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दिल्ली विश्व पुस्तक मेलामे मैथिली पर किसलय विचारः मस्ट रीड स्टोरी

दिल्ली विश्व पुस्तक मेलामे मैथिली पर किसलय विचारः मस्ट रीड स्टोरी

विचार – किसलय कृष्ण, समाचार सम्पादक, मैथिली जिन्दाबाद, नव दिल्ली । विश्व पुस्तक मेलामे मैथिली : एकगोट सकारात्मक पहल   सम्प्रति नई दिल्लीक प्रगति मैदानमे आयोजित विश्व पुस्तक मेलामे मैथिली मचानक धम्मकसँ जतबे उत्साह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रमे रहनिहार मिथिलावासी पोथीप्रेमी आ अभियानीमे देखल जा रहल अछि, ततबे जिज्ञासा आ प्रसन्नता दिल्लीसँ दूर रहनिहार मैथिलीक कलमजीवी […]

विद्यापति समारोहक आयोजनः सन्दर्भ मैथिली आन्दोलन

विद्यापति समारोहक आयोजनः सन्दर्भ मैथिली आन्दोलन

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी   वर्तमान मिथिला लोकपलायन समान भयावह रोगक पीड़ासँ व्यथित अछि। मिथिला समाजक दूरदृष्टिसंपन्न वेत्ता लोकनि एहि रोगक संक्रमणकालहि सँ जनजागरणक प्रयास करब शुरु कयलनि, परञ्च ओ किछेक प्रयास देशक परतंत्रताक दुरावस्थाकेँ दूर करबाक संघर्षक आगाँ कोनो विशेष भूमिका नहि निमाहि सकल से कहि सकैत छी। भारतक स्वतंत्रता संग्राममे मिथिला अपन […]

लोभ सब पापक मूल होएछ, धनलोभीक जीवन मे सुख असंभव

लोभ सब पापक मूल होएछ, धनलोभीक जीवन मे सुख असंभव

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी लोभ सब पापक मूल कारण (लोकहित मे जारी)   एक गोट धनलोभी दोसर सम्पन्न लोक सँ बहुत डाह करय, डाहक अर्थ स्पष्ट रहैक जे सम्पन्न व्यक्तिक सम्पन्नता ओहि धनलोभी केँ बहुत खटकैत छलैक। ई बात सम्पन्न लोक बुझैक आर ओहि धनलोभी केँ बुझबैक – ओ कहैक, “देखू! धनक लोभ सँ […]

मंगरौनी गाम मिथिलाक प्राचीन धरोहरः आइएएस गजानन मिश्र

मंगरौनी गाम मिथिलाक प्राचीन धरोहरः आइएएस गजानन मिश्र

विचार – गजानन मिश्र, भा. प्र. से. (वर्तमानः पटना) मंगरौनी (मधुबनी) मिथिला मे नव्य न्याय केर प्रवर्तक छलाह गंगेश उपाध्याय। हिनक ग्रन्थ न्याय-तत्वचिन्तामणिक आधार पर एतय नव्य न्याय केर आरम्भ भेल। पंजी अभिलेख सँ ई संकेत भेटैत अछि जे गंगेश मंगलवनी अर्थात मंगरौनी केर वासी छलाह। पंजी अभिलेख मे गंगेश हेतु दू टा उपाधि – […]

दहेज प्रथाक प्रश्रय सम्पन्न वर्ग द्वारा – देखादेखी सब वर्ग भेल रोगग्रस्त

दहेज प्रथाक प्रश्रय सम्पन्न वर्ग द्वारा – देखादेखी सब वर्ग भेल रोगग्रस्त

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी दहेज प्रथाक बढावा देनिहार के? सच्चाई ई छैक जे दहेज प्रथा मिथिला मे उच्च-सम्भ्रान्त कहेनिहार आडंबरी लोकक किरदानी सँ आइ पूरे समाज मे कोढि-कुष्ठी जेकाँ पसैर गेल अछि। अगबे नगदी व्यवस्था आ कि गाड़ी-घोड़ा, साँठ-सूँठ आ कि गहना-गुड़िया, टीवी, सूट, साड़ी, सन्दूक, पलंग, फ्रीज या फल्लाँ-चिल्लाँक मांगहि टा दहेज नहि – […]

विद्यापति स्मृति मे जुड़ल अभियानी संग मंत्रणा

विद्यापति स्मृति मे जुड़ल अभियानी संग मंत्रणा

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी ईहो बात कनी ध्यान सँ बुझियौक   विद्यापति केर स्मृतिगान साक्षात् कृपालु देवाधिदेव महादेवक गान समान होएत अछि, एकर प्रत्यक्ष अनुभव हम स्वयं अपन जीवन मे करैत आबि रहल छी। लेकिन,   १. विद्यापतिक स्मृति मे केवल गाना-बजाना करब सारा मेहनति पर पानि फेरब होएछ।   २. साक्षात् कवि शिरोमणि […]

किरणजीक जयन्ती-दिवस पर एक महत्वपूर्ण विचार – प्रेरणा सँ भरल प्रणेताक भावना

किरणजीक जयन्ती-दिवस पर एक महत्वपूर्ण विचार – प्रेरणा सँ भरल प्रणेताक भावना

परिचय एक महत्वपूर्ण संस्थाकः प्रेरणास्रोत मैथिलीक वरिष्ठ सर्जक लोकनि – उदयचन्द्र झा ‘विनोद’ मैथिल समाज, रहिका बिहारक मधुबनी जिलाक एक महत्वपूर्ण संस्था थिक जे आइ पैंतालिस वर्ष सँ अव्याहतरूपेण भाषा साहित्यक विकासात्मक अभियान मे अपन यत्किंचित योगदान दैत आयल अछि। ई एही संस्थाक प्रताप थिक जकर तत्वावधान मे गत पचहत्तरि इसबीक आपातकाल मे धरती पर […]

कि मैथिलीक बदला हिन्दी या अंग्रेजी झाड़नाय मिथिलावासीक कोनो विशेष रोग थिक?

कि मैथिलीक बदला हिन्दी या अंग्रेजी झाड़नाय मिथिलावासीक कोनो विशेष रोग थिक?

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी कि हिन्दी-अंग्रेजी बेसी झाड़नाय कोनो बीमारी थिक? (बीमारी सँ वरदान धरिक दृष्टान्त)   अपना सब ओतय एक फैशन अछि, जतेक हिन्दी, अंग्रेजी झाड़ब – अपना लागत जे हम बड होशियार आ बुधियार छी…. कारण अलबटाह जेकाँ लोक सब मुंहे ताकैत रहि जायत, बुझलक नहि बुझलक धरि मुंह ताकय लागल त […]

कि करय नवोदित मैथिली गायक-कलाकार, ब्रान्डिंग लेल कि उपाय?

कि करय नवोदित मैथिली गायक-कलाकार, ब्रान्डिंग लेल कि उपाय?

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी एखनहि न्युज फीडलाइन मे Madan Muskan जी केर किछु सवाल देखलहुँ – मुख्य रूप सँ ओ नव कलाकार केँ सेहो मौका देबाक लेल आयोजनकर्ता लोकनि सँ आग्रह कयलनि अछि। शिकायत सेहो छन्हि जे आखिर मैथिली मे गायन कयनिहार पाँचे गोटा छथि जे हर मंच पर हुनके सभ केँ मौका देल […]

दृष्टिदोषः आँखि परका पट्टी

दृष्टिदोषः आँखि परका पट्टी

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी आँखि परका पट्टी   लोक केँ लोक कहैत सुनैत होयब, “हौ! तोरा आँखि पर पट्टी लागल छह कि? ” यानि सच्चाई देखि नहि सकैत छह कि – यैह भाव रहैत छैक कोनो वक्ताक राखल पक्षपातपूर्ण या एकतर्फा विचार सुनिकय। महाभारतक धृतराष्ट्र एक एहेन पात्रक भूमिका कयलनि जे अपन पुत्रक मोह […]

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