दुर्गा भगवतीक ११ अनुपम नाम, भक्त लेल सुलभ आ कल्याणकारी साधनाक अचूक मंत्र

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स्वाध्याय

– प्रवीण नारायण चौधरी

जय माँ!
 
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
 
जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा – एहि नामसँ प्रसिद्ध जगदम्बिके! अहाँकेँ नमस्कार अछि।
 
१. जयति सर्वोत्कर्षेण वर्तते इति ‘जयन्ती’ – सबसँ उत्कृष्ट आ विजयशालिनी।
 
२. मङ्गं जन्ममरणादिरूपं सर्पणं भक्तानां लाति गृह्णाति नाशयति या सा मङ्गला मोक्षप्रदा – जे अपन भक्तकेँ जन्म-मरण आदि संसार-बंधनकेँ दूर करैत छथि, ओहि मोक्षदायिनी मङ्गलमयी देवीक नाम ‘मङ्गला’ थिक।
 
३. कलयति भक्षयति प्रलयकाले सर्वम् इति काली – जे प्रलयकालमे सम्पूर्ण सृष्टिकेँ अपन ग्रास बना लैत छथि, वैह ‘काली’ थिकीह।
 
४. भद्रं मङ्गलं सुखं वा कलयति स्वीकरोति भक्तेभ्यो दातुम् इति भद्रकाली सुखप्रदा – जे अपन भक्तकेँ देबाक लेल टा भद्र, सुख किंवा मङ्गल स्वीकार करैत छथि, वैह ‘भद्रकाली’ छथि।
 
५. कपालिनी अपन हाथमे कपाल तथा गलामे मुण्डमाला धारण करयवाली थिकीह।
 
६. दुःखेन अष्टाङ्गयोगकर्मोपासनारूपेण क्लेशेन गम्यते प्राप्यते या सा दुर्गा – जे अष्टाङ्गयोग, कर्म एवं उपासनारूप दुःसाध्य साधनसँ प्राप्त होएत छथि, से जगदम्बिका ‘दुर्गा’ कहाएत छथि।
 
७. क्षमते सहते भक्तानाम् अन्येषां वा सर्वानपराधान् जननीत्वेनातिशयकरुणामयस्वभावादिति क्षमा – सम्पूर्ण जगत् केर जननी भेलासँ अत्यन्त करुणामय स्वभाव होयबाक कारण जे भक्त अथवा दोसरहुकेर सब अपराध क्षमा करैत छथि, हुनक ‘क्षमा’ थिकन्हि।
 
८. सभक शिव अर्थात् कल्याण करयवाली जगदम्बाकेँ ‘शिवा’ कहल जाएत छन्हि।
 
९. सम्पूर्ण प्रपञ्चकेँ धारण करबाक कारण भगवतीक नाम ‘धात्री’ छन्हि।
 
१०. स्वाहारूपसँ यज्ञभाग ग्रहण कयकेँ देवतालोकनिक पोषण करयवाली छथि।
 
११. स्वधारूपसँ श्राद्ध आर तर्पणकेँ स्वीकार कयकेँ पितरलोकनिक पोषण करयवाली छथि।
 
ॐ श्री दुर्गायै नमः!!
 
हरिः हरः!!
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