दहेजक हावा एहेन चललै बेटी आइ भेलै भारी

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गीत

– राम सोगारथ यादव

आँगनक तुलसी कोन कारणे, आइ भेलै महकारी
दहेजक हावा ऐहन चललै, बेटी आइ भेलै भारी!
तुलसी ई तुलसी खेलसँ, तुलसीक बीज तारल जाइ
कि तँ कोंडियाईते आ लहलहाइते, फेर मारल जाइ
बाँचल तुलसी चतैरते काल, फेर कतौ गाड़ल जाइ
तखनो चयन कहाँ तुलसीके, दहेज लेल मारल जाइ
कोनाक बुझियै बेटे जकाँ, बेटीयो छै घरक दुलारी
दहेजक हावा………..
पहिले आँतरमे दहेजक उनर, भेटलै बड भारी
उनरे पाछु सुन भेलै ई, बापक भरलहा बखारी
तहुसँ टरलै उनर कहाँ, बिकै धुर-धुरक घरारी
किसान बापक जिनगी भेलै, दहेजे कारण कारी
अतबो पर बेटी बनलै, कहाँ कतौक ओ अधिकारी
दहेजक हावा…………
बेटियेकेँ माथक टीका बुझै छै, बेटियेकेँ माथक पाग
बेटाके बुढाड़ीक सहारा बुझै, ई बेटी जिवनक ताग
ई बेटा जखन माली छै तँ, बेटी छै वनक सुनर बाग
चलतै नइ बेटी बिनु जिनगी, बुझितो कियै छै दु भाग
बेटिये दुर्गा बेटिये छै काली, बेटिये आइ भेलै लचारी
दहेजक हावा ………..
बादक लेख

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