झारखंड मे मैथिली सेहो होयत दोसर राजभाषा

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विशेष संपादकीय

झारखंड मे मैथिली – लेखक डा. रविन्द्र कुमार चौधरी द्वारा लिखल एकटा गंभीर शोधमूलक पोथी जाहि मे झारखंडक विभिन्न जिला मे मैथिलीक उपस्थिति केर सुन्दर दस्तावेजीकरण कयल गेल अछि। झारखंड मे मैथिलीभाषीक बसोवासक इतिहास लगभग १००० वर्ष सँ २००० वर्ष केर कालखण्ड निर्धारित करैत देवघर मे बसल मैथिल पंडा समाजक संग डा. जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन द्वारा प्रकाशित लिंग्विस्टिक सर्वे अफ इंडिया अनुरूप कुल ६ जिला जाहि मे गोड्डा, देवघर, जामताड़ा, साहेबगंज, पाकुड़ ओ दुमका केँ मैथिलीभाषी क्षेत्रक रूपमे चर्चाक बात कहबाक संग-संग आगामी १०० वर्ष मे झारखंडक आन जिला सब मे सेहो मैथिलीभाषी बसबाक, ओहि जिला सभक निर्माण ओ विकास कार्य मे महत्वपूर्ण योगदान करबाक आ संथाल परगना प्रमंडल मे संथालहु केर बसोवासक इतिहास सँ पुरान मैथिल जनमानसक बसोवासक इतिहासक चर्चा कयल गेल अछि। डा. चौधरी लिखित ‘झारखंड मे मैथिली’ पोथी मे मैथिलीभाषीक धरोहर, मैथिलीसेवी संस्थाक विवरण, मैथिली आन्दोलनक इतिहास, झारखण्डक विश्वविद्यालय ओ महाविद्यालय सबमे मैथिलीक पढौनीक विस्तृत इतिहास, मैथिली पत्रिका आ कैलेण्डर आदिक प्रकाशन, मैथिलीक साहित्यकार ओ हुनकर रचनाशीलताक संछिप्त इतिहास सहित झारखंड मे आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय ओ अन्तर्राष्ट्रीय स्तरक मैथिली कार्यक्रम आर ताहिमे ओहदेदार व्यक्तित्व लोकनिक सहभागिता पर्यन्तक विवरण सब प्रस्तुत कयल गेल अछि। तहिना मैथिलीक विकासमे लागल प्रमुख व्यक्तित्वक वर्णन, कथा गोष्ठीक आयोजन, मैथिलीक वर्तमान ओ भविष्य – एहि सभ बातक नीक आ सटीक विवरण प्रस्तुत कयने छथि। विदित हो जे डा. रविन्द्र कुमार चौधरी मूलरूप सँ सुपौलक वासिन्दा रहितो जमशेदपुर (टाटा) मे कोल्हान विश्वविद्यालय मे कार्यरत छथि, संगहि अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक एक सक्रिय अभियन्ता होयबाक संग अनेकानेक बौद्धिक, सांस्कृतिक, सामाजिक कार्य मे सक्रिय रहैत आयल छथि। मैथिली महायात्राक जमशेदपुर पड़ाव मे हम प्रवीण नारायण चौधरी यात्रीक तौरपर एहि विषय केर संग पहुँचल रही जे आखिर झारखंडक एहि महत्वपूर्ण औद्योगिक नगरीमे मिथिलावासीक कि योगदान अछि, जाहिपर डा. चौधरी द्वारा विस्तृत कार्यपत्र राखल गेल छल आर संगहि एहि शोधग्रंथ ‘झारखंड मे मैथिली’ केर चर्चा सेहो ओ कयने छलाह। ताहि समय ई पूर्णरूपेण प्रकाशित भेलाक बाद बाजार मे नहि आबि सकल छल। १२ फरबरी २०१६ केँ स्वयं डा. चौधरीक हाथ सँ ई महत्वपूर्ण सन्दर्भ पुस्तिका हमरा प्राप्त भेल मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल पटना मे। प्रसंगवश ई चर्चा झारखंड मे मैथिलीक हैसियत जनमानस मे अनबाक लेल कयलहुँ।

आइ सँ मात्र दुइ दिन पहिने झारखंडक राजधानी राँची सँ प्रकाशित एक प्रमुख अखबार मे संवाददाता प्रशांत झा द्वारा एकटा समाचार प्रकाशित कयल गेल जेकर शीर्षक छल ‘भोजपुरी, मगही व अंगिका शीघ्र बनेगी दूसरी राजभाषा’। एहि समाचार मे मैथिलीक कतहु चर्चा नहि देखि स्वाभाविके मैथिलीभाषीक मनमे असन्तोष आ निराशाक स्थिति बनल। प्रतिक्रियास्वरूप विभिन्न संघ-संस्थासँ आबद्ध एक पर एक व्यक्तित्व लोकनि जाहि मे स्वयं डा. रविन्द्र कुमार चौधरी सेहो छथि – सब कियो अपना-अपना तरहें झारखंड सरकारक मंत्री लोकनि सँ पारी-पारी भेटलाह आर उचित ज्ञापन सहितक ध्यानाकर्षण करबैत मैथिली भाषाक स्थिति झारखंड राज्य मे कोन स्तरक अछि आर दोसर राजभाषा जाहि लेल सरकार पूर्वहि सँ वचनबद्धता प्रकट करैत आबि रहल अछि तेकरा सँ बिपरीत एहि तरहक समाचार राष्ट्रीय पत्र-पत्रिका मे आयब एकटा असन्तोष आ निराशाक स्थिति मैथिलीभाषी जनमानसमे बनेबाक बात कहलनि। मंत्री लोकनि सँ भेंटघांटक क्रममे माननीय राज पलिवार जे स्वयं मैथिलीभाषा मे शपथ लेनिहार गणनीय व्यक्तित्व छथि तथा अन्य मंत्रीगण मे सी. पी. सिंह संग स्वयं सम्माननीय मुख्यमंत्री रघुवर दास सेहो प्रतिनिधिमंडल सँ बात बुझैत पुख्ता आश्वासन देलनि जे मैथिली केँ सेहो झारखंडक दोसर राजभाषाक रूप मे सम्मानजनक स्थान देल जायत।

यथार्थतः एकटा गलत समाचार संप्रेषण सँ विश्व भरिक मैथिलीभाषी लेल एकटा हतोत्साहक वातावरण बनि गेल रहय। दिल्ली सँ मैथिली जिन्दाबादक समाचार संपादक किसलय कृष्ण उपरोक्त पेपर कटिंग पठबैत ‘दुखद खबरि’ भेटबाक प्रतिक्रिया पठौलनि। एम्हर नेपालमे मैथिली विरोधी एकटा विशेष समूह कार्य कय रहल स्थितिमे झारखंडसँ एहेन नकारात्मक समाचार कम सँ कम हमरा लेल सेहो बहुत हतोत्साहित करयवला छल, कारण एहि सँ पूर्व डा. रविन्द्र कुमार चौधरी स्वयं मुख्यमंत्री रघुवर दासकेँ अपन शोधग्रंथ भेंट करैत एहि तरहक आश्वासन पेबाक बात कहने छलाह, संगहि २०१५ केर अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजूक अगुवाई मे संपन्न होयबाक बेर मैथिली झारखंड राज्यक दोसर राजभाषाक दर्जा पेबाक समाचार काफी जोर-शोर सँ समाचार पत्रिका आदि मे प्रकाशित भेल छल। तखन फेर ई अचानक यू-टर्न कोना भेल, ई हमरा लेल सेहो विस्मयकारी समाचार छल। ताहि समय, सामाजिक संजालपर एहि खबरिकेर खंडन करैत बोकारोसँ विधायक विरंची नारायणक समर्थक-मित्र सुनील मोहन ठाकुर सूचित केलनि जे मैथिली केँ सेहो दोसर राजभाषाक दर्जा झारखंड मे भेटत, एहि लेल दुइ‍-दुइ गोट मंत्रीक बयान आ स्वयं विधायक विरंची नारायण संग भेल बातचीत केर आधारक चर्चा ओ कएलनि। तहिना मुम्बई सँ मैथिली अभियन्ता राजकुमार मिश्र द्वारा मैथिली प्रति झारखंड सरकारक नकारात्मकताक खबरि लिखलनि, लेकिन हुनकर वालपर राँचीक मैथिली अभियन्ता लोकनि द्वारा कयल गेल प्रयासक चर्चा, मंत्रीजी लोकनिक बयान, मैथिलीक पक्ष मे समाचार आदिक सुन्दर जनतब भेटल आर मोन मे सन्तोष भेटल जे आखिर मैथिलीक संग अन्याय झारखंडमे होमय सँ ओतुका सरकार बाँचि गेल। आब आगाँ ई देखबाक अछि जे कतेक जल्द मैथिली झारखंडक संविधानमे सम्मानजनक दोसर राजभाषाक स्थान पबैत अछि। झारखंड मिथिला मंच, झारखंड मैथिली मंच, ओ समस्त व्यक्तित्व लोकनि प्रति आभार।

गुरुदेव सियाराम झा सरस केर आजुक भोरका समाद सपना जेकाँ लागल छल, लेकिन ओ स्वयं एहि प्रतिनिधिमंडल मे संग रहथि। तैँ हुनकर इशारा एकदम अक्षरशः सच भेल। बधाई समस्त मैथिलीभाषी केँ।

हरिः हरः!!

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