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धर्म दर्शन: ॐ तत्सत्

धर्म दर्शन: ॐ तत्सत्

ॐ तत्सत् मीमाँसा ॐ, तत् आ सत् – ब्रह्म केर परिचायक यैह तीन नाम – एहि तीन सँ ब्रह्म, वेद आ यज्ञक भान होइत अछि। भगवत् भजन, दान आ तप – शास्त्रीय वचनानुसार आ वेदानुसार, शुरुआत ‘ॐ’ सँ कैल जाइछ। तहिना ‘तत्’ केर उद्घोष, बिना कोनो प्राप्तिक इच्छा, विभिन्न पूजा-कर्म, तप आ दान करनिहार केँ […]

ई केहेन पैघ लोक?

ई केहेन पैघ लोक?

नैतिक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी पैघ लोक केर परिभाषा ओना तऽ बड सहज छैक जे पैघत्व केँ धारण करय से पैघ भेल, मुदा पैघ कहेनिहार अपन निज भान सँ जँ पैघ बनि जाय तऽ ओकर पैघत्व पर प्रश्न चिह्न लागि जाइत छैक इहो यथार्थ आ व्यवहारिक जगत् केर सत्य थिकैक। उच्च जाति वा कुल-मूल […]

जीवनचर्या-सम्बन्धी उपदेश – श्रीउमामहेश्वरजीके जीवन-दर्शन

जीवनचर्या-सम्बन्धी उपदेश – श्रीउमामहेश्वरजीके जीवन-दर्शन

आलेख: आध्यात्मिक चेतना तथा स्वाध्याय एक बेर पार्वती माता भगवान्‌ शिवसँ जीवनमें पालनीय आचारके सम्बन्धमें निवेदनपूर्वक जिज्ञासा कयलन्हि। एहिपर शिवजी देवी पार्वतीकेँ जीवनके सफल बनाबय के लेल विस्तारसँ जे बात बतौलन्हि, ओकर किछु अंश एतय प्रस्तुत अछि जे अत्यन्त उपयोगी सेहो अछि – गृहस्थक धर्म आ गृहस्थाश्रमके श्रेष्ठता – गृहस्थकेर परमधर्म होइछ जे कोनो जीवके […]

कलियुग कि थीक: सत्य दर्शन

कलियुग कि थीक: सत्य दर्शन

युगक सामान्य समझ नीक समय जे बीत गेल से कहायल सत्ययुग, अंधकारक युग केँ कलियुग कहल जा रहल अछि। मान्यता अनुसार युग केर चर्चा अपना जगह पर अछिये। मान्यता बनैत छैक मानवक अपनहि अनुभूतिक आधार पर। परंपरागत रूप मे दर्शन मुताबिक परिकल्पना सँ सेहो एना विभिन्न युग केर स्मृति बनाओल जा रहलैक अछि। जेना-जेना समय […]

अंग प्रदर्शन करब सुन्दरता कोना?

अंग प्रदर्शन करब सुन्दरता कोना?

नारी सुंदरताक दुरुपयोग समाज लेल अकल्याणकारी सुन्दरताक परिभाषा भारतवर्षीय संस्कृति मे सत्य तथा शिव सँ जुड़ल अछि। ‘सत्यं शिवं सुन्दरम्’ – अर्थात् जे सत्य अछि वैह शिव अछि आ जे शिव अछि वैह सुन्दर अछि। वर्तमान अपसंस्कृतिकाल मे जाहि तरहें वस्त्र आ आभूषण सँ झाँपय योग्य अंग केँ बेसी सँ बेसी प्रदर्शन करबाक धुनकी लोकमानस मे […]

कलियुगक कल्पवृक्ष – दान

कलियुगक कल्पवृक्ष – दान

– आध्यात्मिक आलेख : A must read Article            – महामण्डलेश्वर स्वामी श्रीबजरंगबलीजी ब्रह्मचारी धन्य अछि ओ देश, धन्य अछि ओ प्रदेश, धन्य अछि ओ धरती और धन्य अछो ओ भारतीय संस्कृति तथा रीति-नीति एवं जीवन-यापनक पद्धति जतय धनसँ अधिक धर्मक, भोगसँ अधिक योगक, स्वार्थ सँ अधिक परमार्थक और धर्मक चारू […]

रामचरितमानस: रूपक आ माहात्म्य – “महाकवि तुलसीदास केर अपूर्व प्रस्तुति’

रामचरितमानस: रूपक आ माहात्म्य – “महाकवि तुलसीदास केर अपूर्व प्रस्तुति’

रामचरितमानस मिथिलावासीक लेल खास कियैक सनातन धर्म मे ईश्वर अनेक छथि, परन्तु राम तथा कृष्णक महत्त्व बहुत खास अछि। खास होयबाक कारण जे एहि दुइ अवतार केँ मनुष्य अपनहि रूप मे देखि मानुसिक क्रियाकलापक संग महापुरुषक आचार-विचार जुड़ल देखि दुनू चरित्रक अनुकरण सँ अपन जीवन केँ सफल बनेबाक चेष्टा करैत अछि। मनुष्यरूप मे रहैत सीता […]

पापनाशक आ शक्तिवर्धक तपश्चर्या

पापनाशक आ शक्तिवर्धक तपश्चर्या

(मूल आलेख ‘पापनाशक और शक्तिवर्धक तपश्चर्याएँ’ – अखिल विश्व गायत्री परिवार केर साहित्यालेख केर मैथिली अनुवाद) आइगक उष्णता सँ संसारक समस्त पदार्थ या तऽ जरि जाइत अछि, या बदैल जाइत अछि या गैल जाइत अछि। एहेन कोनो वस्तु नहि जे आइगक संसर्ग भेला पर परिवर्तित नहि होइत अछि। तपस्याक आइग सेहो एहने होइत छैक। ई […]

श्रीदेव्यथर्वशीर्षम् : एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण उपनिषद स्तोत्र – देवी उपासना (मैथिली भावार्थ सहित)

श्रीदेव्यथर्वशीर्षम् : एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण उपनिषद स्तोत्र – देवी उपासना (मैथिली भावार्थ सहित)

कनेक मनन करू! दुर्गा सप्तशती मिथिलाक हर घर लेल एक आवश्यक पोथी मानल जाइत अछि। जे कियो भक्ति साधना सँ जुडल छी, तिनका सभकेँ जरुर देवी उपासनाक महत्त्व बुझल होयत। एक चर्चा हम एतय करय लेल जा रहल छी ओ अछि श्रीदेव्यथर्वशीर्षम् केर मादे – अथर्ववेद मे देल गेल महिमा अनुरूप आ स्वयं हमरा लोकनि […]

भजन: निलकंठ मधुकर पदावली

भजन: निलकंठ मधुकर पदावली

– पंडित मधुकान्त झा ‘मधुकर’, ग्राम: चैनपुर, सहरसा, मिथिला जनकपुर स्थित कमनीय अनुपम कोबर मे सीताराम के। शक्तिब्रह्म समक्ष माय सीताक अनुचरी के उक्ति॥ दूलहा राम के प्रति: हिऔ मिथिला के दूलहा कमाल करै छी। दीन दुखिया बेहाल के नेहाल करै छी॥ हिऔ मिथिला…… हम जानै छी, हम जानै छी, कृपा सिया के महिमा बखानै […]