मिथिला सँ विश्व-स्तरीय वैज्ञानिक सपुतक प्रादुर्भाव, पाठक शुभम पराशरक परिचय

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विशिष्ट व्यक्तित्व परिचयः साईंटिस्ट इन मेकिंग पाठक शुभम पराशर

पौराणिक कथा मे मिथिलाक वर्णन ऋषि-मणीषीगणक उत्पत्ति-स्थलक रूप मे कयल गेल अछि। जनक समान महान् शिक्षक दोसर कियो नहि भेलाह, जाहि कारण हिनका सँ शिक्षा ग्रहण करय लेल व्यासपुत्र शुकदेव सँ लैत ताहि युगक एक सँ बढिकय एक स्रष्टाक नामक जिकिर हमरा लोकनिक वेद आ पुराण कहैत अछि। कि ताहि मिथिलाभूमिक सपुत मे आइ ओ स्फुरणा नहि अछि? कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली अपन मौलिकता केँ छोड़ि आधुनिक शिक्षा पद्धति मे विश्व परिवेश मे चर्चा करय योग्य उपलब्धि हासिल नहि कय सकल अछि? एहि सब प्रश्नक उत्तर कदापि सीधे ‘नहि’ नहि भऽ सकैत अछि। चूँकि ‘मिथिला’ आइ स्वयं भूगोल मे संगठित स्वरूपक संग नहि अछि, एकर स्थिति अपने दयनीय छैक, किछु भाग नेपाल मे, किछु भाग भारत मे… ताहू मे बिहार नाम्ना राज्य जेकर नीति अपनहि भाषा, भेष आ भूषण प्रति घोर उपेक्षा कय ‘रिक्त राजनीति’ आ ‘छूछ तुष्टीकरण’ मे जाति-आधारित सामाजिक न्यायक समाजवाद केर प्रसारक बनि ७ दशक खेपि चुकल मुदा नहिये गरीबी, नहिये पिछड़ापन, नहिये अशिक्षा आ नहिये वर्गीय विभेद ओ मानुषिक अन्तर्कलह‍-दूरी केँ कम कय सकल अछि – ओहेन राज्य अन्तर्गत मिथिलाक लिपि लोप, भाषा कमजोर, प्रबुद्ध समाज विस्थापित आ स्वयं बिहारक गौरव बिहार सँ बाहर बहार स्थापित करबाक धुन मे लागल देखाएछ। मिथिलाक माटि-पानि-हवा मे आइयो वैह प्रखरता अछि, एकरा लेल बिखड़ल मोती केँ समेटैत माला बनाकय बेर-बेर निहारबाक जरुरत अछि। मुदा करब त करब कि? नहि त मीडिया अपन, नहि त लोक मे आइ एहि सब तरहक महत्वपूर्ण काजक वास्ते फुर्सत! तथापि, मैथिली जिन्दाबाद यथाशक्ति एहेन परिचय सब सोझाँ अनबाक अपन मुहिम केँ निरन्तरता दैत अपन पाठकक माझ एक युवा स्रष्टा आ भविष्यक विश्व वैज्ञानिक केर परिचय राखि रहल अछि। किछु समय पहिने सामाजिक संजाल ओ मैथिली जिन्दाबाद केर वेब पोर्टल मार्फत एकटा जिज्ञासा करैत पुछने रही जे अपन मिथिलाक लोक सेहो विज्ञान अथवा साहित्य अथवा कोनो क्षेत्र मे अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर कोनो उपलब्धि हासिल कएने होइथ त हुनकर परिचय प्रकाश मे आनि तेकर समुचित प्रेरणा आरो लोक मे संचरण करी हम सब।

प्रसन्नताक संग जनतब दय रहल छी जे कोयली गाम (सीतामढी) निवासी श्री हितेश्वर पाठक वर्तमान दिल्ली सँ अपन संछिप्त टिप्पणी मैथिली जिन्दाबाद पोर्टल पर पठौलनि। ओ कहलनि जे हुनक पुत्र पाठक शुभम पराशर विज्ञानक क्षेत्र मे उच्च-उत्कृष्ट उपलब्धिमूलक शोधकार्य मे अमेरिका मे कार्यरत छथि। आउ, मिथिलाक एक उदीयमान सपुत केर परिचय देखि।
 
मूल घर सीतामढी लेकिन वर्तमान घर पटना आ दिल्ली – जेना सामान्य तौर पर अधिकांश सम्भ्रान्त आ कुलीन मैथिल ब्राह्मण परिवार आइ गाम सँ विस्थापित भऽ देशक विभिन्न भाग मे अपन आशियाना ठाढ कय अलग-थलग जीवन जियय लेल बाध्य छथि, बिल्कुल ताहि वर्गक एक सुशिक्षित-सम्भ्रान्त आ निजी क्षेत्रक बहुराष्ट्रीय कंपनी मे नीक ओहदापर कार्यरत श्री हितेश्वर पाठक वर्तमान समय अपन निजी उद्यम (मैनुफैक्चरिंग सेक्टर) मे व्यवसाय चला रहल छथि। हिनक एकमात्र पुत्र पाठक शुभम पराशर छथि जिनक जन्म ओ पालन-पोषण सब किछु दिल्लिये मे भेलनि। सिर्फ १० वर्षक आयू मे गाम कोयली (सीतामढी) आबि कुलदेवीक सान्निध्य मे उपनयन (जनेउ) संस्कार कयल गेलनि। ताहि सँ वृहत् गाम सँ कोनो लगाव शुभम केँ नहि रहल छन्हि, धरि दादी जे पटना आवास मे रहि रहली अछि तिनका सहित अन्य सगा-सम्बन्धीक संग नजदीकी रहबाक कारण अपन मूल मिथिलाक संस्कार सँ ओत-प्रोत छथि शुभम। बकौल पिता हितेश्वरजी, नामक आरम्भहि मे पारिवारिक टाइटिल आ आखिर मे गोत्रक टाइटिल सँ हिनक अन्तर्ज्ञान मे परिवार, संस्कार आ संस्कृति प्रति जुड़ाव बनल रहबाक दृष्टिकोण सहित नामकरण करबाक बात कहल जाएछ। पिताक एकमात्र इच्छा जे एक्के टा बेटा केँ एतेक उच्च शिक्षा दियाबी जाहि सँ परिवारक संग-संग अपन इलाका आ देशक नाम केँ सेहो खूब उच्च स्थान पर प्रतिष्ठित करथि, ताहि कारण ओ प्रदेशक राजधानी सँ देशक राजधानी मे जा कय प्रवास करैत अपन रोजी-रोटीक सब इन्तजाम कयलन्हि।
 
शुभम केर जन्म १९९४ में भेल छलन्हि। दिल्ली पब्लिक स्कूल सँ प्रारम्भिक शिक्षा आ २०१० तथा २०१२ मे क्रमशः सीबीएसई बोर्ड सँ १०वीं आ १२वीं पूरा कयला उत्तर आइआइटी जेईई पास कयलनि। संगहि ओ इन्डियन इन्स्टीच्युट अफ साईंस (आइआइएससी) – भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर द्वारा राष्ट्रीय स्तरपर आयोजित केवीपीवाइ (किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना) केर विज्ञान तथा तकनीकी विभाग सम्बन्धित परीक्षा मे सेहो उतीर्ण भेलाह। आइआइटी छोड़ि ओ शोध अध्ययन केँ प्राथमिकता दैत आइआइएससी, बैंगलोर मे अध्ययन करबाक निर्णय लेलनि। ओहि ठाम सँ बीएस (BS) आ एमएस (MS) भौतिकीशास्त्र मे पूरा कयलनि।
 
एहि बीच मे ओ अनेकों संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न प्रकारक राष्ट्रीय स्तरक छात्रवृत्ति सम्बन्धित परीक्षा सब सेहो पास कयलनि, जेना क्षेत्रीय गणित ओलंपियाड (Regional Mathematics Olympiad), भारतीय राष्ट्रीय रसायनशास्त्र ओलंपियाड (Indian National Chemistry Olympiad), National Standard Examinations in Astronomy, National Standard Examinations in Physics CBSE Scholarships for Higher Education, National Graduate Examinations in Physics इत्यादि। २०१७ मे एमएस केलाक बाद हुनका PhD/Research शोध अध्ययन लेल विभिन्न देश यथा जर्मनी, फ्रान्स, इम्पेरियल कालेज लंदन, जापान एडवांस्ड इन्स्टीच्युट्स फर साईंस एण्ड टेक्नोलोजी तथा अमेरिकाक विभिन्न विश्वविद्यालय सब सँ आमंत्रण भेटलनि। आखिरकार ओ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (University of California San Diego, USA) अमेरिका मे अध्ययन करबाक निर्णय अपन आइआइएससी बैंगलोरक फैकल्टी एडवाइजर केर सल्लाह पर लेलनि।
 
हुनक शोधक विषय अलग-अलग वैज्ञानिक – अलग-अलग संस्थान मे निम्न अनुरूप छन्हिः
 
१. NIUS a unit of Homi Bhabha Centre for Science Education, Mumbai : Study about energy, Geometry Optimization, Thermochemistry, NMR, Coformational Searching, Anharmonic Frequency Analysis etc.
 
BHABHA ATOMIC RESEARCH CENTRE, Mumbai:
 
Worked on developing original ideason formalisms towards factorizing the exact molecular wave function and apply that method to solve the N-electron problem.
 
२. JAPAN ADVANCED INSTITUTE OF SCIENCE AND TECHNOLOGY, NOMI, JAPAN:-
 
Worked oh editing the casino code so that it can support germinal orbitals to handle the fluid phases of the electron- hole problem.This work was done in collaboration with the Prof. Rechards Needs and Prof Pablo Lopez Rios at the Cavendish Laboratory, Cambridge University.
 
३. IISc, Bangalore Centre for Condensed Matter Physics:-
 
Worked on problem of light particles adverted in turbulent flows via Direct Numerical Simulation (DNSs) whose results were studying statistical properties of quantities, curvature, fractal dimensions like correlation dimensions, Lyapunov exponent etc.
 
एकर अतिरिक्तः
 
Field-theoretic Re-normalization applied to Fluid Turbulence
 
UCSD, USA:-
 
Holographic duality with a view towards many- body Physics.
 
उपरोक्त शोध सब मे सँ गोटेक रास शोध पत्रिका (जर्नल्स) मे सेहो प्रकाशित भेल छन्हि।
 
हितेश्वर पाठकजी मैथिली जिन्दाबाद सँ बातचीत करैत कहलनि जे एहि तरहक जिज्ञासाक यथार्थ कारण त ओ नहि बुझि सकलाह, परञ्च मिथिलाक बहुत रास युवा पीढी विज्ञानक क्षेत्र मे सेहो नीक-नीक शोधकार्य मे लागल रहलाक बादो आमजनक दृष्टि मे नहि आबि पेला अछि। एहि तरहक खोज सँ हुनका सब केँ आगाँ आनिकय आगामी पीढी मे सेहो विश्व परिदृश्य पर महत्वपूर्ण कार्य सब करैत अपन मिथिलाक नाम आगू बढेबाक एकटा नीक उद्देश्य त अवस्से पूरा होयत।
 
मिथिला क्षेत्र सँ एहि तरहक परिवारक कतेक लगाव आ जुड़ाव बाँचल अछि आइयो? एहि सवालक जबाब मे हितेश्वर बाबू कहलनि जे गोटेक साल मे किछु दिनक लेल गाम सँ जुड़ल छथि। गाम मे आइयो हवेली छन्हि, मुदा ओहि मे ताला लागल रहैत अछि। कियो देखनिहार नहि। माय छथि, हुनका दिल्ली पसीन नहि छन्हि। मुदा ओहो गाम मे नहि रहि पटना मे रहब सुरक्षित बुझैत छथि। हम सब दिल्ली सँ पटना महीना मे किछु दिनक वास्ते जाएत छी मायक सेवा लेल।
 
शुभम केर विवाह मैथिल ब्राह्मणक वैवाहिक परंपरा अनुरूप हो, ताहि लेल सेहो हुनक नाम मे गोत्र स्पष्ट करैत जोड़ि देने छथि। २०१२ मे जा धरि शुभम IISc मे प्रवेश पेलन्हि, पिता हितेश्वरजी अपन सम्पूर्ण समय आ परिश्रम पुत्रक पढाई केँ नीक मंजिल धरि पहुँचेबाक वास्ते समर्पित कएने रहलाह। हिनका मे पुत्र केँ महत्वपूर्ण आ उच्च शिक्षा दियेबाक एकटा दीवानापन छलन्हि, तेकरा पूरा करय वास्ते अपन ITW SIGNODE INDIA LIMITED जे सिकागो – अमेरिकाक मूल आ एक बहुराष्ट्रीय कंपनी छल तेकर नौकरी छोड़ि हैदराबाद सँ दिल्ली शिफ्ट भऽ गेलाह। पैछला बेर अक्टुबर २०१६ मे गाम आयल छलाह। सिर्फ गामक हवेलीक बिजली बिल अबैत छन्हि जे दिल्ली सँ आनलाइन पेमेन्ट कय दैत छथिन। हिनक manufacturing unit नोएडा मे आ आवास मयूर विहार दिल्ली मे छन्हि। अन्त मे एक बेर प्रसन्नता व्यक्त करैत कहैत छथि जे नीक लागल जे एहि तरहक मिथिलाक प्रतिभाक खोज सेहो कियो कयलनि। निश्चित शुभम केँ सेहो ई नीक लगतनि आर ओ अपन मौलिक पहिचान एवम् मातृभूमि प्रति एक तरहक अवाच्य सेवा प्रतिबद्धता लेल संकल्पित हेताह।
एक जागरुक पिताक समर्पण – एक बुझनुक सपुतक वर्णन केर ई विशिष्ट व्यक्तित्व परिचय आ मिथिलाक मौलिक पहिचान मे विद्याधनक प्रधानताक ई समाद अहाँ केँ केहेन लागल – अपन राय प्रतिक्रियाक रूप मे जरूर राखब।
हरिः हरः!!
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