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कि जातिवाद आ वर्गवादक अन्त संभव अछि?

कि जातिवाद आ वर्गवादक अन्त संभव अछि?

विचार-मंथन – प्रवीण नारायण चौधरी नर आ बानर – विज्ञानक कहब छैक जे बानरहि सँ नर केर विकास भेल अछि। नर केर आदम पुरुष बानर छल। विकासक्रम मे बानर जखन सभ्य भेल त नर केर रूप मे परिणति पाबि गेल। जखन कि सामान्य तर्कबुद्धि सँ हम सब बुझि रहल छी जे बानर एक जानवर थिक, […]

महापात्र ब्राह्मण समुदायक ऋणी अछि हिन्दू मैथिलजन

महापात्र ब्राह्मण समुदायक ऋणी अछि हिन्दू मैथिलजन

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी महापात्र ब्राह्मण केँ ओछ-तुच्छ बुझब महाभूल थिक आइ सँ दुइ वर्ष पूर्व श्री प्रभाकर झा अपन एक गोट लेख हिन्दी मे मिथिलाक महापात्र समुदाय पर केन्द्रित किछु रास ऐतिहासिक सन्दर्भ जोड़िकय लिखने रहथि। मिथिला सँ सम्बद्ध कोनो लेख-रचना केँ यथासंभव मैथिली मे अनुवाद कय केँ प्रकाशित करैत छी, मुदा समयक […]

नेपाल मे आंगुर पर गानय योग्य भत्ताभोगी व्यक्ति मैथिलीक विरोध मे कुतर्क कियैक करैत अछि

नेपाल मे आंगुर पर गानय योग्य भत्ताभोगी व्यक्ति मैथिलीक विरोध मे कुतर्क कियैक करैत अछि

नेपाल मे मैथिलीक विरोध लेल एकटा खास भत्ताभोगी वर्ग सक्रिय केकरो नाम लेनाय त उचित नहि अछि परञ्च ई बात लिखब आवश्यक अछि जे आंगुर पर गानल किछु लोक भिन्न-भिन्न नाम सँ आईडी बनाकय मैथिली भाषाक सम्बन्ध मे गलत अफवाह आ कुतथ्य केर प्रसार कय अपना केँ पोल्हा रहल अछि। ओ ई बुझैत छैक जे […]

मिथिला रत्न केर खोज लेल वृहत् सहकार्यक आवश्यकता

मिथिला रत्न केर खोज लेल वृहत् सहकार्यक आवश्यकता

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिला रत्न किनका मानल जाय   सामान्यतया अपन मिथिला सभ्यता लेल मूल्यवान् योगदान देनिहार व्यक्तित्व केँ ‘मिथिला रत्न’ कहल जा सकैत अछि। मुदा विगत कतेको समय सँ ‘मिथिला रत्न’ उपाधि सँ सम्मान प्रदान करबाक कार्य पर कइएक प्रकारक सवाल ठाढ़ कयल जेबाक कारणे हमहुँ दुविधा मे पड़ि गेल छी जे […]

दिल्ली विश्वविद्यालय मे मैथिलीक पढौनी पर भटकल आलोचना छन्हि प्रो. अपूर्वानन्द केर

दिल्ली विश्वविद्यालय मे मैथिलीक पढौनी पर भटकल आलोचना छन्हि प्रो. अपूर्वानन्द केर

२२ अक्टूबर २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! दिल्ली विश्वविद्यालय मे मैथिलीक पढौनी पर भटकल आलोचना छन्हि प्रो. अपूर्वानन्द केर   अपूर्वानन्द (दिल्ली विश्वविद्यालयक हिन्दी विभाग मे कार्यरत एसोशियेट प्रोफेसर) केर लेख “डीयू में मैथिली? राजनीति में इस्तेमाल की चीज रह गई है भाषा’ शीर्षक केर लेख पढल। कय बेर पढिकय हुनकर सब बात बुझबाक चेष्टा कयल। श्री […]

आत्मनिरीक्षण – बाबाधामक पेड़ा (प्रसाद)

आत्मनिरीक्षण – बाबाधामक पेड़ा (प्रसाद)

आध्यात्मिक चिन्तन – प्रवीण नारायण चौधरी आत्मनिरीक्षण – बाबाधामक पेड़ा (प्रसाद)   कइएक दिवस सँ दिमाग मे एकटा बात अबैत अछि – प्रवीण! तोरा स्वयं मे कतेक अभिमान छौक आ तूँ दोसर अभिमानी केँ देखैत देरी कतेक जल्दी उताहुल भऽ अपन अभिमान केँ उजागर करय लगैत छँ से कहियो आत्मनिरीक्षण कयलें? ई सवाल अपना आप […]

बुरबक बेटा टक्के काबिल – पवन कुमार झा ‘अग्निबाण’ केर प्रखर विचार पर प्रतिविचार

बुरबक बेटा टक्के काबिल – पवन कुमार झा ‘अग्निबाण’ केर प्रखर विचार पर प्रतिविचार

विचार – पवन कुमार झा ‘अग्निवाण’ बुरबक बेटा टक्के काबिल मैथिल आ मिथिला के अवनति में सामूहिक सोच के विपरीत व्यक्तिगत सोच के अधिक प्रभाव छै. संभव छै हम गलत छी लेकिन हमर अपन अनुभव अछि जे मिथिला में जे कोनो तरीका स पाई कमा ललक तकरे टा पूछ छै आ एयेह समाज के पतनशील […]

सनकेनिहार-बहकेनिहार लोकक कुचक्र मे पड़ि गेल एक काज केनिहार – प्रसंग बालमुकुन्द-चेतना समिति

सनकेनिहार-बहकेनिहार लोकक कुचक्र मे पड़ि गेल एक काज केनिहार – प्रसंग बालमुकुन्द-चेतना समिति

प्रिय बालमुकुन्द जी,   बहुत दुखदायी निर्णय अछि अहाँक, एकटा प्रतिष्ठित संस्थाक माध्यम सँ अहाँक विलक्षण प्रतिभासम्पन्न योगदान देबाक क्रम अहाँ स्वयं भंग कय रहल छी अथवा कय लेलहुँ। चढेला-बढेला पर एहि तरहक निर्णय कयल अथवा ई आत्मविवेक सँ कयल, से द्वंद्व मे हम नहि पड़ब। निर्णय गलत भेल से कहब। शुरुओ मे कहने रही, […]

की, हम वैश्विक साहित्य, राजनीति, संस्कृति वा कोनो अन्य गतिविधि पर अपन विचार रखबा लेल प्रतिबंधित छी ?

की, हम वैश्विक साहित्य, राजनीति, संस्कृति वा कोनो अन्य गतिविधि पर अपन विचार रखबा लेल प्रतिबंधित छी ?

विचार-संग्रह २६ सितम्बर २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ सँ किछु महत्वपूर्ण विचार सब केँ संग्रह करबाक लेल पुनः फेसबुक आ सामाजिक संजालक अन्य स्रोत सँ मैथिलीक गोटेक उत्कृष्ट लेख केँ समेटब आरम्भ कय रहल छी। एहि क्रम मे आजुक प्रस्तुति श्री ईशनाथ झा, ग्राम – नरुआर, जिला मधुबनी सँ लेल जा रहल अछि। ई फेसबुक सँ […]

लिखनाइ आ लेखक भेनाइ दुइ अलग प्रक्रिया थिक, मैथिली लिखनिहार लेल किछु सुझाव

लिखनाइ आ लेखक भेनाइ दुइ अलग प्रक्रिया थिक, मैथिली लिखनिहार लेल किछु सुझाव

किछु सुझाव – अजित आजाद लिखनाइ आ लेखक भेनाइ, दुनू अलग-अलग प्रक्रिया थिक। शुद्धि-अशुद्धिक चिंता कयने बिना अरबो लोक लिखि रहल छथि मुदा ओ लेखक नहि छथि। मोनक बात अथवा विचार लिखबा काल अहाँ जेना बजैत छी, तेना लिखू। गाम-घर मे अधिसंख्य लोक अपन परिचित केँ चिट्ठी-पुर्जी कोना लिखैत अछि, गौर करबै। एहि मे शुद्धिक […]

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