मैथिली कविताक रस मे सराबोर फेसबुकिया जनमानस – साभार वरेण्य कवि उदयचन्द्र झा ‘विनोद’

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साहित्य

मैथिलि कविता रस धारा मे सराबोर होयबाक अचूक अवसर फेसबुक पर सेहो भेटि रहल अछि। वरेण्य कवि उदयचन्द्र झा ‘विनोद’ नित्य भोरे अपन सुन्दर कविता फेसबुक सँ पोस्ट करैत छथि जाहि पर पाठक सब लुधकल अपन प्रतिक्रिया रखैत अछि। एकटा जीवन्त कवि सम्मेलन देखबाक अवसर साहित्य मे रुचि रखनिहार अपार जनसमूह केँ भेटैत अछि। आइ मैथिली जिन्दाबाद केर पाठक लेल सेहो किछु अनमोल रचना साभार श्री उदयचन्द्र झा ‘विनोद’ केर फेसबुक वाल सँ संकलित कय एतय राखि रहलहुँ अछि। आशा व विश्वास अछि जे अपनो लोकनि खूब लाभान्वित होयब।

१.

हमरा एखनो नीक लगैए गामे मे
सब सँ पैघ मिठाइ भेटैए आमे मे
ओ पाकडि ओ पोखरि ओ साबुजदाना
ओ छाहरि ओ स्नान बोल ओ सुफियाना

कनियों माथ दुखयला पर ओ जिग्यासा
ओ सम्बन्धक सम्बोधन मधुरिम भाषा
विद्यापति चौकक संध्या बड घीचैए
काशी सँ रहिका आग्रह मे जीतैए

अहाँ कहब जे की बाजैए ई बुडिबक
की करबै सबदिना हम एहने अहमक
महल छोडि सूगर खोभार दिस दौडैए
एखनो मटकूरी मे दही पौरैए

नोकरी मे सेहो बरमहल गाम रही
गामक कारण पटना मे बदनाम रही
भाइ राजमोहन जी बड कौचर्य करथि
भीमनाथ जी हमर लाथ बेपर्द करथि

गामे बल पर हम एखनहु किछु काजक छी
पुरखा के अछि कर्ज, बात ई बाजक छी
यदि किछु काजक लेखन,सभटा हुनके थीक
अपन न किछु अछि, गछबा मे अछि लाज कथीक

आँगुर पकडि चलौलनि,बैसि पढौलनि ओ
पढबा लै सामग्री सभटा देलनि ओ
हुनके पढि पढि नकल करी, हम लेखक छी
कविता थीक पूर्वजक, हम उदघोषक छी

कुलानन्द जी ठीक कहथि, हम गामे छी
पटना मे रहनहु लागय हम ठामे छी
कलकत्ता दिल्ली सब ठाम गमारू हम
पहिरी पैन्ट ,समस्या कोना सम्हारू हम

एखनहु हम धोतीबाला पंडित जी छी
पूजा भने न करी, पाठ त करिते छी
सीर गोसाउनिक गोड लागि, प्रस्थान करी
तनी जगह पर झुकी श्रेष्ठ सम्मान करी

२.

मिथिला उजडैए इराक अफगानिस्तान जकाँ
सत्य कहै छी गाम न लागय कनियों गाम जकाँ

घरे घर देखबै जे ताला लागल छै
घर ओगरै छै बुढिया, कोनो अभागल छै
लीलू गेला इलाज कराबय लै दिल्ली
लाल कका के घर मे लागल छनि किल्ली
गाम केर स्कूल लगै छै ब्रह्मस्थान जकाँ।

एमबीए करबा लै गेलै हरियाणा
मुल्की गेलै मजूर पडा क लुधियाना
दिल्ली मे दर्जनो घर एहि गामक छै
गाम बुझू त आब गाम बस नामक छै
ठीके गामक लोक लगै मारल गुलफाम जकाँ।

बिजली सेहो बेठेकान, स्टाफे नहि
जानू भेल खराब, केओ माय बापे नहि
लोक चौक पर भेटत, सुन्न दलान सभक
सुनबै नहि सोहर समदाओन आब गामक
गामक कहबैका सभ लागथि बौक अकान जकाँ।

लोक भेटत किछु मुखिया के पामोजी मे
खाता आ खतियान गेलै सब तौजी मे
चेन्नैबाली भौजी परुकाँ आयल छली
देखनुक मुल्की वस्तु शहर सँ लायल छली
सडक कात के घर सब लागै शुद्ध दोकान जकाँ।

क्यो नहि रहतै गाम,सभ चलि जयतै औ
एहिठाँ रहतै त बाबू की खयतै औ
पढतै कतय ,इलाज भला कोना हेतै
अपटी खेत बिलटि रहनाहर मरि जेतै
रजधानी सँ हुकुम चलै व्याधा के वाण जकाँ।

सुनै छियै विकास भ रहलै
ककर विकास गाम के रहलै
खेती मे से लसि नहि रहलै
रहबा जोगर गाम नहि रहलै
मालिक केर अहाता लागै कब्रिस्तान जकाँ।

३.

लाज नेता के भने नहि, लोक किन्तु लजा रहल अछि
धार अछि उमतायल देखू नाह भासल जा रहल अछि
शीर्ष नेता सभक मुँह सँ, अबै जे दुर्गंध सदिखन
तकर कारण आत्मा भारतक मारल जा रहल अछि

शासकक उद्दंडता के चाप, बिसरल छल अतीतक
जिबै छल सभ लोक बिसरल, वेदना आ दुख व्यतीतक
शान्त वातावरण शीतल भारतक मानस पटल पर
घाव इतिहासक जगा क, लोक के सनका रहल अछि

कोन यत्ने गढल पुरखा, लोकतंत्रक भव्य प्रतिमा
कोना लडला, कते लडला, केहन उज्ज्वल हुनक महिमा
देलनि छाती तानि, वन्दे मातरम कहि प्राण देलनि
बिसरि ओहि मार्तंड के, खद्योत के चमका रहल अछि

भारतक परिचय कहू, बिनु बुद्ध के की पूर्ण होयत
कालिदासक देश की, बिनु गालिवक सम्पूर्ण होयत
वेद पर यदि गर्व अछि, गुरु नानको पर गर्व चाही
कथ्य सभहक एक छैक, कथानको मर्मग्य चाही

भेला तुलसीदास पुछियनु, ओ कवीरक नाम लै छथि
हम कहै छी सूर त ओ, मीर केर नजीर दै छथि
सुब्रमण्यम भारती के बिसरि केहन देश हेतै
बिना विद्यापति रवीन्द्रक, कोना सभ्य प्रदेश हेतै

समस्या मुल्की पडल छै, तकर नहि क्यो करै चर्चा
युवा जे बेकार कोटिक कोटि, नहि ककरो बेगरता
एक दोसर के कहै छै देशद्रोही धर्मद्रोही
भुख्खरक छै झुंड सगरे, आरती करबा रहल अछि

अंतरिक्षक यात्रा पर जा रहल अछि आइ मानव
करत की उपकार बाजू अतीतक महिमा वखानब
एकताक अभाव मे आगाँ बढब की हैत संभव
वैमनस्यक पाठ शाखा लगा क पढबा रहल अछि

ठकैए फुसिए बजैए, भोट चाही आर नहि किछु
स्वाद खूनक, सनक तकरे, चाट तकरे, आर नहि किछु
जीत ककरो हो, मुदा छै पराजय लोकक सुनिश्चित
तंत्र तोडय राति दिन, सत्ता विपक्ष केओ न विचलित

४.

जीवन जहिना शतरंगी छै
मृत्युक सेहो बड प्रकार छै
एहनो मृत्यु आओत देखबा मे
लागत नहि जे सरोकार छै
कोनो लागि सम्बन्ध न रक्तक
फूसिक लोक पसारय माया
पूजी रहनहि पता चलै छै
के संतति सम्बन्धी जाया।

एक मृत्यु काल्हियो देखल
सोदर पर्यन्त पकडने आयल
मृत्युक कर्मकांड के कारण
ओ समाज द्वारा पकडायल
सगर राति कछमछ ओछाओन पर
सोची हम जे नीक भेलैए
के देखितै, सेवा के करितै
मरि गेलै से ठीक भेलैए।

एक मृत्यु पर गद्दी भेटै
एक मृत्यु सँ मुक्ति भेटै छै
एहनो मृत्यु देखब रहरहाँ
फूट करै के युक्ति भेटै छै
एक मृत्यु पर मारि होइत छै
एक मृत्यु धसि जाइछ धरती
एक मृत्यु पर जाइछ उडाहल
घर घडारी गाछी परती।

सिंउथ उजडनहु नहि कानै छै
तेहनो मृत्यु हम देखने छी
बापक मुइने बेटा नाचै
देखि दृश्य माथा धुनने छी
छुटने प्राण त्राण भेटै छै
दर देयाद सखा सम्बन्धी
मोन लगा परबोधल जाइछ
बान्हल बडद खुटेसल नन्दी।

मरब बेर पर बड आवश्यक
भेल विलम्ब विपत्तिक शंका
रावण मुइने मुक्त होइत छै
पोसल नगर स्वर्ण के लंका
जहिना जीवन कटगर होइ छै
धरगर मृत्युक सेहो अपेक्षा
सभ के फेल करक छै एहि मे
मृत्यु जीवनक तेहन परीक्षा।

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