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मिथिलाक ऐतिहासिक विभूतिः विद्यापति

मिथिलाक ऐतिहासिक विभूतिः विद्यापति

मिथिलाक इतिहासः विद्यापतिक परिचय विद्यापति (१३५० सँ १४४८ ई.)   विद्यापति केँ मैथिली भाषाक खंभा टा नहि अपितु मैथिली आन्दोलन आ मैथिली पहिचानक शक्तिक रूप मे सेहो मानल जाएत अछि। विद्यापति पर्व समारोह मार्फत मैथिल जनगण मे भाषिक चेतना जागरणक बहुत पैघ महत्वपूर्ण भूमिका निभायल गेल अछि। एकमात्र कवि विद्यापति आ भाषा मैथिली मे ई […]

स्त्री रौद अछि, पानि अछि, बसात अछि,

स्त्री रौद अछि, पानि अछि, बसात अछि,

रविन्द्र भारती (खजौली) ११.०३.२०१७ , दिन – शनिवार नरेंद्र कुमार जी खजौली (मधुबनी) बाजारक दवाई विक्रेता अछि , अपन काज के व्यस्था के रहितो एहन अमूल रचना केलैन । हिनका मैथिलि आ मिथिला के प्रति अपर स्नेह रखैत छैन, हिनक मैथिलि आ हिंदी दुनु भाषा में आहि कविता के रचना केलैन। आ मैथिलि जिंदाबाद समूह […]

होली विशेष मैथिली गीत

होली विशेष मैथिली गीत

गीतः दारू सब जगह चलै छै… – अशोक कुमार सहनी, रघुनाथपुर, लहान-४ (हालः दोहा, कतार) होली में चलै छै, दीवाली में चलै छै नाच में चलै छै, गजल में चलै छै शादी में चलै छै, तलाक मेें चलै छै जनम दिन में चलै छै, मरण दिन में चलै छै दारू सब जगह चलै छै… घर […]

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवसपर अहाँक रचना जन-जनकेँ समर्पित

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवसपर अहाँक रचना जन-जनकेँ समर्पित

मैथिली जिन्दाबाद विशेषः अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवसपर अहाँक पठाओल रचना १. सुप्रसिद्ध गीतकार डा. चन्द्रमणि झा संगोर शाँत छी कमजोर नहि हठ-यतन गठजोर नहि। भावना-भव ओर नहि मित्रताके छोर नहि ।। भिन्न लक्षण रूप यौवन मन विभेदक जोर नहि अपन सुख हँसिकs बँटै छी सहन आँखिक नोर नहि। फूल नगरक हो कि गामक गंध बेशी-थोड़ नहि खेत […]

जाहि आगि सँ पकलौं वैह सँ देह-हाथ सेकऽ पड़ैत अछिः ज्योति

जाहि आगि सँ पकलौं वैह सँ देह-हाथ सेकऽ पड़ैत अछिः ज्योति

मैथिली कविताः हम आ हमर देश – ज्योति यादव, कक्षाः १२, कान्तिपुर हायर सेकेन्डरी स्कूल, विराटनगर । Jyoti Yadav जे आइग सँ पकलौं यौ मैथिल उहे स देह-हाथ सेकऽ पड़ैत अछि जे आइग सँ…… जे छी दुश्मन देश के यौ मैथिल ओकरे लेल जियय के भीख मांगय पड़ैत अछि जे आइग सँ पकलौं यौ मैथिल…. […]

अहीं द्वारे हम लिखय छी – से बुझियौ

अहीं द्वारे हम लिखय छी – से बुझियौ

कविता  – उदयचन्द्र झा ‘विनोद’ अही्ं दुआरे हम लीखैछी से बुझियौ अहाँ न जीलहुँ तैँ जीबै छी से बुझियौ अहाँ संग भोरे उठि सातु पिबैत रही अहाँ न छी तैयो पीबै छी से बुझियौ हमर चालि मे जतय जतय आपत्ति रहय से सब आब न हम करै छी से बुझियौ शयन कक्ष मे जूता चप्पल […]

मैथिली कथाः बाबूजी

मैथिली कथाः बाबूजी

मैथिली कथाः बाबूजी – सुजीत कुमार झा, जनकपुरधाम जखन रिक्सा बाहर आबि कऽ रुकल तऽ भोर भेलाक बादो एखनो दूरसँ अन्हारे लगैत छल । ओ अपन घरक गेटक आगाँ रिक्सा रुकबौलन्हि आ सामान उतारि कऽ ओकरा पैसा दऽ बिदा कएलन्हि । रिक्सा गेलाक किछुदेर बादधरि ओ अपन सामान लऽ ओतहि ठाढ़ रहलाह । हुनकर घरबला पंक्तिमे […]

कथाकार सुजीत झाक नवका मैथिली कथाः मीना कुमारी

कथाकार सुजीत झाक नवका मैथिली कथाः मीना कुमारी

मैथिली कथाः मीना कुमारी – सुजीत कुमार झा, जनकपुरधाम ओ समय भोरक छल, मुदा फेकनकेँ हुनके बड़का बेटा प्रदीप आ छोटका उदित बहुत कड़ैक कऽ धमकौलक, एकरबाद खोपड़ी लग-पासक समय गरमा गेल छल । फेकन आश्चर्यमे छला । दुनू बेटा हुनक कमाइसँ किनल गेल टाटा सुमोमे बैसि कऽ धरधरबैत निकलि गेल । फेकनकेँ नाचए गाबएकेँ […]

प्रसिद्ध गीतकार डा. चन्द्रमणि केर नवका गीत ‘हाय रे तोरी भल्ला के!’

प्रसिद्ध गीतकार डा. चन्द्रमणि केर नवका गीत ‘हाय रे तोरी भल्ला के!’

गीत – डा. चन्द्रमणि झा, दरभंगा हाय रे तोरी भल्ला के ! खाली अपने देह ने तकियौ ओहि गामवाली के देखियौ कनसा के ओ मोटकी कनियाँ छोड़िके भगलै पहिलुक दुनियाँ जकरा घर बुनियाँ छनि रहलै ढेका धएलक लल्ला के।। हाय रे तोरी… ओकरा घर मे जाधरि रहलै सतभतरी सन उलहन सहलै आब समध कए नव […]

हे गै दिलतोड़िया दिल हमर किऐ तोड़लें गैः कमल महतोक गीत

हे गै दिलतोड़िया दिल हमर किऐ तोड़लें गैः कमल महतोक गीत

गीतकार-गजलकारः कमल महतो, जनकपुर गजल   किए गेलौ पिया सात समुन्द्र पार यौ। अाइब जाउ पिया छोड़िकऽ कतार यौ॥   सुनसान लगैअ घर अाँगन अा दलान यौ। निक न लगैयऽ करैत अहाँ बिन सिंगार यौ॥   ने चाही कोठा अटारी ने चाही मकान यौ। ने चाही गरो-गहना ने चाही लाख हजार यौ॥   सब दुनिया […]