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सीता जी चारू बहिन संग श्रीराम चारू भाइ विराजमान छथि जानकी मन्दिर मे

सीता जी चारू बहिन संग श्रीराम चारू भाइ विराजमान छथि जानकी मन्दिर मे

पराम्बा जानकी – सीता तथा हुनक तीन बहिन अपन-अपन श्री (स्वामी) केर संग ऐतिहासिक जानकी मन्दिर मे विराजमान देखा रहली अछि एहि फोटो मे।   आउ, आजुक दिन समर्पित करी सीता जी आ हुनक अन्य तीन बहिन केर विस्तृत परिचय संग अन्य किछु रोचक जानकारी जे विभिन्न स्रोत सँ संकलित कयल गेल अछि से जानिकय […]

जीवन लेल ५ गो महत्वपूर्ण निर्देशन श्रीमद्भागवद्गीता सँ – सभक लेल पठनीय, मननीय ओ अनुकरणीय

जीवन लेल ५ गो महत्वपूर्ण निर्देशन श्रीमद्भागवद्गीता सँ – सभक लेल पठनीय, मननीय ओ अनुकरणीय

श्रीमद्भागवद्गीताक ५ महत्वपूर्ण निर्देशन   मूल लेख – श्री अनिरुद्ध जोशी शतायू (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   आइ समाज मे मनमाना ज्योतिष और स्वयंभू बाबाक भरमार देखाइत अछि। सब कियो अलगे-अलगे सिद्धांत गढ़बाक दाबी ठोकैत अछि, अलग-अलग समाधानक उपाय बतबैत अछि आर एहि तरहें धर्म सँ जुड़ल तरह-तरह केर मनमानी बात सब करैत अछि। लोक […]

चैती नवरात्र आ चैती छैठ – सम्पन्न भेल भोरका अर्घ, नवरात्रक प्रकार आ माहात्म्य

चैती नवरात्र आ चैती छैठ – सम्पन्न भेल भोरका अर्घ, नवरात्रक प्रकार आ माहात्म्य

१२ अप्रैल २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिलाक अनेकों स्थान पर चैती दुर्गा पूजा चलि रहल अछि। एहि बीच छठि परमेश्वरीक महान आराधना यानि छैठ पूजा सेहो आयोजित भेल अछि। विदित हो जे शारदीय नवरात्र – दसमी (दशहरा) नाम सँ प्रचलित ९ शक्तिक आराधित देवी केर पूजा जेकाँ चैत मास मे सेहो कतेको स्थान पर परम्परा अनुसार […]

सीताजी सँ हनुमानजीक पहिल भेंट आ मैथिली मे बात करबाक ओ सुन्दर आख्यान

सीताजी सँ हनुमानजीक पहिल भेंट आ मैथिली मे बात करबाक ओ सुन्दर आख्यान

हनुमानजी द्वारा जानकीजी सँ प्रथम भेंट   महावीर हनुमान जी जखन लंकाक अशोक वाटिका जानकी जी केँ खोज-पुछाड़ि करैत पहुँचला त देखलनि जे दसानन रावण अनेकों राक्षस गण-गणिका संग हुनका बहुतो प्रकार सँ अपना दिश एक बेर निहारबाक लेल कहैत अछि, धरि जानकी जी सिर्फ एकटक ध्यान सँ जमीनक घास केँ निहारैत ओहि दुष्ट राक्षस […]

वास्तव मे होली मनेबाक आध्यात्मिकता कि छैक – अत्यन्त महत्वपूर्ण रहस्यक खोज

वास्तव मे होली मनेबाक आध्यात्मिकता कि छैक – अत्यन्त महत्वपूर्ण रहस्यक खोज

होली पर लेख – रोचक जनतब सहित   होली: शास्त्रमत आ परंपरा   हिन्दू शास्त्रमतानुसार हिरण्यकशिपु नामक एक अतिमहात्त्वाकांक्षी राजा छलाह जिनक इच्छा सभ सँ महान लोक बनबाक छलन्हि। एहि इच्छाक पूर्तिलेल ओ घोर तपस्या कयलन्हि आ ब्रह्माजी सँ वर प्राप्त कयलन्हि। ब्रह्माजी हुनक भक्तिपूर्ण कठोर तपस्यासँ प्रसन्न भेलापर हुनक एहेन इच्छा पूर्ति करबाक वर […]

अष्टावक्र संहिता – अध्याय ७ – उच्चतर ज्ञान

अष्टावक्र संहिता – अध्याय ७ – उच्चतर ज्ञान

अष्टावक्र संहिता – अध्याय सातम – उच्चतर ज्ञान   पिछला अध्याय छठम् मे गुरु अष्टावक्र ब्रह्मलीन होयबाक – आत्मारूपी परमात्मा संग एकाकार होयबाक चारि तरीका बतेलनि। ताहि पर जनक समान उच्च ज्ञानी शिष्य अपन उद्गार प्रकट करैत अपन मनोभाव केँ गुरु अष्टावक्र केर सोझाँ केना राखि रहल छथि, तेकर विवरण मात्र ४ श्लोक मे देखल […]

अष्टावक्र संहिता – अध्याय ५ – विलय केर चारि तरीका

अष्टावक्र संहिता – अध्याय ५ – विलय केर चारि तरीका

अष्टावक्र संहिताः अध्याय ५ – विलय केर चारि तरीका   अष्टावक्र संहिता मे जनक समान प्रखर ज्ञाता एक शिष्य छथि, अष्टावक्र समान महान् ज्ञानी आ ऋषि समान गुरु छथि। शिष्य आ गुरुक बीच वार्ताक स्तर सेहो अत्यन्त उच्च अछि। हम मुमुक्षु स्वाध्यायी जँ स्वयं केँ एहि उच्च स्तर पर स्थापित कय केँ हिनका लोकनिक बीच […]

अष्टावक्र संहिताक चारिम अध्याय – आत्मज्ञानक महिमामंडन

अष्टावक्र संहिताक चारिम अध्याय – आत्मज्ञानक महिमामंडन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी अष्टावक्र संहिता – चारिम अध्यायः आत्मज्ञान केर महिमामंडन   पूर्व तीन अध्याय मे पहिल आत्मज्ञान केर परिचिति, दोसर आत्मज्ञान सँ आनन्दक अनुभूति, पुनः तेसर अध्याय मे आत्मज्ञान प्राप्त भेल तथापि द्वंद्व व आसक्ति तथा सांसारिकता मे रमण करबाक नियति कोना – इत्यादि प्रश्न सँ परीक्षा कयला उत्तर पुनः चारिम अध्याय […]

अष्टावक्र संहिता – तेसर अध्याय – आत्मज्ञान केर परीक्षा

अष्टावक्र संहिता – तेसर अध्याय – आत्मज्ञान केर परीक्षा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी अष्टावक्र संहिता – तृतीय अध्याय   आत्मज्ञान केर परीक्षा   प्रिय पाठक लोकनि! अष्टावक्र संहिताक दुइ अध्याय समाप्त भऽ गेल। पहिल मे अष्टावक्र द्वारा स्वयं केर पहिचान यथार्थ रूप सँ, तत्त्व रूप सँ कोना कयल जाय आर सांसारिक अस्तित्व केँ स्वयं सँ कोना जोड़ल जाय ताहि पर परिचिति देल गेल […]

हनुमानजी द्वारा भगवान् राम केर स्तुति

हनुमानजी द्वारा भगवान् राम केर स्तुति

हनुमत्कृत श्रीरामस्तुति   नमो रामाय हरये विष्णवे प्रभविष्णवे। आदिदेवाय देवाय पुराणाय गदाभृते॥ विष्टरे पुष्पके नित्यं निविष्टाय महात्मने। प्रहृष्टवानरानीकजुष्टपादाम्बुजाय ते॥ निष्पिष्टराक्षसेन्द्राय जगदिष्टविधायिने। नमः सहस्रशिरसे सहस्रचरणाय च॥ सहस्राक्षाय शुद्धाय राघवाय च विष्णवे। भक्तार्तिहारिणे तुभ्यं सीतायाः पतये नमः॥   श्रीहनुमानजी कहलनि –   सबपर शासन करयवला, सर्वव्यापी, श्रीहरिस्वरूप श्रीरामचन्द्रजी केँ नमस्कार अछि। आदिदेव पुराणपुरुष भगवान् गदाधर केँ नमस्कार […]