मिथिलाक राजनेता मे ऐगला ललित बाबू बनि सकता संजय झा?

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मिथिलाक विकासवादी नेता संजय झाः लोकमानस मे ऐगला ललित बाबूक रूपमे चर्चित

– प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाक अपन अलग दाबेदारी

बिहार अन्तर्गत पिछला १०६ वर्ष मे मिथिला अपन स्वत्व लगभग सब तरहें समाप्त कय चुकल अछि। बौद्धिक, साहित्यिक, आध्यात्मिक, दार्शनिक, पौराणिक, ऐतिहासिक – वर्तमान समय मिथिला आर एहि सँ जुड़ल पहिचानक वैशिष्ट्य – ई सबटा ऐतिहासिक धरोहर समान मात्र देखा रहल अछि। एहेन अवस्था मे यदि मिथिला केँ भारतीय गणतंत्र मे पुनः राज्यक रूप मे स्थापित कयल जाए त एकर समग्र समृद्धि पूर्ववत् बनतैक, एकर लिपि, भाषा, साहित्य, समाज आ समरसताक संग-संग जनकक समावेशी समाजवाद फेरो एतुका लोक केँ आत्मनिर्भर बना देतैक। ई परिकल्पना अपना जगह पर कायम अछि। मैथिली केँ प्राथमिक शिक्षाक माध्यम बनाकय शत-प्रतिशत साक्षरता अनबाक सपना एखनहु विज्ञ द्रष्टा सभ करैत देखाएत छथि, भले आब कियो स्व. डा. जयकान्त मिश्र जेकाँ हाई कोर्ट आ सुप्रीम कोर्ट मे एहि लेल रीट दाखिल करैत आ बिहार सरकार केँ कटघरा मे ठाढ नहि करैत हो – मुदा सामाजिक संजाल सनक खुला अभिव्यक्तिक मचान-मैदानमे एकर वकालत आइयो एहि लेल कयल जाएत अछि कियैक कि आन राज्य जे अपन मातृभाषा केँ अवलम्बन बनाकय शिक्षा पद्धतिक विकास केलक तेकर देख्सी सबकेँ लगबे करैत छैक। ओ सब देश जे अपन मातृभाषा केँ मजबूत बनाकय आइ विकसित राष्ट्र कहाएत अछि तेकर देखादेखी भारतहु केर संविधानमे त ई लिखल जाएत छैक जे मातृभाषाक माध्यम सँ प्राथमिक शिक्षा देल जाय बालबच्चा केँ…. लेकिन ई लागू करबाक लेल राजनीति आ सत्ता-संचालकक पास कोनो स्पष्ट मार्गचित्र कतहु नहि छैक। झूठौं मे एहि क्षेत्र केँ हिन्दीभाषी क्षेत्र बनेबाक लेल कूचक्र करैत मैथिलीकेँ ब्राह्मणक भाषा कहिकय बहुसंख्य जनमानस केँ भड़कायल जाएत छैक, मिथिला राज्य माने ब्राह्मण राज्य केर बात कहिकय कतेको नेता आ प्रबुद्ध कहौनिहार जनता अपना केँ बैतरणी नदी टपैत देखैत अछि।

मिथिला राज्य कि मिथिला विकासः संजय झा एक छोट परिचय, विकास लेल शुरुए सँ समर्पित

मिथिला राज्य केर औचित्य, प्रासंगिकता आ मैथिल पहिचान केर संरक्षणत्व आदिक सवाल यथावत् रहितो विभिन्न दृष्टिकोण संपन्न व्यक्तित्व – लगभग ७५% कर्मशील मैथिल जनमानस आ ९०% पिछड़ल आम मैथिल समाज केर दृष्टि मे पर्यन्त राज्यक निर्माण सँ बेसी जरूरत मिथिलाक समग्र विकास हेतु आवाज उठेबाक वकालत कएल जाएछ। एहि पंक्ति मे छथि जननेता संजय झा – जे २०१२ ई. धरि भारतीय जनता पार्टीक सक्रिय नेता रहथि, बिहार मे लालू रेजिमक अन्त उपरान्त अपन मूल भूमि लेल नेतृत्व प्रदान करबाक लिलसाक संग दिल्लीक सोहबत केँ किनार राखि उचित प्रतिनिधित्वक संग बिहारक संग-संग निज मातृभूमि मिथिला क्षेत्रक विकास लेल ई सपुत बिहारक राजनीति मे प्रवेश कयलनि। बिहार विधान परिषदक सदस्य पार्षद् बनिकय अपन क्षेत्रक सड़क, शिक्षा, सिंचाई, संचार, स्वास्थ्य सहित समग्र विकास आ विकासक पूर्वाधार लेल निरन्तर चिन्तन कयलनि। अपन सामर्थ्य सँ विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाक विकास करैत धरातलपर सेहो एक सँ बढिकय एक महत्वपूर्ण कार्य केँ पूरा करौलनि।
 
किछुए समयमे दरभंगा आ मधुबनी जिलाक जनताक बीच संजय झाक लोकप्रियता यत्र-तत्र-सर्वत्र चर्चाक विषय बनय लागल। अपन मिथिला मे नेताक सवारी देखैत देरी बच्चा-बच्चा मे इनक्लाब-जिन्दाबादक नारा भले एहि २१म शताब्दी मे आबिकय जाति-पाति आ धर्मक नाम पर विभाजित होयबाक कारण पूर्वक स्वतंत्रता संग्राम सँ २०म शताब्दीक संध्या धरि जेकाँ नहि रहि गेल हो, भले आब मिथिलाक जनमानस मे नेताक भाषण आ विकास आदिक बात खोखला मजाक मात्र बनिकय रहि गेल हो, तथापि संजय झा केर अपन कार्यक्षेत्र मे आयब-जायब बढेला सँ ध्वस्त पूर्वाधारक पुनर्निर्माणक एकटा नव सूर्यक उदय होएत देखाय लागल। जतहि पहुँचैथ, टूटल बाट आ घाट केर निर्माण लेल पूल-पूलिया आ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना या मनरेगा अन्तर्गत गाम-गामकेँ जोड़यवला सिंगल रोड आदि लेल अपन कर्मठ छवि सँ काज करेबाक आश्वासन दैथ, काजो करबैथ। लोकप्रियता लेल यैह टा चाही मिथिला मे। नेतागिरी करबाक अछि त हरेक पंचायत मे पाँच गो निजी प्रतिनिधि ठाढ करू – प्रखंड स्तर पर किछु प्रतिनिधि आ १-२ टा पूर्ण समर्पित कार्यकर्ता आदि ठाढ करू आ जनसरोकारक विषय मे जनता सँ जुड़ल हर क्षेत्रक कार्य पूरा करेबाक जिम्मेवारी ग्रहण करैत अपन प्रखर व्यक्तित्व सँ काजो करबाउ। संजय झा मे आन्तरिक दृष्टिसंपन्नता आ काज करेबाक लगन हमरा जनैत कम सँ कम दुइ जिला मधुबनी आ दरभंगा मे बहुत कम समय मे हिनकर लोकप्रियता केँ आम जनमानस मे स्थापित कय देलक।
 
लेकिन अचानक २०१२ केर आसपास जखन जदयू आ भाजपाक बिहार नेतृत्वमे ओदौदक अन्तर्संघर्ष चरम् पर पहुँचल त संजय झा अपन च्वाईश लीडर नीतीश कुमारक पक्ष केँ सम्मान करैत भाजपा छोड़िकय जदयू ज्वाइन कय लेलाह। शुरुआती दौड़मे हिनका जाहि तरहें भाजपा द्वारा बिहारक राजनीति मे ऊँचाई भेटलनि, से मनोनुकूल ढंग सँ बिहार भाजपाक भीतर अनेको तरहक गूटबाजीक कारण निरन्तरता नहि पाबि सकल छल। लेकिन कतहु न कतहु जनताक सेवा आ क्षेत्रक विकास सँ एकटा छवि बना चुकल नेता केँ जखन कीर्ति झा आजादक उम्मीदवारी कायम रखबाक कारण २००९ केर संसदीय चुनाव मे टिकट सँ वंचित राखल गेलनि तऽ एकटा असंतोष आ सही नेतृत्व केँ मौका सँ वंचित रखबाक पीड़ा आखिरकार हिनकर भाजपा सँ दूर आ पटना केन्द्रित राज्य संचालन मे मुख्यमंत्री नीतीश कुमारक एकटा विशेष सल्लाहकारक रूपमे पर्यन्त स्थापित भऽ चुकलाक बाद स्टेट मैनेजमेन्ट राजनीतिज्ञक रूपमे सेहो राज्यक विभिन्न राजनीतिक तहसँ लैत शासन-प्रशासन धरि अपन नीक दबदबा स्थापित कय चुकल नेता २०१२ मे जदयू मे प्रवेश कय गेलाह। तेकर किछुए समयक बाद भाजपा सँ जदयू केर दूरी बढि गेल आ बिहार मे एकटा चिर-परिचित राजनीतिक गठबंधन अपन वर्षों पुरान सम्बन्ध केँ तोड़ैत बिहार राज्य मे भाजपा सँ दूरी बना लेलक। परञ्च २०१४ केर संसदीय चुनाव मे १० वर्षीय सत्तापक्ष यूपीए विरोधी वातावरण आ ताहि ऊपर सँ प्रखर हिन्दूवादी छविक भाजपा प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेन्द्र मोदीक लहर मे एक बेर फेर संजयजी जदयू केर टिकट सँ संसद बनबाक सपना पूरा नहि कय सकलाह। परञ्च, अपन छवि गुणे विकासक विभिन्न योजना मे लागल रहलाह। सार्थक असैर जमीन पर देखि सकैत छी।

संजय झाक नेतृत्वः सफलता‍-असफलता सँ वगैर कोनो विचलन अपन विकासक रोडमैप पर निरन्तर बनल रहला अछि

निरपेक्षताक संग हिनक नेतृत्व क्षमताकेँ खंघारैत छी त सफलता-असफलता दुनू बात संगे-संग चलैत देखाएत अछि। परञ्च सोच सदैव सकारात्मक आ सार्थक उर्जा सँ भरल देखि मोन प्रसन्न होएत अछि। आशा जगैत अछि त संजय झा सँ – मजबूत गठबंधन निर्माण करबाक सामर्थ्य देखाएत अछि हिनका मे। किछु समय पूर्व हिनका दिल्ली जदयू केर प्रभारी बनाओल गेल, दिल्लीक नगर-निगम चुनाव मे संगठन निर्माण सँ लैत आम लोकक सरोकार मे ईहो ‘पूर्वाञ्चल’ कार्ड भँजबाक चेष्टा त कयलनि, मुदा ‘मिथिलांचल’ सँ ऊपर कतय कतेक समर्थक भेटलनि ताहि लेल दिल्ली नगर निगम चुनावक परिणाम पर आरो गहिंर अध्ययन करय लेल बाकी अछि। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रमे जदयू संगठनकेँ महत्वपूर्ण स्थान दियेबा मे सफल संजयजी अपन मिथिलाक लोक सँ दिल्लीक गली-गली मे भेंट केलाक बाद फेरो अपन मातृभाषा आ मूल भूमिक आर्थिक उपेक्षाक टीस – मूल भूमि छोड़ि दूर परदेश मे पलायन करबाक स्थिति जेकरा लेल ई चारि गोट ‘पी’ केर चर्चा करैत रहला अछि – पहचान, परिवर्तन, पर्यावरण आ पानी, तेकर मूल भूमि आ हिनकर मातृभूमि मिथिलाक विपन्न अवस्था सँ संघर्ष करबाक लेल ‘मिथिला डेवलपमेन्ट काउन्सिल’ निर्माणक दृष्टि सेहो भेटलनि, ई हालहि हिनका संग भेल मिथिला राज्य निर्माण सेनाक महासचिव राजेश झाक वार्ता सँ स्पष्ट होएत अछि।
जदयू के राष्ट्रीय महासचिव आ बिहार योजना परिषद केर सदस्य होयबाक संग-संग भुतपूर्व एमएलसी बिहार विधान परिषद् – अपन अनेक ओहदा सँ कतेको रास काज करबेबाक आम चर्चा सुनैत छी। कमला-बलानपर अंग्रेजक जमाना मे रहल पुल जे १९८७ ई. केर भयानक बाढि मे आखिरकार पूर्णरूप सँ ध्वस्त भऽ गेल तेकरा पुनः राज्य सरकारक योजना मे बहेड़ा-फूलपरास स्टेट हाइवेक खाका तैयार कराकय काज करबेबाक महत्वपूर्ण श्रेय क्षेत्रक लोक हिनकहि दैत छन्हि। एतबा नहि, रसियारी मे सेहो कमला-बलानपर पुलकेर निर्माण, कनौजर घाट पुल, मदरिया घाट पुल, कटवासा घाट पुल, बथै घाट पुल, आर एहेन दर्जनों पुल केर संग-संग अनुमंडलीय अस्पताल बेनीपुर, रेफरल हॉस्पिटल बहेड़ी, घनश्यामपुर आ बहेड़ीमे पावर ग्रिड, श्यामा माय परिसर विवाह भवन, मिर्जापुर गौशाला नाट्य कला मंच, बेनीपुर नगर परिषद केर स्थापना, बेनीपुर मे उप-कोषागार केर स्थापना, इत्यादि अनेकानेक महत्वपूर्ण कार्यमे हिनकर सराहनीय योगदानक चर्चा क्षेत्रक लोक खूब करैत रहैत अछि। पुल आ पुलियाक अलावे सड़क निर्माण मे सेहो हिनकर नीक योगदान छन्हि। योजना समिति सँ हिनकर अगुवाई मे कयल गेल आरो महत्वपूर्ण कार्य जाहि सँ हिनकर व्यक्तिगत दृष्टिकोण केँ विकासवादी नेतृत्वकर्ताक रूप मे ललित नारायण मिश्रक दोसराति कतेको लोक मानैत अछि।

मिथिलाक विकास लेल गोटेक दृष्टिकोण आ योजनाक परिकल्पना

मिथिला मे जलकृषिक अलावे पारंपरिक कृषि आ गृह उद्योगक स्थिति मे सुधार अनबाक व्यापक योजनापर कार्य कय रहला अछि। मिथिलाक प्राकृतिक संसाधन मे जलक्षेत्रक प्रचूरता आ सामुदायिक कृषि जेना पान, मखान आ माछ लेल घरैया लूरि सँ सम्पन्न जाति-विशेषक अगुवाई मे कार्य करबाक वृहत् योजना हिनका पास छन्हि। बरइ समुदायक पानक खेती ‘मिथिला पान’ केर उपजा करय, मैथिल मल्लाहक हाथमे बिहार सरकारक जलकर व कृषि लेल प्रशासनिक स्तरपर योजनान्तर्गत उत्पादन होएक, चीनी आ पेपर मिल लेल एतय कच्चा पदार्थक प्रचूरता फेरो हो आर बियाडा द्वारा ठाम-ठामपर उद्योग लगेबाक लेल जमीनक विकास करैत निजी क्षेत्रक पूँजी निवेशक केँ एहि क्षेत्र मे आकर्षक पैकेजपर लगानी करबाक अवसर निर्माण कयल जाय, पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप सँ स्वास्थ्य क्षेत्र मे काफी पिछड़ल ग्रामीण भागमे सेहो प्राथमिक उपचार सँ लैत आधुनिक सुविधायुक्त अस्पताल निर्माण करबैत पब्लिक केर सुख-सुविधामे बेस क्रान्तिकारी विकास कयल जाय, स्वयं मिथिलाक बेटा जे परदेशमे पूँजी निर्माण करैत अपन क्षेत्रमे लगानी करबाक लेल इच्छूक अछि तेकरा विशेष आर्थिक पैकेज दैत पूँजी निवेश लेल अपन गामघर मे उद्योग-व्यवसाय आदि लगेबाक लेल घर-वापसीक माहौल तैयार कयल जाय, नगदी फसल उपजेबाक लेल सामुदायिक कृषि प्रणाली लेल युवा किसान सबकेँ प्रोत्साहित कयल जाय आ सुविधायुक्त ऋण उपलब्ध करायल जाय, छोट-छोट टुकड़ा मे रहल जमीन जतय कोनो उपलब्धिमूलक खेती नहि संभव भऽ रहल अछि ताहि टुकड़ा सबकेँ एकीकृत कय सरकार द्वारा अधिग्रहण करैत पट्टापर लगेबाक आ कृषि उत्पाद सँ लैत उद्योगक वातावरण तैयार करबाक विभिन्न महात्वाकांक्षी योजना सब केँ कोना लागू कयल जा सकत ताहि दिशामे विभिन्न कार्यदल सबकेँ टास्क देल जेबाक सूचना भेटैछ। एहि सब लेल मिथिला डेवलपमेन्ट काउन्सिलक स्थापना कय बिहार राज्य सरकार सँ मिथिलाक्षेत्रक विकास लेल काज करबाक प्रतिबद्धता व्यक्त कयलनि अछि।

नीतीश सरकार केर चाणक्य सेहो कहाएत छथि संजय झा

सर्वविदिते अछि जे बिहार मे महागठबंधनक सरकारमे अप्रत्याशित जीत भेटलाक बादो राष्ट्रीय जनता दलक एकल वर्चस्ववादी आ घोर जातिवादिताक पुनर्प्रसारक बुनियादपर पूर्वहि जकाँ फेरो सदन आ सड़क सबतैर एकाधिकार स्थापित करबाक अतिवादी शासन स्थापित करयवला मानसिकता हावी भेलाक बाद जदयू नाटकीय ढंग सँ गठबंधन तोड़िकय पुनः प्राकृतिक मिलनसार गठबंधनक राज्य बिहार मे कायम केलक। गुन्डाराज आ वर्चस्ववादक अतिवादी गठजोड़क शासन २१म शताब्दीमे बिहारक भविष्यपर प्रश्नचिह्न जे लगेलक एकर खात्मा आबयवला समयमे कोना कयल जायत ईहो अपना आपमे एकटा सवाल छैक, लेकिन अपन मौलिकताकेँ सर्वथा हेरा चुकल मिथिला लेल मिथिलहि केर चाणक्य संजय झा अपन विकासवादी योजनामे कतेक दूर धरि सफल बनैत छथि ई देखबाक अछि। जेएनयू मे छात्र जीवन सँ राजनीति प्रारम्भ कयनिहार संजय झा दरभंगामे एम्स निर्माण आ उड़ान क्षेत्र मे सेहो मिथिलाक विभिन्न हवाई अड्डाकेँ चालू करबाक लेल केन्द्रक नेतृत्व सँ भेंट-मुलाकात त करबे केलनि, जदयू केर मांग बिहार केँ विशेष राज्यक दर्जा दियेबाक लेल एखनहु ओहि मुद्दापर कायम छथि। हम सब हिनका सँ बेहतरी केर अपेक्षा कय सकैत छी।
 
हरिः हरः!!
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