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कोरोना – प्रकृति द्वारा पूर्वस्थिति मे वापसीक निरन्तरता

कोरोना – प्रकृति द्वारा पूर्वस्थिति मे वापसीक निरन्तरता

कोरोना – Continuous Roll Back By Nature (कोरोनाः प्रकृतिक पूर्वस्थिति मे वापसीक निरंतरता) – देवांशी चौधरी, बी-टेक (प्रथम वर्ष), वीआईटी युनिवर्सिटी, वेल्लोर बहुत अजीब लागि रहल अछि हमरा ई सोचिकय जे काल्हि तक जे दुनिया भरिक लोक अलग-अलग विषय मे अपन-अपन अलग-अलग राय द’ क’ लड़ैत रहय pro-CAA anti-CAA, हिन्दू-मुस्लिम, रोनाल्डो-मेशी, आदि मुद्दा पर, आइ […]

चर्चित बहुभाषिक कवि लक्ष्मण नेवटियाक दुइ मैथिली रचना

चर्चित बहुभाषिक कवि लक्ष्मण नेवटियाक दुइ मैथिली रचना

साहित्य मैथिली सँ हमरा बहुत बेसी लगाव अछि नेपाली, मारवाड़ी, हिन्दी, मैथिली, भोजपुरी आदि अनेकन भाषा मे साहित्यिक सृजन कयनिहार बहुचर्चित व्यक्तित्व श्री लक्ष्मण नेवटिया जी काल्हि मैथिली साहित्यिक अभियानक छठम् मासिक गोष्ठी मे अपन विचार व्यक्त करैत बजलाह – “मैथिली सँ हमरा बहुत बेसी लगाव अछि।” मैथिली भाषा-साहित्यक इतिहास आ ऐतिहासिक स्रष्टा विद्यापति सँ […]

कतार एयरवेज मे एशेला संग ओ भेंट आ प्रेम प्रस्ताव

कतार एयरवेज मे एशेला संग ओ भेंट आ प्रेम प्रस्ताव

कथा – विन्देश्वर ठाकुर, दोहा, कतार #कतार_एयरवेजमे_एक_दिन बात सम्भवत: एक बरख पुरान अछि। खाड़ी सँ अपन देश नेपाल जाइत रही। एक दिस गाम जएबाक अकुलाहटि रहए.. दोसर दिस टिकटके मंहगी। कि करू कि नै! समझमे नै अबैत रहे..। एहनमे कम्पनीद्वारा कतार एयरवेजके टिकट देनाइ बुझू जे पाथर तकैतमे महादेव भेटनाइ भेल। मोन प्रसन्नता सँ झुमि […]

सार्थक होली ( लघुकथा )

सार्थक होली ( लघुकथा )

लघुकथा – गोपाल मोहन मिश्र सार्थक होली ( लघुकथा ) पिछला साल के होली दिनक बात छै । करुणा अप्पन घर के पूजा स्थल में विराजित अप्पन कान्हा जी के सुगन्धित पुष्प सं होली खेला रहल छलीह, तखने करुणाक बारह साल के पोती पलक आयल आ कहलक – “दादी माँ, अहाँ एतs बैसल छी आ […]

उकट्ठी छौंड़ा कोना मैथिली छोड़ि आन भाषा मे प्रवेश केलक – व्यंग्य प्रसंग

उकट्ठी छौंड़ा कोना मैथिली छोड़ि आन भाषा मे प्रवेश केलक – व्यंग्य प्रसंग

उकट्ठी मैथिल – प्रवीण नारायण चौधरी   विद्यालय मे ओकर तुलना तेज विद्यार्थी मे होइक, परन्तु ओकरा भीतर एहेन कोन कमजोरी छलैक जे कनिको टा बात ओ नहि पचा पाबय, प्रतिक्रियास्वरूप ओ तरे-तरे दोसर सँ ईर्ष्या आ डाह मे मग्न भऽ कोनो न कोनो उकट्ठ काज करय दिस उन्मुख भऽ जायल करय। एहि तरहें ओ […]

बुधनाक होली – मनन योग्य कथा-संस्मरण

बुधनाक होली – मनन योग्य कथा-संस्मरण

कथा-संस्मरण – विन्देश्वर ठाकुर, दोहा, कतार बुधनाक होली रवि दिन, साँझुक सात बजे खाना खा हम बेडपर ओंगठल छी। खाटके आगु कने दहिना साइडमे एकटा टेबल छैक। टेबल पर राखल छैक LG कम्पनीक सेकेन्ड हैन्ड कलर टि.भी। हमर रूममे चारिगोटे। ताहि मे सँ एकगोटेक नाइट ड्युटी। दोसर बाहर गेल रहैक आ तेसर सायद किचेनमे खाना […]

की कविता मरि रहल अछि – अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर अखिल भारतीय विमर्श मे मंथन

की कविता मरि रहल अछि – अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर अखिल भारतीय विमर्श मे मंथन

साभारः दिलीप कुमार झा, मैथिली साहित्यकार, मधुबनी अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर भारतक मणिपुर राज्यक राजधानी इम्फाल मे आयोजित अखिल भारतीय कविता उत्सव मे राखल गेल विमर्श जेकर विषय छल – की कविता मरि रहल अछि, जाहि मे स्वयं मैथिलीक प्रतिनिधित्व करैत लेखक दिलीप कुमार झा सहभागिता देने छलाह, ओ आबिकय ओहि विमर्शक अत्यन्त सारगर्भित संवाद […]

आबि गेल होली फेर – होली पर विन्देश्वर ठाकुरक सुन्दर कथा-माहात्म्य

आबि गेल होली फेर – होली पर विन्देश्वर ठाकुरक सुन्दर कथा-माहात्म्य

साहित्य-कथा – विन्देश्वर ठाकुर, दोहा, कतार होली आ एकर महत्व   होली वास्त्वमे असत्य ऊपर सत्य केर विजय थिक। झूठ पर साँचक जीत थिक। होलीके होरी, फगुआ, फाग आदि नाम सँ सेहो जानल जाइत अछि। वसन्त ऋतुमे फागुन पूर्णिमाक दिन ई पावनि मनाओल जाइत अछि। होरी सँ ठीक पन्द्रह दिन पहिने मिथिलाक पावन भूमी कौचरी […]

मैथिली मे जे सब देखल

मैथिली मे जे सब देखल

मैथिली मे जे सब देखल – प्रवीण नारायण चौधरी   लगभग एक दशकक समयकाल अपन फेसबुक यात्रा मे ‘मैथिली’ भाषाभाषी केँ अपन मातृभाषा संग असीम अनुराग देखल।   कविता, कथा, नाटक उपन्यास, गजल आ गीत विभिन्न विधा मे हजारों मैथिली सर्जक केँ अपन सृजनकर्म करैत देखल।   लाखों मैथिलीभाषी केँ भाषिक पहिचान प्रति आत्मगौरव क्षेत्रीय […]

प्रवीणक डायरी २०१३ – भाग ३

प्रवीणक डायरी २०१३ – भाग ३

६ फरवरी २०२०. मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली-मिथिलाक गतिविधि केँ सर्वाधिक उत्कर्ष पर पहुँचबाक वर्ष छल २०१३ – एहि सँ पूर्व केर दुइ भाग मे दिसम्बर आ नवम्बर केर सारा गतिविधि, बात-विचार आ लेख-रचना सब शेयर कय चुकल छी। आउ आइ अक्टूबर २०१३ केर यात्रा करीः ३१ अक्टूबर २०१३ एह…… मैथिली आ हम? (व्यंग प्रसंग) चलू! चलू!! […]