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विदेहराज जनक केर सर्वोत्तम शिक्षाः शुकदेवजी केँ तत्त्वोपदेश

विदेहराज जनक केर सर्वोत्तम शिक्षाः शुकदेवजी केँ तत्त्वोपदेश

नवरात्रक छठम् दिनः आजुक प्रसाद विदेहराज जनकजीक तत्त्वोपदेश   विदित हो जे व्यासपुत्र शुकदेवजीक जन्म विशेष परिस्थिति मे भेलनि आर ओ गार्हस्थ जीवन सँ अलग पूर्ण संन्यास जीवन मे रहबाक मानसिकता शुरुहे सँ बनौने छलाह। सुविज्ञ पिता द्वारा बहुतो समझेला-बुझेलापर ओ गार्हस्थ जीवन सँ जुड़ल शिक्षा लेबाक लेल तत्कालीन महान सिद्ध-प्रसिद्ध शिक्षक विदेहराज जनक समीप […]

नवरात्रक प्रसादः हनुमान चालीसाक महत्व आ आस्थावान लेल उपयोगिता पर प्रकाश

नवरात्रक प्रसादः हनुमान चालीसाक महत्व आ आस्थावान लेल उपयोगिता पर प्रकाश

नवरात्रक दोसर दिनः आजुक विशेष प्रसाद   श्रीहनूमते नमः!!   जानकी-राघव केर अत्यन्त खास भक्त आ आशीर्वाद सँ सम्पन्न अष्ट-चिरंजीव मे सँ एक हनुमानजी केँ हम प्रणाम करैत छी। श्रेष्ठ गुरुवर पंडित जीवनन्दन झा केँ स्मृति मे अनैत हनुमानजीक अद्भुत रूप जाहि मे स्वयं महादेव केर अंश समाहित अछि, संग मे पार्वती सेहो छथिन – […]

कि छलन्हि भक्त प्रह्लाद केर प्राण रक्षाक सूत्र, पिता-पुत्र वार्ता सँ प्रत्यक्ष

कि छलन्हि भक्त प्रह्लाद केर प्राण रक्षाक सूत्र, पिता-पुत्र वार्ता सँ प्रत्यक्ष

ध्रुव शर्मा केर आध्यात्मिक विचारक मैथिली अनुवाद विष्णु पुराणमे, पिता हिरण्यकशिपु अपन पुत्र प्रह्लादजी सँ पूछलखिन – प्रह्लाद! तोहर एहि अतुलनीय प्रभाव केर कारण कि छौक? हरेक बेर तूँ अपन प्राण कोना बचा लैत छँ (तलवारक वार सँ, विषयुक्त भोजन सँ, अग्नि सँ, हाथीक झूंड द्वारा कुचलल गेला सँ, विषालू सर्पक प्रहार सँ)? कि तूँ कोनो मंत्र जनैत छँ […]

रामायणरूपी जल मे कल्याणकारी तत्त्वः रामचरितमानस सँ सीख – २३

रामायणरूपी जल मे कल्याणकारी तत्त्वः रामचरितमानस सँ सीख – २३

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – २३ निरन्तरता मे अछि ‘रामचरितमानस सँ सीख’ – मैथिली जिन्दाबाद केर पाठक समक्ष स्वाध्याय सँ प्राप्त हीरा-मोती समान शब्दपुञ्ज राखैत हम ओतबे आनन्दित होएत छी जतेक अपने गंभीर बनिकय एकरा पढैत-गुनैत-बुझैत आनन्दित होएत छी। एहि सँ जीवनक यथार्थ महत्व केँ आत्मसात करबाक अवसर भेटैत अछि हमरा लोकनि केँ। आशा करैत […]

रामायणरूपी भक्तिप्रवाहिनी नदीक विलक्षण दर्शन: रामचरितमानस सँ सीख २२

रामायणरूपी भक्तिप्रवाहिनी नदीक विलक्षण दर्शन: रामचरितमानस सँ सीख २२

स्वाध्याय: रामचरितमानस सँ सीख – २२ रामभक्तिरूप – गंगाजी जाहि मे सुन्दर कीर्तिरूपी सुहाओन सरयूजी मिलैत छथि, छोट भाइ लक्ष्मणजी सहित श्रीरामजीक युद्धक पवित्र यशरूपी – महानद सोन अछि – सरयूजी आर सोन केर बीच मे गंगाजी शोभित भऽ रहली अछि। ई तिनू नदी तिमुहानी रामस्वरूपरूपी समुद्रक दिशा मे जा रहल अछि।   एहि कीर्तिरूपी […]

रामायणरूपी सरोवर मे घोंघी, बेंग आ सेवार समान विषय-रसक अभावः रामचरितमानस सँ सीख-२१

रामायणरूपी सरोवर मे घोंघी, बेंग आ सेवार समान विषय-रसक अभावः रामचरितमानस सँ सीख-२१

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – २१ एहि शृंखलाक अन्तिम २०वाँ भाग मे हमरा लोकनि रामायण केहेन सरोवर थिक आर एकर पानि, गहराई, इत्यादि मे कि सब अछि ताहि पर दर्शन सँ भरल सहज शैली मे विवरण सब पढने रही। तेकरे पुनः महाकवि तुलसीदास निरन्तरता दैत आगू वर्णन करैत छथिः   १. रामायण चरित्र केँ सावधानीपूर्वक […]

रामायण केर अति रमणीक स्वरूप केर वर्णनः रामचरितमानस सँ सीख २०

रामायण केर अति रमणीक स्वरूप केर वर्णनः रामचरितमानस सँ सीख २०

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – २० मैथिली जिन्दाबाद पर आइ रामचरितमानस सँ सीख केर २०म भाग प्रकाशित करैत मन-मस्तिष्क रोमांच सँ भरल अछि। गूढ दर्शन केर बात अत्यन्त सहज भाव आ भाषा मे महाकवि तुलसीदास द्वारा बुझायल गेलाक बादो माथ अस्थिर होयबाक कारण घुरमुरा जाएत छैक। तैँ स्वाध्याय केर कोनो आलेख केँ बेर-बेर पठन-मनन कएला […]

रामायण केर नाम रामचरितमानस कियैक, पढब-सुनब आ प्रचार करब सभक कर्तब्य

रामायण केर नाम रामचरितमानस कियैक, पढब-सुनब आ प्रचार करब सभक कर्तब्य

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख १९ आइ १९म भाग मे हमरा लोकनि महाकवि तुलसीदासजी द्वारा शुभ कार्य ‘रामायण’ केर रचना आ ओकर नामकरण ‘रामचरितमानस’ सँ जुड़ल किछु रोचक तथ्य सब पढब। एहि मे चमत्कार केर अनुभूति कवि आ कर्ता केँ कोना होएत अछि ई ज्ञान छुपल अछि। हम सब सेहो कोनो शुभ कार्य आरम्भ करय सँ […]

अनन्त राम केर अनन्त गुणसमूह आर अनन्त अवतारक अनन्त रामायण

अनन्त राम केर अनन्त गुणसमूह आर अनन्त अवतारक अनन्त रामायण

स्वाध्यायः रामच्ररितमानस सँ सीख – १८ महाकवि तुलसीदास केर बेर-बेर नमन – रामचरितमानस सन गुरु नहि भेटत जे गूढ रहस्य केँ सहज उदाहरण व उपमा-उपमेय संग हमरा लोकनि केँ बुझा दैत अछि। आजुक १८म भाग मे श्रीरामजीक गुणसमूह पर विशेष प्रकाश देल गेल अछि। निश्चिते, एकटा भक्त लेल आस्थाक आधार यैह सहज समझ होएत छैक। […]

रामायण केर प्रादुर्भाव आ रामकथाक लाभः रामचरितमानस सँ सीख – १७

रामायण केर प्रादुर्भाव आ रामकथाक लाभः रामचरितमानस सँ सीख – १७

स्वाध्यायः रामचरितमानस सँ सीख – १७ केना भेटल हमरा सबकेँ ई अति सरस रामायण – आउ ताकी एहि प्रश्नक समिचीन उत्तर। संगहि एहि रामकथा सँ हमरा लोकनि केँ कि-सब भेटैत अछि, देखी एक सँ बढिकय एक उपमा आ उपमेय – महाकवि तुलसीदासजी केँ हम बेर-बेर प्रणाम करैत छी जे साहित्यक रस सँ बोरिकय रामकथाक बारे […]

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