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शिव चालीसा (मैथिली रूप)

शिव चालीसा (मैथिली रूप)

दोहा: जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान॥ कहय अयोध्यादास प्रभु, दियौ अभय वरदान॥   जय गिरजापति दीनदयाला, सदा करी सन्तन प्रतिपाला॥१॥ भाल चंद्रमा सोहय नीके, कानन कुंडल नाग फनीके॥२॥ अंग गौर शिर गंग बहाबी, मुंडमाल तन छाउर लगाबी॥३॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहय, छवि केँ देखि नाग मन मोहय॥४॥ मैना मातु केर वैह दुलारी, बाम […]

जानकी स्तुति

जानकी स्तुति

भई प्रगट किशोरी, धरनि निहोरी, जनक नृपति सुखकारी अनुपम बपुधारी, रूप सवारी, आदि शक्ति सुकुमारी मणि कनक सिंघासन, क्रिताबर आसन, शशि शत शत उजियारी शिर मुकुट बिराजे, भूषण साजे, नृप लखी भये सुखकारी सखी आठ सयानी, मन हुलसानी, सेवहि शील सुहाई नृपति बड़भागी, अति अनुरागी, अस्तुति करत मन लाइ जय जय जय सीते, श्रुतिगन गीते, […]

शिव-प्रार्थना एवं महामृत्युञ्जय मंत्र

शिव-प्रार्थना एवं महामृत्युञ्जय मंत्र

स्वाध्याय आलेख: – प्रवीण नारायण चौधरी जगत् केर स्वामी देवाधिदेव महादेव केर चरण मे बेर-बेर प्रणाम करैत किछु मंत्रपुष्प समर्पित करैत छी। गत्तेक हिसाबे श्रावण लागि गेल अछि, ओना पुर्णिमा दिन ३१ जुलाई सँ श्रावणी पूजन-अर्चन शुरु होयत, तथापि ‘मैथिली जिन्दाबाद’ पर गौरी सहित शंकर केर शरण मे ई पहिल समर्पण कैल जा रहल अछि। […]

श्रीमद्भागवद्गीता आ निरंतर साधना

श्रीमद्भागवद्गीता आ निरंतर साधना

गीता बुझौवैल – अपन विचार! (भगवानक विराटरूपक दर्शन – शोक सँ ज्ञानोपदेशक मार्ग भगवानक दर्शन पर एक समीक्षा) गीताक ११म अध्याय केर ३५म श्लोक मे संजय कहैत छथिन…. एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमान: किरीटी॥ नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीत: प्रणम्य॥३५॥ ‘कृष्णक एहि तरहक वचन-संबोधन सुनि, सगद्गदी अर्जुन कृत-कृत्य दुनू कल जोड़ने नमस्कार करैत, थरथराइत शरीर […]

मनु-शतरूपा आ हम मानव संसार

मनु-शतरूपा आ हम मानव संसार

स्वाध्याय ‍- आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी आध्यात्मिक अध्ययन अर्थात् ‘स्वयं केर सत्य पहिचान हेतु शास्त्रीय वचन सँ आत्मसंतोषक खोजी’ – जेकरा एक शब्द स्वाध्याय सँ संबोधित कय सकैत छी – ओ हमर रुचिक विषय मे पड़ैत अछि। पुन: स्मृति मे अनैत छी ‘धर्म-मार्ग’ केर स्थापना, निरर्थक एम्हर-ओम्हर समय खर्च केला सँ नीक जे कोनो गंभीर […]

हम शिव छी, हम शिव छी!! शिवोहं शिवोहं!!

हम शिव छी, हम शिव छी!! शिवोहं शिवोहं!!

निर्वाणषट्कम् मनोबुध्यहंकार चिताने नाहं । न च श्रोतजिव्हे न च घ्राणनेत्रे । न च व्योमभूमी न तेजू न वायु । चिदानंदरुप शिवोहं शिवोहं ॥ १ ॥ हम मन, बुद्धि, अहंकार आर स्मृति नहि छी, नहिये हम कान, जिह्वा, नाक वा आँखि छी। न हम आकाश, भूमि, तेज आ वायुए छी, हम चैतन्य रूप छी, आनंद छी, शिव छी, शिव […]

नचारी: रूसल भंगिया हमार

नचारी: रूसल भंगिया हमार

(लोकगीत संकलन सँ: साभार रामचन्द्र सिंह, महिया, दरभंगा) रूसल भंगिया हमार, मनाय दऽ गौरी शिव जोगिया के शिव जोगिया के होऽ – शिव भंगिया केऽऽऽऽ – २ रूसल भंगिया हमार…………….. खुआ मलीदा शिव के मनहु न भावे – २ भाँग धथुरा देखि मन ललचाये – होऽऽ – भाँग धथुरा देखि मन ललचाये! भाँग धथुरा कहाँ […]

चराचर जगत्पति सहस्रशीर्ष पुरुष प्रति समर्पित: स्वाध्यायांश

चराचर जगत्पति सहस्रशीर्ष पुरुष प्रति समर्पित: स्वाध्यायांश

स्वाध्याय (आध्यात्मिक वृत्तांत) पवित्र चतुर्मास मे पुरुष सूक्तक नित्य पाठ जरुर करबाक बात कैल गेल अछि। मैथिल हिन्दू जनमानस मे समस्त कर्म करबा मे पुरुष सूक्त केर उपयोगिता सर्वमान्य अछि। ओना तऽ शौचादि सँ निवृत्त होइत स्नानादिक उपरान्त एकर विशेष लाभ होयत, लेकिन आजुक कलियुग आ खास कऽ के जखन लोक फेसबुक आदि लसैड़ सँ […]

अहुँ केँ चाही सोना?

अहुँ केँ चाही सोना?

नैतिक कथा – उपनिषद् (अनुवाद: प्रवीण नारायण चौधरी) कोनो जंगल मे एकटा स्वर्णशिला पड़ल छल। दुइ गोट घुड़सवार ओतय आबि गेल। चूंकि दुनू गोटा एक्के समय पहुंचल छल, ताहि हेतु दुनू ओहि स्वर्णशिला पर अपन-अपन अधिकार जतौलक। पहिले वाक् युद्ध भेलैक और अंततः तलवार खिंचा गेलैक। क्षणे भरि पहिल तक दुनू एक-दोसर केँ जानितो तक नहि छल। […]

रमजान आ गर्मीक आतंक

रमजान आ गर्मीक आतंक

गर्मीके कहर आ रमजान – आलेख बिन्देश्वर ठाकुर, कतार। हमर देश नेपाल । हम एक नेपाली । हमर काज कर’ बला मूलुक कतार । अहिठाँ हमरा लगायत बहुतो नेपाली आ अन्य देशके कामदार सब अपन रोजगारी लेल आएल छै । वास्तविक कही त ई एकटा मुस्लीमप्रधान देश छै । तें मुस्लीम सबहक बाहुल्यता होएब स्वभाविक […]