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जनजागरण केर प्रयास कदापि रिक्त नहि जाएछः कथा

जनजागरण केर प्रयास कदापि रिक्त नहि जाएछः कथा

मंगनू काका केर नागरिक सम्मान   (कथाः प्रवीण नारायण चौधरी)   मंगनू काका केर काजे छलन्हि देवाल पर पेन्टिंग कय प्रचार-प्रसार केनाय…. ओना त ओ सब प्रचारक पाइ लैथ तखने देवाल पर लिखैथ…. मुदा कंडोम केर प्रचार लेल ओ कोनो कंपनीक पाइ लेने बिना प्रचार करैत छलाह। लोक सब पूछैन त कहथिन जे एतेक पैघ […]

पत्नीक प्रकार – सब पति लेल जानब आवश्यक

पत्नीक प्रकार – सब पति लेल जानब आवश्यक

पत्नी पर निबंधः व्यंग्य प्रसंग परन्तु यथार्थ सँ कनिको भिन्न नहि – बैजू बावरा (अनुवादक) पत्नी नामक प्राणी भारत सहित समस्त विश्व में भेटैत छैथ। प्राचीन समय में इ सिर्फ़ भोजनशाला में भेटैत छली, लेकिन वर्तमान में इ शौपिंग मोल्स, थेटर्स व् रेस्टोरेंट्स के नजदीक टहलैत अधिक भेटैत छैथ। पहिले इ प्रजाति म लम्बा केश, […]

मैथिली कथाक माध्यम सँ यथार्थ चिन्तन

मैथिली कथाक माध्यम सँ यथार्थ चिन्तन

मैथिली कथाः दिवा स्वप्न – प्रवीण कुमार झा, बेलौन, दरभंगा (हालः दिल्ली सँ) नै कहि ई स्वप्न देखबा सौं कहिया पाछां छूटत… आब अकच्छ भ् गेल छी. कतेको पैरि धोबि, बिछावन झाड़ब.. मुदा सबटा फेल… दरअसल दोख हम्मर बेसी अहि… हमरा स्वप्नक कैटोगरीये अलग अहि… से कनेक दिक् होईत अछि… आई भोरहरबा में देखल… नवंबर […]

मिथिला मरइ-जियइ तै सँ कि…. मोदीजीक हिसाब धरि हमहीं जोड़ब

मिथिला मरइ-जियइ तै सँ कि…. मोदीजीक हिसाब धरि हमहीं जोड़ब

विचारः नेशन फर्स्ट – मैथिलक मनोदशाक एक चित्रण – प्रवीण नारायण चौधरी  हम ई खूब नीक सँ बुझैत छी जे मिथिलावासी केर बौद्धिक सामर्थ्य आर कोनो संस्कार सँ या आवोहवा-सभ्यता सँ बहुत बेसी अछि। एहि सामर्थ्य मे जे अपन क्षमताक सदुपयोग करैत अछि ओ त जीवन सफल करैत अछि, मुदा दुर्भाग्यवश वर्तमान बौद्धिकताक स्तर ओहि […]

ऑडिटर साहबः मैथिली कथा

ऑडिटर साहबः मैथिली कथा

कथा – प्रवीण कुमार झा, बेलौन, दरभंगा (हालः दिल्ली सँ) ऑडिटर साहब के घर बचिया के देखय बला आयल छलैन. बचिया के देखाओल गेल… पढ़ल लिखल, सुलोचना आ दिव्य छलीह से कोनो तरहक प्रश्ने नै रहैक कटबा छंटबा के. ऑडिटर साहब केर कनियाँ मारे ख़ुशी के डाँड़ में नुआ खोंसि चिहुंक रहल छलि.. बुच्ची गै […]

मिथिलाक प्रसिद्ध गोनू झा वर्तमान समय दिल्ली मे

मिथिलाक प्रसिद्ध गोनू झा वर्तमान समय दिल्ली मे

गोनू झा सँ दिल्ली मे भेंट भेलः कथा – प्रवीण नारायण चौधरी   भारतक राजधानी दिल्ली – भौगोलिक दृष्टि सँ हिमालय सँ १६० किलोमीटर दक्षिण, समुद्रतल सँ लगभग ७००-१००० फीट ऊंचाई पर, ५१ किलोमीटर लंबा आ ४९ किलोमीटर चौड़ा, ८०० वर्ग किलोमीटर शहरी, ७०० वर्ग किलोमीटर ग्रामीण आ यमुना नदीक किनार मे बसल अछि। सब […]

रमेश बाबुक वैसाखीक सहारा चलबाक राज

रमेश बाबुक वैसाखीक सहारा चलबाक राज

संस्मरण – सत्यनारायण झा, पटना लगभग 30-40 साल पहिनेक बात छैक, एकबेर हम कोनो काज सँ बेनीपट्टी –सरिसब गाम गेल रही । ओहि गाम मे हमर सम्बन्धी लोकनि छथि । गाम तए ओना रोडे कात मुदा बर पिछरल । हम कुटुम्ब कए दलान पर बैसल रही । कतौ सँ रमेशजी पहुँचलाह । बैसाखी सहारे चलैत […]

समाजक गति आ लोकक मति: कथा

समाजक गति आ लोकक मति: कथा

गामक याद: लूल्हीक गोइठी बिछनाय (नैतिक कथा) – प्रवीण नारायण चौधरी कोनो जमाना मे मिथिलाक गाम-घर जहिया मूल कृषि पर आधारित जीवन-यापन चलबैत रहल – ताहि समय माल-जाल चराबय हेतु गाम सँ बाहर मैदान तक एक पेरिया रस्ता, कच्ची-पक्की सब उपयोग मे अबैत छल। भैर पेट जखन खाय गाय-महिस-बरद-बकरी-भेड तखन मुनहाइर साँझ तक फेर सब […]

मिथिला आन्दोलनः आलोचना सँ सीखबाक जरुरत

मिथिला आन्दोलनः आलोचना सँ सीखबाक जरुरत

नेता बिन्देसरक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी (अक्टुबर ४, २०१३ मे लिखल एक कथा) बिन्देसर बच्चे सऽ बड कुशाग्र बुद्धिक छल। मिडिल स्कूलमें पढैत समयसँ कालिजके पढाइ तक परीक्षाक फीस, ट्युशनक फीस, बटखर्चा, पुस्तक कीनबाक खर्च आ सभ बात के इन्तजाम लेल ओ माता-पितासँ पाइ नहि लऽ अंडी फर तोडि आ सुखाय अंडी बिया बेचि, […]

मिथिला समाजक क्रूर सच्चाईः वर बाहरे कमेनिहार चाही

मिथिला समाजक क्रूर सच्चाईः वर बाहरे कमेनिहार चाही

बियाहक लेल  – राम कुमार मिश्र कोलकाताक पार्कस्ट्रीट में एक मित्रक बाट जोहैत रही, बगलमें बाघ सन बिलायती कुकुरक सिक्करि धेने एक पांच हाथक नवकबेर मोबाइल पर मैथिलीमें गप्प करैत छलाह, गप्प शेष भेलाक बाद पुछि देलियैन्ह, “की नाम भेल अपनेक बाऊ ?” ! अपन नाम गुजन कमती आ मधुबनी जिलाक एकटा गामक नाम कहला, […]