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दीपावली शुभकामना – पठनीय मननीय सन्देश

दीपावली शुभकामना – पठनीय मननीय सन्देश

दीपावली शुभकामना वर्ष 2020 केर दियाबाती यानी दीपावली आबि गेल। समय अपन गति केँ निर्बाध रूप सँ चलबैत रहैत अछि, किछु भ जाय ई ठमकैत तक नहि अछि। तेँ एहि वर्ष मानव सभ्यता पर कोरोना महामारी केर खतरा रहितो येन केन प्रकारेण गाड़ी बढ़िते जा रहल अछि, भले हम बीमार भ क्वरंटीने में छी आ […]

शास्त्र-पुराण संग हम मानवक अन्योन्याश्रय सम्बन्ध – दर्शन आ विचार

शास्त्र-पुराण संग हम मानवक अन्योन्याश्रय सम्बन्ध – दर्शन आ विचार

दर्शन-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी कि कहैत अछि अपन शास्त्र-पुराण   उमेर केर आजुक पौदान धरि अबैत ई बात कतेको बेर मस्तिष्क मे आयल अछि जे शास्त्र-पुराण केर वचन आखिर हमरा सब वास्ते एतेक महत्वपूर्ण कियैक मानल जाइछ। आब ई प्रश्न गुरुजन सँ पूछब त ओहो लोकनि कहता जे ओ सिद्ध कयल सत्य (प्रमेय, अकाट्य […]

कि थिक मलमास आ एहि मासक कि सब होइछ विशेषता – आचार्य धर्मेन्द्रनाथ मिश्र संग मन्थन

कि थिक मलमास आ एहि मासक कि सब होइछ विशेषता – आचार्य धर्मेन्द्रनाथ मिश्र संग मन्थन

आध्यात्मिक चर्चा – आचार्य धर्मेन्द्र नाथ मिश्र कियैक होयत अछि पुरूषोत्तम मास मलमास के पुरूषोत्तममास, अधिमास आ अधिकमास केर नाम सँ जानल जायत अछि। समान्यतया अधिकमास ३२ महीना १६ दिन ४ घड़ी केर अन्तर सँ आबैत अछि। धर्मग्रंथ में प्रत्येक २८ मासक पश्चात आ ३७ मास सँ पहिने अधिकमास होबाक बात कहल गेल अछि। अधिकमास […]

हनुमान चालीसा सँ मानव स्वास्थ्य केँ अचूक लाभः तनाव दूर करबाक अचूक साधना

हनुमान चालीसा सँ मानव स्वास्थ्य केँ अचूक लाभः तनाव दूर करबाक अचूक साधना

आध्यात्मिक चिन्तन-स्वाध्याय मूल लेखः पूजा सिन्हा, हर-जिन्दगी डट कम पर एडिटोरियल (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) Hanuman Jayanti 2020: हनुमान चालीसा केर पाठ करब तँ तनाव रहत अहाँ सँ कोसो दूर अगर अहाँ सेहो अपन सपना केँ टूटैत और असफल होयबाक कारण तनाव सँ घेरायल रहैत छी तऽ परेशान नहि होउ कियैक तँ एहेन मे हनुमान […]

महादेव केर पूजन लिंङ्गरूप मे कियैक – विस्तृत माहात्म्य

महादेव केर पूजन लिंङ्गरूप मे कियैक – विस्तृत माहात्म्य

स्वाध्याय आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी भगवान् शिव केर लिङ्ग एवं साकार विग्रह केर पूजाक रहस्य तथा महत्वक वर्णन स्रोतः शिवपुराण, विद्येश्वरसंहिता, अध्याय ३ सँ ८ केर संछिप्त सारांश आधारित (लेख निरन्तरता मे अछि) महादेव मात्र केर लिंग पूजन कियैक स्वाध्याय केर केन्द्रविन्दु एखन शिवपुराण में एहि गूढ़ रहस्य केँ ताकि रहल अछि। विद्येश्वरसंहिता में […]

सदा समता भाव मे रहले सँ मानव जन्मक सफलता

सदा समता भाव मे रहले सँ मानव जन्मक सफलता

लेख-अनुवाद सदा समता भाव मे रहले सँ मानव जन्मक सफलता   – पंडित रुद्रधर झा   विश्व विख्यात चारि (धर्म, अर्थ, काम ओ मोक्ष) पुरुषार्थ मे तीन (धर्म, अर्थ तथा काम) अनित्य आ अतिशय अछि, मात्र चारिम (मोक्ष) टा नित्य तथा निरतिशय रहबाक कारण परम पुरुषार्थ कहाइत अछि। अतएव विवेकी व्यक्ति अनादि महाकाल सँ प्रवाहमान […]

महत्वपूर्ण शिक्षा – प्रेरणास्पद श्लोक

महत्वपूर्ण शिक्षा – प्रेरणास्पद श्लोक

पढ रे बौआ पढ – १ सागर केर उपमा सँ धीर-गम्भीर आ शान्त स्वभावक परिचय भेटैत छैक। वैह सागर केर कतेको फीटक लहर सेहो ओतेक हल्ला नहि करैत छैक जतेक थोड़बे पानिक मात्रा संग बहयवाली झरनाक पानि। ताहि सागर सँ सेहो कियो महान भऽ सकैत अछि। के? प्रलये भिन्नमर्यादा भवन्ति किल सागराः। सागरा भेदमिच्छन्ति प्रलयेऽपि […]

सन् २०५० ई धरि कइएक महत्वपूर्ण वैश्विक महानगर समुद्र मे समा जायत

सन् २०५० ई धरि कइएक महत्वपूर्ण वैश्विक महानगर समुद्र मे समा जायत

चिन्तन – प्रवीण नारायण चौधरी विश्वक कइएक देश रहत समुद्रक अन्दर   सन् २०५० धरि विश्व केर नक्शा मे बहुत पैघ परिवर्तन आबि जायत। समुद्रक तलहटीक स्तर जाहि गति सँ बढि रहल अछि ताहि कारणे समुद्र किनारक कतेको महत्वपूर्ण महानगर-नगर आ आबादीक्षेत्र २०५० धरि पानिक (समुद्रक) भीतर समा जेबाक खतरा अछि। एहनो नहि छैक जे […]

एक गृहस्थ केँ केना जीबाक चाही – साधारण नियम लेकिन महत्वपूर्ण अछि सभक लेल

एक गृहस्थ केँ केना जीबाक चाही – साधारण नियम लेकिन महत्वपूर्ण अछि सभक लेल

गृहस्थ लेल साधारण नियम (स्रोत: कल्याण) १. प्रातकाल सूर्योदयसँ पहिले उठू। २. उठिते भगवान् केर स्मरण करू। ३. शौच-स्नान आदि सँ निवृत होइत भगवान् केर उपासना, सन्ध्या, तर्पण आदि करू। ४. बलिवैश्वदेव (नमकरहित पाकल भोजनसँ अग्निकेँ हवन) केलाके बाद समयपर भोजन करू। ५. रोज प्रातकाल माता, पिता आ गुरु आदि श्रेष्ठजनकेँ प्रणाम करू। ६. इन्द्रियकेर […]

कियैक कयल जाइछ सोम प्रदोष व्रत – एक विशेष माहात्म्य

कियैक कयल जाइछ सोम प्रदोष व्रत – एक विशेष माहात्म्य

स्वाध्याय लेख – सावन विशेष साभार – वेबदुनिया सोम प्रदोष व्रत केर पौराणिक व्रतकथा केर अनुसार एक नगर मे एक ब्राह्मणी रहैत छलीह। हुनक पति केर स्वर्गवास भऽ गेल छलन्हि। हुनकर आब कियो आश्रयदाता नहि रहलन्हि ताहि सँ भोर होइत देरी ओ अपन पुत्र संग भीख मांगय निकलि पड़ैत छलीह। भिक्षाटन सँ मात्र ओ स्वयं आर […]

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