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हम शिव छी, हम शिव छी!! शिवोहं शिवोहं!!

हम शिव छी, हम शिव छी!! शिवोहं शिवोहं!!

निर्वाणषट्कम् मनोबुध्यहंकार चिताने नाहं । न च श्रोतजिव्हे न च घ्राणनेत्रे । न च व्योमभूमी न तेजू न वायु । चिदानंदरुप शिवोहं शिवोहं ॥ १ ॥ हम मन, बुद्धि, अहंकार आर स्मृति नहि छी, नहिये हम कान, जिह्वा, नाक वा आँखि छी। न हम आकाश, भूमि, तेज आ वायुए छी, हम चैतन्य रूप छी, आनंद छी, शिव छी, शिव […]

नचारी: रूसल भंगिया हमार

नचारी: रूसल भंगिया हमार

(लोकगीत संकलन सँ: साभार रामचन्द्र सिंह, महिया, दरभंगा) रूसल भंगिया हमार, मनाय दऽ गौरी शिव जोगिया के शिव जोगिया के होऽ – शिव भंगिया केऽऽऽऽ – २ रूसल भंगिया हमार…………….. खुआ मलीदा शिव के मनहु न भावे – २ भाँग धथुरा देखि मन ललचाये – होऽऽ – भाँग धथुरा देखि मन ललचाये! भाँग धथुरा कहाँ […]

चराचर जगत्पति सहस्रशीर्ष पुरुष प्रति समर्पित: स्वाध्यायांश

चराचर जगत्पति सहस्रशीर्ष पुरुष प्रति समर्पित: स्वाध्यायांश

स्वाध्याय (आध्यात्मिक वृत्तांत) पवित्र चतुर्मास मे पुरुष सूक्तक नित्य पाठ जरुर करबाक बात कैल गेल अछि। मैथिल हिन्दू जनमानस मे समस्त कर्म करबा मे पुरुष सूक्त केर उपयोगिता सर्वमान्य अछि। ओना तऽ शौचादि सँ निवृत्त होइत स्नानादिक उपरान्त एकर विशेष लाभ होयत, लेकिन आजुक कलियुग आ खास कऽ के जखन लोक फेसबुक आदि लसैड़ सँ […]

अहुँ केँ चाही सोना?

अहुँ केँ चाही सोना?

नैतिक कथा – उपनिषद् (अनुवाद: प्रवीण नारायण चौधरी) कोनो जंगल मे एकटा स्वर्णशिला पड़ल छल। दुइ गोट घुड़सवार ओतय आबि गेल। चूंकि दुनू गोटा एक्के समय पहुंचल छल, ताहि हेतु दुनू ओहि स्वर्णशिला पर अपन-अपन अधिकार जतौलक। पहिले वाक् युद्ध भेलैक और अंततः तलवार खिंचा गेलैक। क्षणे भरि पहिल तक दुनू एक-दोसर केँ जानितो तक नहि छल। […]

रमजान आ गर्मीक आतंक

रमजान आ गर्मीक आतंक

गर्मीके कहर आ रमजान – आलेख बिन्देश्वर ठाकुर, कतार। हमर देश नेपाल । हम एक नेपाली । हमर काज कर’ बला मूलुक कतार । अहिठाँ हमरा लगायत बहुतो नेपाली आ अन्य देशके कामदार सब अपन रोजगारी लेल आएल छै । वास्तविक कही त ई एकटा मुस्लीमप्रधान देश छै । तें मुस्लीम सबहक बाहुल्यता होएब स्वभाविक […]

एकाग्रता कोना साधब: विनोबा भावे

एकाग्रता कोना साधब: विनोबा भावे

आलेख (भावानुवाद) – प्रवीण नारायण चौधरी संसार भरिक वेत्ता लोकनि श्रीमद्भागवद्गीता केँ अध्ययन-मनन आ तदनुसार प्रवचन करैत रहला अछि। एहि पाँति मे आचार्य विनोबा भावे केर स्थान अग्रस्थान मे पड़ैत अछि। हिनक रचना ‘गीता-प्रवचन’ केर एकटा अलगे महिमामंडन इतिहास द्वारा कैल जाइछ आ जे कियो हिनक एहि अमर रचना केर रसास्वादन करैत छथि हुनको जीवन […]

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस आ मिथिला योगीश्वर लक्ष्मीनाथ गोसाईं

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस आ मिथिला योगीश्वर लक्ष्मीनाथ गोसाईं

राहुल – जय हो बन्गाम, सहरसा। जुन २१, २०१५. पहिल अन्तराष्ट्रीय योग दिवस केर अवसर पर मिथिलाक योगी श्री श्री 108 संत कवि लक्ष्मीनाथ गोसाईं जीक योगी होयबाक तथ्य राखि रहल छी। ई मैथिली अकादमी सं प्रकाशित डॉ. फुलेश्वर मिश्र जी रचित संत कवि लक्ष्मीनाथ गोसाईं किताब सँ उद्धृत अछि। सुप्रसिद्ध कवि-उपन्यासकार बैद्यनाथ मिश्र “यात्री” […]

धर्म दर्शन: ॐ तत्सत्

धर्म दर्शन: ॐ तत्सत्

ॐ तत्सत् मीमाँसा ॐ, तत् आ सत् – ब्रह्म केर परिचायक यैह तीन नाम – एहि तीन सँ ब्रह्म, वेद आ यज्ञक भान होइत अछि। भगवत् भजन, दान आ तप – शास्त्रीय वचनानुसार आ वेदानुसार, शुरुआत ‘ॐ’ सँ कैल जाइछ। तहिना ‘तत्’ केर उद्घोष, बिना कोनो प्राप्तिक इच्छा, विभिन्न पूजा-कर्म, तप आ दान करनिहार केँ […]

ई केहेन पैघ लोक?

ई केहेन पैघ लोक?

नैतिक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी पैघ लोक केर परिभाषा ओना तऽ बड सहज छैक जे पैघत्व केँ धारण करय से पैघ भेल, मुदा पैघ कहेनिहार अपन निज भान सँ जँ पैघ बनि जाय तऽ ओकर पैघत्व पर प्रश्न चिह्न लागि जाइत छैक इहो यथार्थ आ व्यवहारिक जगत् केर सत्य थिकैक। उच्च जाति वा कुल-मूल […]

जीवनचर्या-सम्बन्धी उपदेश – श्रीउमामहेश्वरजीके जीवन-दर्शन

जीवनचर्या-सम्बन्धी उपदेश – श्रीउमामहेश्वरजीके जीवन-दर्शन

आलेख: आध्यात्मिक चेतना तथा स्वाध्याय एक बेर पार्वती माता भगवान्‌ शिवसँ जीवनमें पालनीय आचारके सम्बन्धमें निवेदनपूर्वक जिज्ञासा कयलन्हि। एहिपर शिवजी देवी पार्वतीकेँ जीवनके सफल बनाबय के लेल विस्तारसँ जे बात बतौलन्हि, ओकर किछु अंश एतय प्रस्तुत अछि जे अत्यन्त उपयोगी सेहो अछि – गृहस्थक धर्म आ गृहस्थाश्रमके श्रेष्ठता – गृहस्थकेर परमधर्म होइछ जे कोनो जीवके […]