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दान-पुण्य तथा भगवती वन्दना

दान-पुण्य तथा भगवती वन्दना

स्वाध्याय दान-पुण्य (श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ वीतराग स्वामी श्रीदयानन्दगिरीजी महराज केर विचार) हमरा संसारक रस्ते तऽ चलबाक नहि अछि, हमरा तऽ धर्मक रस्ते चलबाक अछि, तखन एहेन रीति सँ जँ अहाँ अपन ‘हम’ केर त्यागि देब तऽ ई महादान भऽ गेल। अहाँक अन्दर जतेक मात्रा मे एहि त्याग केर बल आओत, ओतबहि मात्रा मे अहाँक बाहरी जीवन […]

ईश्वर एवं जीव स्वतन्त्र छथि वा परतन्त्रः पंडित रुद्रधर झा कृत् गूढ तत्त्व समीक्षा

ईश्वर एवं जीव स्वतन्त्र छथि वा परतन्त्रः पंडित रुद्रधर झा कृत् गूढ तत्त्व समीक्षा

स्वाध्याय – गूढ तत्त्व समीक्षा ईश्वर और जीव स्वतन्त्र छथि कि परतन्त्र – पंडित रुद्रधर झा   (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   गोस्वामी तुलसीदासजी रामचरितमानस केर उत्तरकाण्ड मे लिखलनि अछि – ‘परवश जीव स्ववश भगवन्ता’ – लेकिन मीमांसकसम्राट कुमारिल भट्ट अपन कारिका केर अन्तर्गत लिखलनि अछि जे – ‘यत्नतः प्रतिषेध्या नः पुरूषाणां स्वतन्त्रता’। ईश्वर जीव […]

कृष्ण मे १६ कला कि-कि छलन्हि (हिन्दी लेख)

कृष्ण मे १६ कला कि-कि छलन्हि (हिन्दी लेख)

– अनिरुद्ध जोशी ‘शतायू’ (साभारः वेबदुनिया डट कम) राम 12 कलाओं के ज्ञाता थे तो भगवान श्रीकृष्ण सभी 16 कलाओं के ज्ञाता हैं। चंद्रमा की सोलह कलाएं होती हैं। सोलह श्रृंगार के बारे में भी आपने सुना होगा। आखिर ये 16 कलाएं क्या है? उपनिषदों अनुसार 16 कलाओं से युक्त व्यक्ति ईश्‍वरतुल्य होता है। आपने […]

मानव जीवन आ चारि आश्रमः ज्ञान सँ भरल पठनीय आ मननीय आलेख

मानव जीवन आ चारि आश्रमः ज्ञान सँ भरल पठनीय आ मननीय आलेख

आश्रम चतुष्टयपर एक विहंगम दृष्टि   – स्वामी श्रीविज्ञानानन्दजी सरस्वती   (मूल आलेखः हिन्दी, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   चारि वर्ण आ चारि आश्रम प्राचीनकालिक अछि अर्थात् वैदिक कालीन अछि। एहि लेल मनुस्मृति मे कहलो गेल छैक जे ‍-   चातुर्वर्ण्यं त्रयो लोकाश्चत्वारश्चाश्रमाः पृथक्। भूतं भव्यं भविष्यं च सर्वं वेदात्प्रसिध्यति॥   – मनुस्मृति १२/९७   […]

जनकपुर मे धनुष यज्ञशालाक भ्रमण आ मैथिल बालक संग राम-लक्ष्मणक पहिल भेंटक दृश्य

जनकपुर मे धनुष यज्ञशालाक भ्रमण आ मैथिल बालक संग राम-लक्ष्मणक पहिल भेंटक दृश्य

कल्याणमयी दृश्यावलोकन   भाइ ध्रुव शर्मा केर सौजन्य सँ ई सुन्दर चर्चा आजुक दिन पुनः सोझाँ आनबाक लेल भेटल अछि। जनकपुर मे जखन गुरु विश्वामित्रजी संग रामचन्द्रजी आ लक्ष्मणजी आयल छलाह, ओतय धनुष यज्ञ होयबाक बात सुनि कौतुकता सँ भरि गुरुजीक आज्ञा लय नगर भ्रमण हेतु दुनू भैयाँ पहुँचल छथि। आर केहेन दृश्य छैक से […]

भगवान केर पहिचान पर नैय्यायिक पंडित रुद्रधर झा – अत्यन्त पठनीय आ मननीय लेख

भगवान केर पहिचान पर नैय्यायिक पंडित रुद्रधर झा – अत्यन्त पठनीय आ मननीय लेख

समस्त चराचर प्राणी तथा सम्पूर्ण विश्व साक्षात् भगवाने छथि – पंडित रुद्रधर झा (मैथिली अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) ‘हरि रेव जगज्जगदेव हरिर्हरितो जगतो न भिन्नतनुः’ (आर्षवाणी) भगवाने समस्त जड़चेतनमय संसार छथि आर सम्पूर्ण जड़चेतनमय विश्वे भगवान् थिक, कियैक तँ समस्त जड़चेतनमय संसारक भगवान् सँ भिन्न शरीर नहि अछि। अर्थात् – भगवान् केर शरीर सम्पूर्ण जड़चेतनमय […]

माध्वसंमत-द्वैतवेदान्तवादः – पंडित रुद्रधर झा द्वारा वेद वर्णित विज्ञान पर महत्वपूर्ण प्रकाश

माध्वसंमत-द्वैतवेदान्तवादः – पंडित रुद्रधर झा द्वारा वेद वर्णित विज्ञान पर महत्वपूर्ण प्रकाश

स्वाध्याय माध्वसंमत-द्वैतवेदान्तवादः – पंडित रुद्रधर झा (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   श्रीमन्मध्वमते हरिः परतरः सत्यं जगत्तत्त्वतो- भेदो जीवगणा हरेरनुचरा नीचोच्चभावं गतः। मुक्तिर्नैजसुखानुभूतिरमला भक्तिश्च तत्साधनं ह्यक्षादित्रितयं प्रमाणमखिलाम्नायैकवेद्यो हरिः॥   १. स्वतन्त्र चेतन – सर्वज्ञ-अचिन्त्यशक्तिसम्पन्न – अनन्तगुणाश्रय भगवान् विष्णु एक परमतत्त्व   २. अस्वतन्त्र चेतन – जीव अनन्त अणु   ३. पञ्च भेदाः सत्याः – जीवेश्वरभेदः, जीवजडभेदः, […]

गीताक निरन्तर अध्ययन-मनन सँ भेटैत अछि मनुष्य जीवन लेल अनुकरणीय मार्गदर्शन

गीताक निरन्तर अध्ययन-मनन सँ भेटैत अछि मनुष्य जीवन लेल अनुकरणीय मार्गदर्शन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी मनुष्य कल्याणक अचूक अस्त्रः गीता, एक महाशास्त्र   गीता एहेन गूढतम् शास्त्र थिकैक जाहि पर जतेक माथ लगायब, माथाक गन्दगी ततेक बेसी दूर होयत।   मोन पड़ैत अछि एकटा नैतिक कथा –   बाबा अपन पोताक ई जिज्ञासा जे हुनका कहला मुताबिक पोता द्वारा कतेको बेर गीता पढि लेलाक बादो […]

ईश्वर – अनिवार्य आ ऐच्छिक – ईश्वरक यथार्थ परिचय करबैत ई गूढ तत्त्व समीक्षा

ईश्वर – अनिवार्य आ ऐच्छिक – ईश्वरक यथार्थ परिचय करबैत ई गूढ तत्त्व समीक्षा

ईश्वर – अनिवार्य आ ऐच्छिक (Worth Contemplating, Ponder Pravin, Ponder on It!)   – पंडित रुद्रधर झा (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   “सर्वेषामपि पूज्यानां पिता वन्द्यो महान गुरुः। पितुः शतगुणा माता गर्भधारणपोषणात्॥ विद्या मन्त्रप्रदः सत्यं मातुः परतरो गुरुः। नहि तस्मात्परः कोऽपि वन्द्यः पूज्यश्च वेदतः॥”   – ब्रह्मवैवर्तपुराण कृष्णजन्म ७२/११०, ११२   समस्त पूज्य लोकनि मे […]

अर्थ आ रहस्यक भेद (श्रीमद्भगवद्गीताक एक श्लोक केर रहस्य)

अर्थ आ रहस्यक भेद (श्रीमद्भगवद्गीताक एक श्लोक केर रहस्य)

अर्थ आ रहस्यक भेद (श्रीमद्भगवद्गीताक एक श्लोक केर रहस्य) – ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्रीजयदयालजी गोयन्दका (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   एकटा बड़ा सन्तोषी, सदाचारी आर विद्वान् ब्राह्मण छलाह, मुदा छलाह ओ गरीब। हुनक पत्नी बड़ा पतिव्रता, विदुषी, तत्त्वज्ञान सँ सम्पन्न आ जीवन्मुक्त छलीह। ओहि देशक राजा सेहो तत्त्वज्ञानी, जीवन्मुक्त महात्मा छलाह। ब्राह्मणपत्नी एक दिन विचार […]