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कतय जा रहल अछि मानव

कतय जा रहल अछि मानव

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी आदरणीय माय!   अहाँक ई कविता मानव संसारक अधुनातन अवस्था मे पुरान संस्कृति केँ जियल लोकक वितृष्णा केँ जहिनाक तहिना राखि रहल अछि। एक बेर हमरो पाठक लेल डा. शेफालिका वर्माक ई कविता केँ पढबाक लेल कौपी कय केँ अपन विचारक संग सम्प्रेषित कय रहल छी –   नहि जानि […]

आजुक मैथिलानी अपन गृहस्थी आ बाल-बच्चाक पालन पोषण केना करथि (विज्ञ विचार)

आजुक मैथिलानी अपन गृहस्थी आ बाल-बच्चाक पालन पोषण केना करथि (विज्ञ विचार)

लेख – स्नेहा प्रकाश ठाकुर जतय चाह ओतय राह “अहाँ केना मैनेज करैत छी ?” ई प्रशन हमरा स अनगिनत बेर पूछल जा चुकल अछि । और हर बेर हम ईहे जवाब दैत छी जे हम एक टा औरत छी और माँ भी, हम किछुओ कय सकैत छी । एक टा औरत खुद भी अपन […]

योग्यता आ शुचिता पर प्रवीणक दृष्टि-विचार

योग्यता आ शुचिता पर प्रवीणक दृष्टि-विचार

दृष्टि-विचार – योग्यता आ शुचिता – प्रवीण नारायण चौधरी   कर्मकांड मे कोनो निश्चित कर्म लेल के योग्य आ के अयोग्य होइछ तेकर कय तरहक सीमांकन-पृष्ठांकन आदिक बात जेठ-श्रेष्ठ-विद्वान् कर्मकांडी लोकनि केर मुंहे सुनैत छी। स्वयं सेहो कर्त्ता बनि पिताक मृत्योपरान्त श्राद्धकर्म सँ लैत एकोदिष्ट कर्म, पारवन कर्म, तर्पण, आदि करैत छी।   दरभंगा उर्दू […]

हड़बड़ी मे गड़बड़ी कि संवेदनहीनताक पराकाष्ठा छल मैथिल महिला समाजकः वाणीक प्रश्न

हड़बड़ी मे गड़बड़ी कि संवेदनहीनताक पराकाष्ठा छल मैथिल महिला समाजकः वाणीक प्रश्न

विचार – वाणी भारद्वाज बदलैत समाज आ संवेदनशीलता ई सर्वव्याप्त भ रहल अछि जे समाज के प्रारुप आधुनिकता के आवरण मे अपना केँ लिपटैत जा रहल अछि. धीरे धीरे भयावहता दिश बढल जा रहल अछि. संगहि ईहो कहब जे महिला पहिने के अपेक्षा बेसी सशक्त भेल जा रहल छथि. पहिनो महिला सब बहुत गुणी होइतो […]

मिथिलानी लोकनिक विद्वत् चर्चा – दहेज मुक्त मिथिला समूह पर

मिथिलानी लोकनिक विद्वत् चर्चा – दहेज मुक्त मिथिला समूह पर

विद्वत् चर्चा आ विषय-विमर्श संयोजकः वंदना चौधरी, समूहः दहेज मुक्त मिथिला (फेसबुक समूह) वंदना चौधरीः सुप्रभात सब गोटे के। आय एकटा विषय दैत छी, जाहि पर अहाँ सब अपन-अपन विचार कम सँ कम १० लाइन में लिखू से आग्रह। विषय अछि आधुनिक शिक्षा, नीक या बेजाय, एकर कारण और परिणाम की? विचार बेसी लंबा और […]

सकारात्मकता केर अनुकरण – एकटा टटका-टटकी उदाहरण

सकारात्मकता केर अनुकरण – एकटा टटका-टटकी उदाहरण

२१ अगस्त २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! विचार – वाणी भारद्वाज  सकारात्मकता के अनुकरण – ई भेल असल अभियान सकारात्मकता के अनुकरण केला सं कोना नकारत्मकता कम भऽ सकैत छैक …. तकर एक गोट टटका उदाहरण प्रस्तुत क रहल छी. एक टा चारि साल पुरान ग्रुप छल, ओहि मे जगह-जगह के लोक जुड़ल, ग्रुप बढय लागल. देश […]

मैथिल समाजक वर्तमान परिस्थितिः कइएक महत्वपूर्ण पक्ष पर आत्मचिन्तनक जरूरत

मैथिल समाजक वर्तमान परिस्थितिः कइएक महत्वपूर्ण पक्ष पर आत्मचिन्तनक जरूरत

विचार-विमर्श – अपर्णा झा – हाल दिल्ली सँ मैथिली मे अपन मातृभूमि सँ प्रेम आ लगाव अनुरूप दहेज कुप्रथा व अन्य सामाजिक कमी-कमजोरी पर विचार प्रेषित करैत मैथिल समाज : आजुक परिस्थिति में (एकटा चर्चा जाहि में समूहक बेसी सs बेसी सदस्य से हुनक टिप्पणी अपेक्षित) आय काल्हि विवाह में एकटा नव ट्रेंड शुरू भs […]

१७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन – “मात्र नाम केर नहि, काजहु केर!”

१७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन – “मात्र नाम केर नहि, काजहु केर!”

बस मोन बनाउ, सफलता दूर नहि अछि   सन्दर्भः १७म अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन – “मात्र नाम केर नहि, काजहु केर!”   एक अध्ययनशील छात्र जेकाँ हम पूरा प्रयास केलहुँ जे अध्ययन सँ किछु खोजिकय निकाली आर अपन मैथिलीभाषाभाषी द्वारा जतय कतहु अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन हुअय तेकरा विश्व भरि मे प्रचलित एकटा निश्चित पैटर्न पर चलबाक […]

अपना सँ पैघ सर्जक केर अनुकरण करैत छी, नव लेखिका केँ प्रोत्साहनक जरूरतः ममता झा

अपना सँ पैघ सर्जक केर अनुकरण करैत छी, नव लेखिका केँ प्रोत्साहनक जरूरतः ममता झा

विचार – ममता झा कोनो आदमी जन्म सँ न मूर्ख होइयऽ आ ने विद्वान्। बच्चा केर देख-रेख मे सब पैघ केर हाथ होइत छैक। ओहि मे परिवार, समाज दुनू केर बहुत पैघ योगदान होइत छैक। सब बच्चा रंग, रूप, व्यवहार, पद, प्रतिष्ठा मे अलग-अलग होइयऽ। सब चाहैत छैक जे संतान खूब पैघ लोक बनय, लेकिन […]

बधाई शुभकामना आह वाह सँ आगू विमर्श-विचार कहिया होयत – बालमुकुन्द केर प्रश्न

बधाई शुभकामना आह वाह सँ आगू विमर्श-विचार कहिया होयत – बालमुकुन्द केर प्रश्न

विचार – बालमुकुन्द विरोध व्यक्ति सँ अछि वा सिस्टम सँ ? किछु दिन पूर्व सँ, जखन सँ साहित्य अकादमी द्वारा बाल आ युवा पुरस्कारक घोषणा कएल गेल अछि, तखन सँ पुरस्कार आ पुरस्कृत पोथी सँ फाजिल पुरस्कारक निर्णायक मंडल (ज्यूरी) विमर्शक केन्द्र मे छथि। विमर्श होएबाको चाही, तकर स्वागत करैत छी तथापि विमर्श जाहि आधार […]

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