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मानव शरीर केर ज्ञात-अज्ञात शक्ति तथा कुण्डलिनी शक्तिक आरम्भिक चर्चा: दर्शन एवं ज्ञान

मानव शरीर केर ज्ञात-अज्ञात शक्ति तथा कुण्डलिनी शक्तिक आरम्भिक चर्चा: दर्शन एवं ज्ञान

स्वाध्याय आलेख कुण्डलिनी: एक परिचय   मनुष्यक भीतर कतेको प्रकारक शक्ति छुपल पड़ल अछि। बहुतो रास खोज कय लेल गेल अछि। बहुतो एखनहुँ धरि ताकले जेबाक क्रम मे अछि, आर बहुतो रास एहनो अछि जेकरा बारे हम सब जनिते नहि छी। शारीरिक शक्ति, बौद्धिक शक्ति, विचार शक्ति, इच्छा शक्ति, प्राणशक्ति, आत्मिक शक्ति, विश्लेषण शक्ति, स्मरण […]

भगवान् आ बच्चाक बीच समानता – मीमांसक पं. रुद्रधर झा केर अत्यन्त प्रेरणास्पद लेख

भगवान् आ बच्चाक बीच समानता – मीमांसक पं. रुद्रधर झा केर अत्यन्त प्रेरणास्पद लेख

स्वाध्याय आलेख ‘गूढ तत्त्व समीक्षा’ नामक महत्वपूर्ण पोथी मे पंडित रुद्रधर झा केर अनेकों मननीय लेख मे सँ एक मूल्यवान् लेख आइ एतय राखि रहल छी। भगवान् केर स्वभाव बच्चा जेकाँ होइत छन्हि, एहि पंक्ति केँ मीमांसक पं. रुद्रधर झा कोना सिद्ध करैत छथि, आर एकरा पढला-मनन केला सँ हमरा लोकनि कोन तरहक शिक्षा ग्रहण […]

श्रीमद्देवीभागवत कथा आधारित ‘सीताहरण, राम केर शोक तथा लक्ष्मण द्वारा सान्त्वना’

श्रीमद्देवीभागवत कथा आधारित ‘सीताहरण, राम केर शोक तथा लक्ष्मण द्वारा सान्त्वना’

श्रीमद्देवीभागवत – तृतीय स्कन्ध – अध्याय २९   सीताहरण, राम केर शोक तथा लक्ष्मण द्वारा हुनका सान्त्वना देनाय   व्यासजी बजलाह – रावणक कुविचारपूर्ण वचन सुनिकय सीता भय सँ व्याकुल भऽ काँपि गेलीह। पुनः मोन केँ स्थिर कय ओ कहलखिन, “हे पुलस्त्यक वंशज! काम केर वशीभूत भऽ अहाँ एहेन अनर्गल वचन कियैक कहि रहल छी। […]

श्रीमद्देवीभागवतसुभाषितसुधा – ज्ञान प्राप्तिक संछिप्त आ अत्यन्त महत्वपूर्ण आधार

श्रीमद्देवीभागवतसुभाषितसुधा – ज्ञान प्राप्तिक संछिप्त आ अत्यन्त महत्वपूर्ण आधार

श्रीमद्देवीभागवतसुभाषितसुधा   येन केनाप्युपायेन कालातिवाहनं स्मृतम्। व्यसनैरिह मूर्खाणां बुधानां शास्त्रचिन्तनैः॥   जाहि कोनो प्रकार सँ समय त बीतिते रहैत छैक, मुदा मूर्खक समय व्यर्थ दुर्व्यसन मे बीतैत छैक आर विद्वान् केर समय शास्त्रचिन्तन मे जाइत छैक। (१/१/१२)   मूर्खेण सह संयोगो विषादपि सुदुर्जरः। विज्ञेन सह संयोगः सुधारससमः स्मृतः॥   मूर्खक संग स्थापित कयल गेल सम्पर्क […]

श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्य – मननीय एवं अनुकरणीय शिक्षा

श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्य – मननीय एवं अनुकरणीय शिक्षा

श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्य देवीभागवतं नाम पुराणं परमोत्तमम्। त्रैलोक्यजननी साक्षाद् गीयते यत्र शाश्वती॥ श्रीमद्भागवतं यस्तु पठेद्वा श्रृणुयादपि। श्लोकार्धं श्लोकपादं वा स याति परमां गतिम्॥ पूजितं यद्गृह्ये नित्यं श्रीभागवतपुस्तकम्। तद्गृहं तीर्थभूतं हि वसतां पापनाशकम्॥ यस्तु भागवतं देव्याः पठेद् भक्त्या श्रृणोति वा। धर्ममर्थं च कामं च मोक्षं च लभते नरः॥ सुधां पिबन्नेक एव नरः स्यादजरामरः। देव्याः कथामृतं कुर्यात् कुलमेवाजरामरम्॥ अष्टादशपुराणानां […]

गुणक मिश्रणभाव आ देवीक बीज मन्त्र

गुणक मिश्रणभाव आ देवीक बीज मन्त्र

स्वाध्यायालेख – गुणक मिश्रणभाव आ देवीक बीज मन्त्र महिमा (श्रीमद्देवीभागवत केर कथा) – प्रवीण नारायण चौधरी (संकलन एवं अनुवाद) अठारह हजार श्लोक सँ भरल देवीक महिमागान करयवला श्रीमद्देवीभागवत कथा मे सँ एकटा महत्वपूर्ण कथाक स्वाध्याय आइ पाठक लोकनिक सोझाँ रखबाक इच्छा भेल।   तृतीय अध्याय केर ९मा अध्याय मे महान ग्रंथकार व्यासजी द्वारा अत्यन्त महान […]

दान-पुण्य तथा भगवती वन्दना

दान-पुण्य तथा भगवती वन्दना

स्वाध्याय दान-पुण्य (श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ वीतराग स्वामी श्रीदयानन्दगिरीजी महराज केर विचार) हमरा संसारक रस्ते तऽ चलबाक नहि अछि, हमरा तऽ धर्मक रस्ते चलबाक अछि, तखन एहेन रीति सँ जँ अहाँ अपन ‘हम’ केर त्यागि देब तऽ ई महादान भऽ गेल। अहाँक अन्दर जतेक मात्रा मे एहि त्याग केर बल आओत, ओतबहि मात्रा मे अहाँक बाहरी जीवन […]

ईश्वर एवं जीव स्वतन्त्र छथि वा परतन्त्रः पंडित रुद्रधर झा कृत् गूढ तत्त्व समीक्षा

ईश्वर एवं जीव स्वतन्त्र छथि वा परतन्त्रः पंडित रुद्रधर झा कृत् गूढ तत्त्व समीक्षा

स्वाध्याय – गूढ तत्त्व समीक्षा ईश्वर और जीव स्वतन्त्र छथि कि परतन्त्र – पंडित रुद्रधर झा   (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   गोस्वामी तुलसीदासजी रामचरितमानस केर उत्तरकाण्ड मे लिखलनि अछि – ‘परवश जीव स्ववश भगवन्ता’ – लेकिन मीमांसकसम्राट कुमारिल भट्ट अपन कारिका केर अन्तर्गत लिखलनि अछि जे – ‘यत्नतः प्रतिषेध्या नः पुरूषाणां स्वतन्त्रता’। ईश्वर जीव […]

कृष्ण मे १६ कला कि-कि छलन्हि (हिन्दी लेख)

कृष्ण मे १६ कला कि-कि छलन्हि (हिन्दी लेख)

– अनिरुद्ध जोशी ‘शतायू’ (साभारः वेबदुनिया डट कम) राम 12 कलाओं के ज्ञाता थे तो भगवान श्रीकृष्ण सभी 16 कलाओं के ज्ञाता हैं। चंद्रमा की सोलह कलाएं होती हैं। सोलह श्रृंगार के बारे में भी आपने सुना होगा। आखिर ये 16 कलाएं क्या है? उपनिषदों अनुसार 16 कलाओं से युक्त व्यक्ति ईश्‍वरतुल्य होता है। आपने […]

मानव जीवन आ चारि आश्रमः ज्ञान सँ भरल पठनीय आ मननीय आलेख

मानव जीवन आ चारि आश्रमः ज्ञान सँ भरल पठनीय आ मननीय आलेख

आश्रम चतुष्टयपर एक विहंगम दृष्टि   – स्वामी श्रीविज्ञानानन्दजी सरस्वती   (मूल आलेखः हिन्दी, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी)   चारि वर्ण आ चारि आश्रम प्राचीनकालिक अछि अर्थात् वैदिक कालीन अछि। एहि लेल मनुस्मृति मे कहलो गेल छैक जे ‍-   चातुर्वर्ण्यं त्रयो लोकाश्चत्वारश्चाश्रमाः पृथक्। भूतं भव्यं भविष्यं च सर्वं वेदात्प्रसिध्यति॥   – मनुस्मृति १२/९७   […]

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