भक्त प्रह्लाद सँ सीखू ई ५ बात – बालोपयोगी नैतिक कथा

Pin It

होलीक उमंग बीच किछु एहेन सबक जे हमरा सबकेँ भक्त प्रह्लाद केर जीवन सँ सीखबाक चाही

हरेक वर्ष होलीक पर्व अबैत अछि। लोक खुशी आ उल्लास सँ भरल माहौलमे होलिकाक दहन करैत छथि। फेर रंगक उत्सव होएत अछि। कतेको रास यादे राखय योग्य बातक संग होली हमरा सबसँ विदाई लैत अछि जाहिसँ फेर ऐगला वर्ष नव उम्मीदक संग ई फेर हमरा सभक सोझाँ रहैत अछि।

होलीक दिन जे चारि गोट नाम सभक मुंहमे रहैत छैक ओ थिक – भक्त प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप, होलिका आ भगवान् नृसिंहदेव। हमरा लोकनिक पौराणिक कथामे सिर्फ कथा टा नहि होएछ, ओहि मे बहुत रास गहिंर मर्म सब सेहो छुपल रहैत छैक। होलीक एहि उमंग सँ भरल पाबनिक बीच किछु सबक जे हमरा सबकेँ भक्त प्रह्लादक जीवन सँ सीखबाक चाही ताहिपर सब कियो जरूर ध्यान दी।

१. प्रह्लाद हिरण्यकशिपुक पुत्र छलाह। पुत्र सदाचारी लेकिन पिता अवगुणक खान। प्रह्लादकेँ अपन स्वभाव मुताबिक परिवेश नहि भेटलनि, तैयो ओ अपन लक्ष्यपर अडिग रहला। हमरा लोकनि प्रह्लाद सँ सीखी जे कठिन परिस्थिति मे सेहो कोना अपन मनोबल उच्च बनौने रहि सकैत छी, कोना सद्मार्गक बाट पर डटल रहि सकैत छी।

२. प्रह्लाद जखन बालकहि छलाह त ओ श्रीनारायण केर पूजा आरम्भ कय देलनि। हुनकर ई विशेषता हमरा सबकेँ यैह कहैत अछि जे नीक आदतिक विकास बच्चहि उमेर सँ भऽ जाय त आगू जाकय हमरा सभक मनमे अमिट भऽ कय ओ रहत। मेहनति सफलता जरुर दैत छैक, परन्तु अपन संस्कार ओकरा लक्ष्य धरि पहुँचाबैत अछि।

३. अगर अहाँक लेल कियो नकारात्मक भविष्यवाणी करय, ई कहय जे अहाँ किछुओ नहि कय सकैत छी, अहाँक जीवनक मार्ग मे अन्हारे-अन्हार अछि त कनिको घबरेबाक जरूरत नहि छैक। प्रह्लाद केँ देखू। ओ त बच्चे छलाह लेकिन हुनकर भक्तिक प्रताप सँ भगवान् नारायण केर सिंहासन तक डोलि गेल छल।

अपन जीवनक परिस्थिति पर ग’र करू। निस्सन्देह अहाँक हालत त प्रह्लाद सँ नीके अछि। नकारात्मक भविष्यवाणी केँ बिसैर जाउ। सिर्फ अपन खूबी पर ध्यान केन्द्रित करू।

४. कहल जाएत छैक जे मनुष्य यदि किछु करबाक लेल ठानि लियए त कि नहि कऽ सकैछ! प्रह्लाद सेहो किछु एहने छलाह। जे उमेर खेलकूद आ हो-हंगामा मचबयवला होएत छैक, तहिया ओ अपन पाठशालाक आरो धियापुता सबकेँ पर्यन्त भगवान् केर जप करब सिखा चुकल छलाह। अगर विचार नेक होएक आर अहाँ ओहिपर अड़ल रही त कि नहि कय सकब?

५. जँ जीवन अछि त बाधा सेहो जरूर होयत। मानल जाएत अछि जे परमात्मा अपन संतान (जीव) केँ कठिनाई किंवा कोनो चुनौतीपूर्ण परिस्थिति सेहो ओकर क्षमते गुणे टा दैत छथिन। प्रह्लाद केँ मारबाक लेल हिरण्यकश्यप कि नहि केलक? खौलल गरम तेल मे दयकेँ, भूखे राखिकेँ, कैदी बनाकेँ, पहाड़पर सँ धक्का मारि खसाकेँ आर होलिकाक संग आइग मे जरा देबाक तक कोशिश कयकेँ हुनका मारबाक लेल हिरण्यकश्यप बियौंत लगेलक।

ई सबटा कष्ट प्रह्लादक जीवन लेल अत्यन्त कठिन आ चुनौतीपूर्ण घड़ी सब छलन्हि। ओ एहि सबसँ आरो बेसी मजगुत बनिकय निकललाह आर आखिर मे त स्वयं भगवान् हुनकर रक्षा करय लेल आबि गेलखिन। हिरण्यकश्यप केर विनाश भऽ गेल मुदा प्रह्लाद अपन भक्तिक बलपर अमर भऽ गेलाह।

अनुवादित लेख, मूल लेखकः राजीव शर्मा, स्रोतः एस्ट्रोलोजी एण्ड स्पिरिच्युअलिटी

अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी

पूर्वक लेख
बादक लेख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

3 + 1 =