नेपाल मे मैथिली भाषाक हैसियत, आगामी संविधान नियमनमे ध्येय किछु महत्वपूर्ण विन्दु

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आलेख

– प्रवीण नारायण चौधरी

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन राजवविराज मे विगत २२ आ २३ दिसम्बर २०१७ केँ एकटा महत्वपूर्ण परिचर्चाक विषय छल ‘प्रदेश २ केर राजकाजक भाषा मैथिली’। डा. रेवतीरमण लाल द्वारा एहि सन्दर्भ मे संछिप्त-सटीक कार्यपत्र राखल गेल आर ताहि पर विद्वान् वक्ता प्रो. उदय शंकर मिश्र एवं पूर्व प्राध्यापक सह विद्वान् अभियानी-शोधकर्ता अमरकान्त झा द्वारा बुँदागत टिप्पणि देल गेल छल। तहिना कुल ६ गोट वक्ताक तरफ सँ कार्यपत्र एवं राखल गेल टिप्पणी पर खुल्ला मत राखल गेल रहय। अन्त मे एक ‘राजविराज घोषणापत्र’ जारी करैत सप्तरी जिलाधिकारीक मार्फत नेपालक केन्द्र सरकार धरि ओहि घोषणापत्रक मार्फत माँगपत्र पठाओल जेबाक छल, संभवतः पठाओल गेल, पुष्टि होय लेल बाकी अछि। (एखन नाम टैग करैत जनबाक इच्छा राखि रहल छीः आदरणीय Devendra Mishra Sir, Shyamsundar Shashi Bhai, Shyamsundar Yadav Bhai, Pankaj Jha Bhai, Satish Kumar DuttaBhai and all)

कि छैक समग्र मे परिस्थिति नेपाल मे?

नव संविधान अन्तर्गत नेपाली केँ राष्ट्रभाषाक दर्जा आ सरकारी कामकाजक भाषाक रूप मे मान्यता दैत समस्त मातृभाषा केँ सेहो राष्ट्रिय भाषाक दर्जा देल गेल छैक। प्रदेशक कामकाजक भाषा लेल प्रदेश सभा केँ अधिकार देल गेल छैक जे ओ सब अपन सदन केर दुइ-तिहाई बहुमत सँ ई सब तय करत। नेपाली भाषा पहिने एकमात्र भाषा रहैक जेकरा राजकाजक भाषाक रूप मे स्वीकार कयल गेल छलैक, ताहि एकल भाषा नीतिक कारण अन्य भाषा सब तेहेन खास विकास नेपाल मे नहि कय सकल आरोप लगैत छैक। नेपाली जतय लगभग ४०% जनसंख्याक भाषा छैक, ओत्तहि लगभग १३% जनसंख्याक भाषा मैथिली छैक – आर नेपालक दोसर सर्वाधिक बाजल जायवला भाषाक रूप मे मैथिली प्रतिष्ठित छैक।

नेपाल मे मैथिलीक इतिहास सेहो बहुत गहिंर आ गंभीर रहल अछि। ज्योतिरिश्वर लिखित वर्ण-रत्नाकर सँ लैत विद्यापतिक विभिन्न रचना आ पाण्डुलिपि एहि छोट देशक राष्ट्रीय अभिलेखागार मे सुरक्षित भेटला उपरान्त कतेको भारतीय विद्वान् लोकनि अनेकानेक शोधकार्य सब कय सकलाह। हालहि डा. रामावतार यादवक परशुरामोपाख्यान नामक शोधग्रंथ मार्फत मल्लकालीन शासनकाल मे मैथिली एतुका राजभाषा – राजकाजक भाषाक हैसियत मे रहबाक बात सिद्ध कयल गेल अछि। ओना एहि ठामक इतिहास स्वयं एहि बात केँ स्वीकार करैत अछि जे काठमांडू सँ शासन व्यवस्था चलेनिहार मल्ल राजा जे स्वयं नेवारी भाषी छलाह परञ्च हुनक राजमे जनमानसक भाषाक रूप मे मैथिली केँ स्वीकार कयल गेल छल। शाहवंशीय राजकाल मे सेहो एकल भाषा नीतिक बाद आमजनक भाषाक रूप मे मैथिली प्रति समर्थनक भावकेर बहुत रास दृष्टान्त सब सरकारी सूचना सभक मैथिली मे विज्ञापन आ सरकारी सूचनापट्ट वा कार्यालयक बोर्ड या राजा लोकनिक महावाक्य सबकेँ मैथिली मे लिखबाकय सूचनापट्ट लगबेनाय, महाकवि कोकिल केर स्मृति दिवस सँ लैत मैथिली-मिथिला संस्कृति, कवि सम्मेलन आदि लेल छूट सब सँ ज्ञात होएत अछि।

कि कहैत अछि जनगणनाक तथ्यांक
नेपाल मे पिछला २०११ ई. मे सम्पन्न राष्ट्रीय जनगणना सँ कुल १२३ भाषा मातृभाषा (प्रथम भाषा) केर रूप मे बाजल जेबाक तथ्यांक भेटैत अछि। एहि मे सँ बेसी रास इंडो-आर्यन आ साइनो-टिबेटन भाषा परिवार केर भाषा थिक।
 
नेपालक राजकाजक (राजभाषा) भाषा नेपाली थिक, जेकरा पहिने खास्कुरा आ बाद मे गोर्खाली सेहो कहल जाएत छलैक। जनगणना २०११ मुताबिक ४४.६% लोक नेपाली भाषी अछि। मैथिली दोसर पैघ नेपालक भाषा थिक जे २०११ केर जनगणना अनुसार ११.५७% लोक द्वारा बाजल जाएत अछि। द्रष्टव्य हो जे मैथिलीभाषी केर बोली मे विविधता केँ किछु राजनीतिक ओ जातीय अधिकारक वकालत कयनिहार भाषा-विज्ञान सँ पूर्ण अपरिचित द्वारा सरकारी कोटा ओ सुविधा आदि प्राप्त करबाक लोभ-लालच मे फँसाकय जानिबुझिकय आन-आन भाषाभाषी होयबाक मुहिम चलाकय जनगणना मे मैथिली छोड़ि दोसर भाषा लिखायल जेबाक समाचार प्रकाश मे आयल छल। बेसी रास भाषा देवनागरी लिपिक प्रयोग करैत अछि जखन कि किछु भाषाक अपन मौलिक लिपि सेहो छैक। जेना कि मैथिलीक मौलिक लिपि मिथिलाक्षर।
 
सम्पूर्ण १२३ गोट नेपालक भाषाक तीन-चौथाई हिस्सा टिबेटो-बर्मन भाषा परिवारक हिस्सा थिक, जाहि मे नेपालभाषा (नेवा) जे काठमान्डूक मूल भाषा थिक से, लिम्बू, तमांङ्ग, मगर आर विभिन्न सुनुवार आर राई भाषा पड़ैत अछि। परञ्च, राजकाजक भाषा एवं संख्याक हिसाबे सर्वथा महत्वपूर्ण भाषा, नेपाली, इन्डो-आर्य (इन्डिक) शाखाक इन्डो-युरोपियन भाषा परिवारक सदस्य थिक। एहि तरहें नेपाल मे इन्डिक भाषादिक उपस्थिति कुल जनसंख्याक ७९% तथा टिबेटो-बर्मनक १८% अछि, आर दुनू परिवारक अधिकांश भाषा बहुत कम संख्या द्वारा प्रयोग कयल जाएछ। द्रविड़ियन भाषा कुरुक्स द्वारा तथा अस्ट्रोएसियाटिक परिवारक मुन्डा भाषा संथाली आर मुन्दरी द्वारा प्रतिनिधित्व कयल जाएछ।
 
नेपालक संविधानमे भाषा नीति
 
नेपालक संविधान २०१५ (२०७२ वि.सं.) केर भाग १ मे नेपालक भाषा लेल निम्न प्रावधान कयल गेल अछिः
 
अनुच्छेद ६: समस्त मातृभाषा जे नेपाल मे बाजल जाएत अछि से नेपालक राष्ट्रीय भाषा थिक।
 
अनुच्छेद ७कः नेपाली भाषा जे देवनागरी लिपिमे प्रयोग कयल जाएछ से नेपाल सरकारक कामकाजक भाषा थिक। (अन्य भाषा सेहो देवनागरी लिपिक प्रयोग करैत लिखल जाय।)
 
अनुच्छेद ७खः नेपाली भाषाक वाहेक, प्रदेश द्वारा एक वा अधिक बहुसंख्यक आबादी द्वारा बाजल जायवला अन्य भाषाकेँ सरकारी कामकाजक भाषा चुनल जा सकैत अछि।
 
मातृभाषा प्रयोग कयनिहार संख्याक आधारपर नेपालक भाषाः
 
भाषा – प्रयोग कयनिहारक संख्या – प्रतिशतता
नेपाली – १,१८,२६,९५३ – ४४.६४%
मैथिली – ३०,९२,५३० – ११.६७%
भोजपुरी – १५,८४,९५८ – ५.९८%
थारू – १५,२९,८७५ – ५.७७%
तमाङ्ग – १३,५३,३११ – ५.११%
नेपालभाषा (नेवा) – ८,४६,५५७ – ३.२०%
बज्जिका – ७,९३,४१६ – ३.००%
मगर – ७,८८,५३० – २.९८%
डोटेली – ७,८७,८२७ – २.९७%
उर्दू – ६,९१,५४६ – २.६१%
अवधी – ५,०१,७५२ – १.८९%
लिम्बू – ३,४३,६०३ – १.३०%
गुरुंग – ३,२५,६२२ – १.२३%
बैतडेली – २,७२,५२४ – १.०३%
राई – १,५९,११४ – ०.६०%
अछामी – १,४२,७८७ – ०.५४%
बान्तवा – १,३२,५८३ – ०.५०%
राजवंशी – १,२२,२१४ – ०.४६%
शेरपा – १,१४,८३० – ०.४३%
हिन्दी – ७७,५६९ – ०.२९%
चामलिंङ – ७६,८३० – ०.२९%
बझांङ्गी – ६७,५८१ – ०.२६%
संथाली – ४९,८५८ – ०.१९%
चेपांग – ४८,४७६ – ०.१८%
सुनुवार – ३७,८९८ – ०.१४%
जेकरा अपन भाषा नहि पता अछि – ४७,७१८ – ०.१८%
दनुवार – ४५,८२१ – ०.१७%
मगही – ३५,६१४ – ०.१३%
उराँव – ३३,५६१ – ०.१३%
कुलुंग – ३३,१७० – ०.१३%
खाम – २७,११३ – ०.१०%
राजस्थानी – २४,३९४ – ०.१०%
मघी – २४,२२२ – ०.०९%
ठामी – २३,१५१ – ०.०९%
भुजेल – २१,७१५ – ०.०८%
अन्य भाषा – २१,७१३ – ०.०८%
बंगाली – २१,०६१ – ०.०८%
थुलुंग – २०,६५९ – ०.०८%
यक्खा – १९,५५८ – ०.०७%
धिमाल – १९,३०० – ०.०७%
ताजपुरिया – १८,८११ – ०.०७%
अंगिका – १८,५५५ – ०.०७%
सांगपांग – १८,२७० – ०.०७%
खालिंग – १४,४६७ – ०.०५%
बम्बुले – १३,४७० – ०.०५%
कुमाल – १२,२२२ – ०.०५%
दराउ – ११,६७७ – ०.०४%
बाहिंग – ११,६५८ – ०.०४%
बाजुरेली – १०,७०४ – ०.०४%
ह्योमलो – १०,१७६ – ०.०४%
नाचिरिंग – १०,०४१ – ०.०४%
थम्पू – ९,०२८ – ०.०३%
भोटे – ८,७६६ – ०.०३%
घले – ८,०९२ – ०.०३%
दुमी – ७,६३८ – ०.०३%
लेप्चा – ७,४९९ – ०.०३%
पुमा – ६,६८६ – ०.०३%
दुमांगली – ६,२६० – ०.०२%
दार्चुलेली – ५,९२८ – ०.०२%
अठपहरिया – ५,५३० – ०.०२%
थकाली – ५,२४२ – ०.०२%
जिरेली – ४,८२९ – ०.०२%
मोबाहांग – ४,६५० – ०.०२%
सांकेतिक – ४,४७६ – ०.०२%
तिब्बती – ४,४४५ – ०.०२%
मेचे – ४,३७५ – ०.०२%
छँट्याल – ४,२८३ – ०.०२%
राजी – ३,७५८ – ०.०१%
लोहोरुन्ग – ३,७१६ – ०.०१%
चिन्तल – ३,७१२ – ०.०१%
गन्गाई – ३,६१२ – ०.०१%
पहारी – ३,४५८ – ०.०१%
दैलेखी – ३,१०२ – ०.०१%
ल्होपा – ३,०२९ – ०.०१%
दुरा – २,१५६ – ०.०१%
कोच – २,०८० – ०.०१%
चिलिंग – २,०४६ – ०.०१%
ईंग्लिश – २,०३२ – ०.०१%
जीरोजिरंग – १,७६३ – ०.०१%
खस – १,७४७ – ०.०१%
संस्कृत – १,६६९ – ०.०१%
कुल – २,६४,९४,५०४ – १००%
 
नेपालक अन्तरिम संविधान २००७ मुताबिक सेहो नेपाली एकमात्र सरकारी कामकाजक भाषा (अनुच्छेद ५, बुंदा २) छल। अन्य भाषा जे मातृभाषाक रूप मे बाजल जाय सेहो राष्ट्रीय भाषा छल (अनुच्छेद ५, बुंदा १)। तहिना अनुच्छेद ५, बुंदा ३ अनुसार क्षेत्रीय स्तर पर सब भाषाकेँ क्षेत्रीय स्तरपर कामकाजक भाषाक रूप मे मान्यता देल गेल छल।
 
(स्रोतः विकिपेडिया)
आगाँ ध्यान राखयवला महत्वपूर्ण विन्दु
संविधान मे सिर्फ सब भाषा केँ राष्ट्रीय भाषाक मान्यताक ललीपप खुएला सँ कोनो खास उपलब्धि भेटत ई कहनाय मोस्किल अछि। उपरोक्त अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन मे राखल गेल कार्यपत्र आ प्रस्ताव जे सिर्फ प्रदेश केर राजकाजक भाषा मैथिली बनय, ताहि सँ सेहो मैथिली भाषाक राष्ट्रीय हैसियत केर पोषण संभव नहि होयत। मैथिली भाषाभाषी जाहि तरहें देशक महत्वपूर्ण विकास मे भूमिका निर्वहन कय रहल अछि ताहि अनुसारे एहि भाषा केँ राष्ट्रक दोसर राजभाषा (सरकारी कामकाजक भाषा) मानल जायब आवश्यक अछि। संगहि, केन्द्रीय सेवा आयोग केर परीक्षा मे सेहो मैथिली भाषाक वैकल्पिक विषयक रूपमे मान्यता देला सँ सरकारी सेवामे उचित सहभागिता होयत जे विगत केर विभेद केँ अन्त करबाक एकटा अचूक हथियार सेहो बनि सकैत अछि। तहिना, सम्मेलनक घोषणापत्र सँ कयल गेल अन्य माँग सेहो पूरा करबाक जरुरत छैक। एहि भाषा मे शोध आ लेखन कार्य केँ प्रोत्साहनक संग-संग लिपि, पुरातात्विक धरोहर आदि केँ सहेजब राज्य द्वारा करायल जाय, ई समयक मांग थिक। अकादमी केन्द्र आ प्रदेश स्तर पर स्थापित कयल जेबाक चाही। संविधान केँ नियमन करैत समय सर्वप्रथम प्राथमिक शिक्षा मैथिलीभाषी केँ अपनहि भाषा मे भेटैक एहि बातक व्यवस्था राज्य द्वारा करब परम अनिवार्य अछि। मैथिली भाषा-साहित्यक संग लोककला, संस्कृति आ ऐतिहासिकता केँ संरक्षण, संवर्धन आ प्रवर्धन दिस सभक ध्यान रहब अनिवार्य अछि। ब्यर्थक कूतर्क आ भाषाक नाम पर समाज केँ तोड़यवला कुत्सित राजनीति केँ हतोत्साहित करबाक लेल स्थापित मान्यताक आधार पर नियम-कानून आ दंड विधानक निर्माण होयब सेहो समयक मांग थिक। एतय भाषाक एबिसी नहि जाननिहार लोकमानस मे भ्रमक सृजना कय देशक सार्वभौमिकता आ अखंडताकेँ पर्यन्त प्रभावित करबाक काज करैत अछि, एहेन द्रोह लेल कठोर दंडक प्रावधान करबाक जरुरत अछि।
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