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राम नारायण बाबूक दोसर ब्याह

राम नारायण बाबूक दोसर ब्याह

लघुकथा – रूबी झा राम नारायण बाबूक विवाह भेला पाँच वर्ष भय गेल छलैन्ह, लेकिन एखन धरि कोनो संतति नहि भेल छलैन्ह। गाम-समाज केर लोक दिन-राति हुनकर माय केँ कहैय छलखिन्ह जे अपन बेटाक दोसर विवाह करा दियौन, ई पुतोहु तँ अहाँक बाँझ छथि, हिनका सँ वंश केँ वारिस नहि होयत आर अहाँक वंश एतहि […]

सिंगहारक ओ फूल आ कोइलख भगवतीस्थानक ओ दुर्गापूजाक बाल्यकालक संस्मरण

सिंगहारक ओ फूल आ कोइलख भगवतीस्थानक ओ दुर्गापूजाक बाल्यकालक संस्मरण

लेख – वाणी भारद्वाज दुर्गापूजा आ हरश्रृंगार फूलक सुगंध आइ भोर पार्क मे टहलय काल मे हरश्रृंगार गाछ मे फूल लागल आ जमीन पर खसल देखिकय मोन विचलित कऽ देलक. अपन नेनपन केर दुर्गापूजा धक् सं मोन पड़ि गेल. कोइलख गामक भगवती स्थान, मा भद्रकाली प्रांगण मोन पड़ि गेलीह. ओना आन गाम जेकाँ कोइलख मे […]

प्रवीण चौधरीक नवका रैप गीत

प्रवीण चौधरीक नवका रैप गीत

युवा आ किशोर मे बढैत कुलत पर संबोधनार्थ ई गीत थिक। सप्तरी जिलाक भारदह कर्मक्षेत्रक एक युवा लेकिन सुप्रतिष्ठित गीतकार सुमन झा केर अनुरोध पर ई रैप गीत थिक।   सुने सुने बबुआ मोरे सोने बबुआ दुनिया मे मैथिल बौआ खूबे अगुआ…   लोक गेल चान पर मैथिल भेलौ पाछू अगबे टंगघिच्ची फुसिये के नाचू […]

फूलदाय शेरनी त छोटकी पुतोहु भेटलनि सवा-शेरनी

फूलदाय शेरनी त छोटकी पुतोहु भेटलनि सवा-शेरनी

लघुकथा – रूबी झा फूलदाय भरि टोल में सबसँ बेसी बज्जैकर रहैथि। उचित-अनुचित केर ओतेक बोध नहि रहैन, सिर्फ बजनाय बुझथिन्ह। बिना बातक-बात में सब केँ टोकि देथिन, आ भरि टोल घूमल फिरैथि। नवारी में अहि स्वभावक कारण सँ घरवाला सँ कतेक दिन माइर तक खा लैथि, लेकिन ओहि सँ हुनका पर कोनो प्रभाव नहि […]

The Maithili Movement – A Book Review By Prof. Mohammad Sazzad

The Maithili Movement – A Book Review By Prof. Mohammad Sazzad

The Maithili Movement – Prof. Mohammad Sazzad, AMU, India Courtesy: https://frontline.thehindu.com/books/article24200882.ece A nuanced study of the Maithili language and the movement that led to the formation of a modern Maithili community, and its speakers’ resistance to Hindi hegemony. BIHAR is linguistically complex and diverse with spoken languages such as Maithili, Bhojpuri and Magahi, and dialects […]

मिथ्याचारक चाप  (समय-सापेक्ष नैतिककथा)

मिथ्याचारक चाप (समय-सापेक्ष नैतिककथा)

नैतिक कथा – प्रवीण नारायण चौधरी जँ भीतर मनमे कूद-कूद मचल रहय आ बाहर सँ ई आवरण चढेने रहत कि जोगी-फकीर छी, तेकरे कहल जाइत छैक मिथ्याचार। आचार-विचार जेहेन भीतर हो तेहने बाहर, भले गुन्डइ भीतर अछि आ बाहरो अछि तऽ संसार ओकरा नीके कहैत छैक, खास कऽ के एहि कलियुगमे। जतेक राबिन हूड आजुक […]

कर्मयोगी – कथा एक कर्मठ पुत्र आ पुत्रवधू केर

कर्मयोगी – कथा एक कर्मठ पुत्र आ पुत्रवधू केर

कथा – राजेन्द्र झा, वडोदरा, गुजरात मैथिली कथाः शीर्षक – कर्मयोगी राति के दस बाजि गेल रहनि किशुनजी के गाम पहुँचवा में । दुपहरिया के करीब दूइए बजे ट्रेन सँ पटना पहुंच गेल रहथि किशुन । आ तकरा बाद तीन-तीन टा बस बदलैत – बदलैत अप्पन गाम पहुंचल रहथि । मोन खिन्न भ’ गेल रहनि […]

नेनपन मे टायर गाडी के रोमाचकारी यात्रा

नेनपन मे टायर गाडी के रोमाचकारी यात्रा

यात्रा संस्मरणः बचपन आ टायरगाड़ीक यात्रा – वाणी भरद्वाज बात तहिया के अछि जहिया हमर उमर सात वा आठ बरष रहल होयत. दादी गाम हमर नवानी अछि. पीसी के बौआ भेल छलैन्ह. बच्चा के सेहंता मे जबरदस्ती दादी लग रूकि गेलहु. ओतय पहिने एक टा आर पीसी (मामा बाबा के बेटी) जे हमरा सं पाच […]

संगीताक विवाह आ वरक परिछन

संगीताक विवाह आ वरक परिछन

मिथिला मे नारी-समाजक विशेषाधिकार सँ जुड़ल एक चर्चा – रूबी झा आय सँ करीब तीस-बत्तीस साल पहिनहु तक गाम-घर में बेटा-बेटी केर विवाह में मायक बाजय के कोनो अधिकार नहि रहैत छलन्हि, अधिकांश घर में। लेकिन मिथिला में वर के जे विवाह राति में परिछन होइत छन्हि, ओहि विधक अर्थ हमरा जनतबे यैह होइत छैक […]

नेनपन के किछु झलफल स्मरण – अलकतरा सँ पाटल ओ बगीचा

नेनपन के किछु झलफल स्मरण – अलकतरा सँ पाटल ओ बगीचा

लेख – वाणी भारद्वाज नेनपन के किछु झलफल स्मरण जहिया हमर पिताजी लौकही ब्लौक मे चिकित्सा पदाधिकारी छलाह. हम सब सरकारी आवास मे रहैत छलहुँ. घरक सीध मे चिकित्सालय छल. घरक बाम कात थाना छल. तहिया सेंध मारि क चोर चोरी करैत छल सेह बड पैघ बात होइत छल. आ चोर के पुलिस पकडैत छल. […]