Home » Archives by category » Article » Philosophy (Page 3)

श्रीरामचन्द्रजी समान दयानिधान स्वामी कतहु नहि भेटतः रामचरितमानस सँ सीख – १६

श्रीरामचन्द्रजी समान दयानिधान स्वामी कतहु नहि भेटतः रामचरितमानस सँ सीख – १६

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – १६ आइ महाकवि तुलसीदासजी रामचरितमानस मे सेवक आर स्वामीक सम्बन्ध मे भक्तिक महत्व पर प्रकाश देलनि अछि। ई लोक हो अथवा परलोक हो, सेवक भाव सँ स्वामी प्रति समर्पण केर महत्व बहुत पैघ छैक। सेवक केर प्रेम आ समर्पण केर महत्व बहुत बेसी होएत छैक। बाकी ओकर कमजोरी, ओकर दुर्गुण, […]

कलियुग मे राम नाम कल्पवृक्ष थिक – नामक महत्वः रामचरितमानस सँ सीख – १५

कलियुग मे राम नाम कल्पवृक्ष थिक – नामक महत्वः रामचरितमानस सँ सीख – १५

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – १५ आइ पंद्रहम भागक रामचरितमानस सँ सीख मे महाकवि तुलसीदास अति रमणीय उपमा सहित भगवान राम केर नामक प्रभाव कहलैन अछि। भक्त व आस्थावान् लेल भगवन्नाम मात्र कल्याणक मार्ग थिक। नाम जप सँ किनका-किनका कोना-कोना लाभ भेटल, एहि तथ्य केँ उजागर करैत हमरो सब लेल कल्याणक मार्ग प्रशस्त करैत अछि […]

राम सँ पैघ राम केर नाम – तुलसीदास जी केर अति सुन्दर आ मननीय आ अनिवार्य पठनीय तर्क

राम सँ पैघ राम केर नाम – तुलसीदास जी केर अति सुन्दर आ मननीय आ अनिवार्य पठनीय तर्क

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – १४ आजुक १४म भाग केर रामचरितमानस सँ सीख शृंखला मे बड पैघ महत्वपूर्ण बात सोझाँ आयल अछि। कतेको जगह सुनैत रहैत छी हम सब – “राम से बड़ा राम का नाम” अर्थात् राम सँ पैघ होएछ राम केर नाम, यानि नाम केर प्रभाव स्वयं सगुण राम जिनकर जीवन लीला पर […]

नाम केर महत्व पर प्रकाशः रामचरितमानस सँ सीख – १३

नाम केर महत्व पर प्रकाशः रामचरितमानस सँ सीख – १३

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – १३ आइ रामचरितमानस केर तेरहम भाग मे नाम केर महत्व कतेक पैघ अछि ताहि पर महाकवि तुलसीदासजी द्वारा सुन्दर वर्णन भेटल अछि। एहि मे एकठाम महाकवि अपन बुझाइ मे नाम केँ ब्रह्म सँ सेहो उच्च स्थान देलनि अछि। बहुत सहज रहितो ई दर्शन आमजन केर समझ सँ ऊपर होयत ई […]

नाम आ नामी मे स्वामी आ सेवक केर संबंधः रामचरितमानस सँ सीख – १२

नाम आ नामी मे स्वामी आ सेवक केर संबंधः रामचरितमानस सँ सीख – १२

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – १२ आजुक स्वाध्याय मे नाम आ रूप केर बीच बड नीक चिन्तन केँ महाकवि तुलसीदास जी स्थापित करैत निर्णय देलनि अछि जे हम सब सदा-सदा लेल अपन मुखरूपी दरबज्जाक चौखैट यानि जिह्वा पर एहि राम नाम केर दीपक केँ जराकय राखी। हमर देह सिहरैत अछि जखन महाकविक भावरूप दोहा सब […]

मनन योग्य बातः आत्महत्या करब कतेक पैघ मूर्खता

मनन योग्य बातः आत्महत्या करब कतेक पैघ मूर्खता

स्वाध्याय संकलनः कल्याण वर्ष ९१ संख्या ४ सँ, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी मननीय बातः आत्महत्या केहेन मूर्खता पूर्वकाल मे काश्यप नामक एक बड़ पैघ तपस्वी एवम् संयमी ऋषिपुत्र छलाह। हुनका कोनो धनमदान्ध वैश्य द्वारा अपन रथक धक्का सँ गिरा (खसा) देलकनि। गिरला सँ काश्यप बड़ा दुखी भेलाह आर क्रोधवश अपना आपसँ बाहर होएत कहय लगलाह […]

सीता आ राम अभिन्न छथि – बेर-बेर ‘सीताराम’ केँ प्रणाम करीः रामचरितमानस सँ सीख-१०

सीता आ राम अभिन्न छथि – बेर-बेर ‘सीताराम’ केँ प्रणाम करीः रामचरितमानस सँ सीख-१०

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – १० सियाराममय सब जग जानी, करहुँ प्रणाम जोड़ि जुग पाणी!! आजुक स्वाध्यायक ई दसम् भाग अति विशिष्ट अछि। हमरा सब लेल बहुत रास वांछित कर्म निर्दिष्ट अछि। रामचरितमानस सँ सीख – १०   १. गंगाजी मे स्नान केला सँ आर जल पीबय सँ पापक हरण होएछ और सरस्वतीजी गुण तथा […]

श्रेष्ठक आशीर्वाद आ सभक सहयोग सँ कीर्ति निर्माण कार्य करबाक चाहीः रामचरितमानस सँ सीख-९

श्रेष्ठक आशीर्वाद आ सभक सहयोग सँ कीर्ति निर्माण कार्य करबाक चाहीः रामचरितमानस सँ सीख-९

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – ९ सीताराम चरित अति पावन, मधुर सरस अरु अति मनभावन – आजुक ९वम भाग केर रामचरितमानस सँ सीख एहि सुन्दर स्मरण सँ कय रहल छी। एहि सँ पूर्व ८ भाग पाठक लोकनिक बीच काफी लोकप्रियता हासिल कय रहल अछि। सब पाठक सँ निवेदन अछि जे मैथिली जिन्दाबाद पर राखल जा […]

पुलक सहारे बड़का-बड़का नदी छोट चुट्टी सेहो पार कय लैछ, ऋषि-मुनि द्वारा भक्तिक पुल सब लेल

पुलक सहारे बड़का-बड़का नदी छोट चुट्टी सेहो पार कय लैछ, ऋषि-मुनि द्वारा भक्तिक पुल सब लेल

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – ८   रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम! ईश्वर अल्लाह तेरे नाम, सबको सम्मति दे भगवान्!!   महात्मा गाँधीक एहि महावाक्य संग पुनः आइ रामचरितमानस सँ शिक्षाक आठम् भाग अपने सभक सोझाँ राखि रहल छी। विश्वास अछि जे क्रम मे एकर सब भाग अपने लोकनि ग्रहण कय रहल होयब। […]

रामचरितमानस सँ सीख – ७

रामचरितमानस सँ सीख – ७

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – ७ विप्र धेनु सुर संत हित, लिन्ह मनुज अवतार। निज इच्छा निर्मीत तनु माया गुन गोपार॥ १. मणि, माणिक और मोती केर जेहेन सुन्दर छवि छैक ओ साँप, पर्वत आर हाथीक माथ पर ओतेक शोभा नहि पबैत छैक जतेक कि राजाक मुकुट आर नवयुवती स्त्रीक शरीर केर संसर्ग पाबि ई […]