खेलेबाक बदला धार्मिक किताब सब पढय मे रुचि लैत अछि। पूजा-पाठ केर पद्धति सब पढैत रहैत अछि। मौका भेटि जाएत छैक त कोनो ब्राह्मण पुरोहित सँ अनुनय-विनय कय ओ पूजा-पाठक रहस्य आदि सिखैत अछि। परिणामस्वरूप अपन जाति-समुदाय केर पूजा-पाठ आ विवाह आदि करेबाक लेल दूर-दूर सँ लोक सब मोटरसाइकिल लय केँ बसन्त केँ लेबय अबैत छैक।
 
बसन्त केँ कखनहुँ भीड़भाड़ मे घुलैत कियो नहि देखैत छैक। बस एकटा जिज्ञासू बनि कि भऽ रहलैक अछि ततबे टा लेल ओ एहि सब तरहक गैदरिंग मे मुरियारी दैत देखा जाय त बहुत भेल। हँ, दस लोकक हित लेल ओकरा गन्दगी साफ करब मंजूर रहैत छैक। ओ कोनो नाला वा सड़क आदि केँ गन्दा नहि देखि सकैत अछि। एतेक तक जे लोकक आंइठ-कुइठ आदि जँ अव्यस्थित रूप सँ एम्हर-ओम्हर फेकल देखा जाएत छैक त ओ तेकरा तुरन्त बिना समय गमौने साफ कय दैत छैक।
 
ओहो थकैत अछि। ओकरो विश्राम चाही। जेठक दुपहरिया मे छाहैर ताकिकय कोनो एकान्त जगह, गाछक नीचाँ आ कि केकरो दलानहि पर ओ चुक्कीमाली मारिकय सुति रहैत अछि। कियो ओकरा दस टा बातो कहि देलक त हँसैत सुनि लेत, मुदा अपन संत गुण सँ ओ केकरो पर तामश नहि करत। ओना सच ईहो छैक जे ओकरा पर तामश चढबे केकरा करतैक, तथापि किछु एहेन ईर्ष्यालू मनुष्य होएत छैक जे ओकरा पर अनेरउ बरसैत रहैत छैक।
 
सभक धियापुता केँ स्नेह देब ओकर विशेष आदति देखलियैक। जेकरा सँ सीखबाक अवसर भेटतैक ओतय मुमुक्षु जेकाँ सेवा करय लेल तत्पर आ सिखय लेल लालायित देखायल। ओकरा मे महात्मा बुद्ध केर करुणा देखायल। ज्ञानक खोज लेल गुरु प्रति समर्पित आरुणि देखायल। अपन अस्मिताक रक्षा लेल वीर सल्हेस देखायल। केकरो हक कियो मारिकय राखि लेत तेकरा लेल वीर दीना-भद्री जेकाँ लागल ओ। हम घोषणापूर्वक कहि सकैत छी जे यैह बसन्त थिक यथार्थतः मिथिलाक वर्तमान लोकदेवता। भगताइ ओ खेलाय वा नहि, मुदा मानव सेवा माधव सेवा केर समस्त गुण सँ भरपूर वैह हमरा ईश्वरक अवतार बुझायल।
 
हरिः हरः!!
पूर्वक लेख
बादक लेख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

8 + 5 =