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Yog Ki Thik: Geetaa

Yog Ki Thik: Geetaa

औझका प्रसाद (Today’s Bliss): (पुनरावृत्ति – जुन २०१२ उपरान्त) अनुरोध: एक बेर मे पढला पर कम बुझायत, दोसर बेर ताहि सँ बेसी, तेसर बेर आरो बेसी आ बेर-बेर पढब तऽ अमृतपान करब समान अनुपम अभीष्टक प्राप्ति होयत। तैँ, कनेक मन थिर कऽ के आजुक साधना – स्वाध्याय करब। बहुत अनुपम प्रसाद थी ई: (योग करब […]