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पड़िते सिनूर बेटी भेलें तूँ आन गै – मिथिलेश राय केर ई भावुक करयवला मैथिली विदाई गीत

पड़िते सिनूर बेटी भेलें तूँ आन गै – मिथिलेश राय केर ई भावुक करयवला मैथिली विदाई गीत

मैथिली गीत – मिथिलेश राय !! बेटी बिदाई गीत !! नयना सँ नोर बहए जाय छँए कुन गाम गै केहन विधि के विधना अपनों भेल आन गै तोरे में बसै छौ बेटी हमर पराण गै पड़िते सिनुर बेटी भ गेलें आन गै १ – हमर करेजाक टुकड़ा नहीं छँए तुँ आन गै तोरा बिनु कोना […]

मैथिल कविक दूरदृष्टि – त कि सच्चे अकालक लक्षण स्पष्ट भऽ रहल अछि मिथिला मे?

मैथिल कविक दूरदृष्टि – त कि सच्चे अकालक लक्षण स्पष्ट भऽ रहल अछि मिथिला मे?

मैथिली कविता – मणिकान्त झा अकालक लक्षण अकालक लक्षण लागि रहल अछि काग बजैए जोर सँ वर्षा बिनु जन-जन थिक कलुशित कानय सब क्यो नोर सँ। पीबा धरि लेल जल नहि भेटय मिथिला धारक थिक नैहर बाढ़िक अबिते अपसियांत सब टूटय लागय बान्ह छहर सब दिन दुखे काटति रहलहुँ देखि लीय से ओर सँ अकालक […]

विमलाक विवाहक बेर

विमलाक विवाहक बेर

लघुकथा – रूबी झा कहल गेल छै गरीब जन्म लेनाय अभिशाप नहिं परन्तु गरीब भ क मैर गेनाय बहुत बड़ा अभिशाप होइछ। विमला देखैत बहुत सुंदर छलीह, और सातवीं पास सेहो, पढय के आगु मोन बड होइन परंतु आर्थिक स्थिति बहुत खराब रहैन परिवार के, ताहि कारण पढाई बीचे में छोड़य पड़लैन। पिताजी केर थोड़-बहुत […]

विचार-मंथनः अनुत्तरित प्रश्न?? (एक अवश्य पठनीय लेख)

विचार-मंथनः अनुत्तरित प्रश्न?? (एक अवश्य पठनीय लेख)

विचार-मंथन  – डा. लीना चौधरी (मूल लेख – हिन्दी मे, अनुवाद – प्रवीण नारायण चौधरी) अहाँ केँ कोन सवाल सब सँ बेसी विचलित केलक कुंती, पहिल संतान केँ नहि अपना पेबाक पीड़ा या द्रौपदी केँ कोनो सामान जेकाँ अपन पाँचो पुत्र केँ सझिया बाँटि देबाक बात? चूँकि अहाँ स्वयं सेहो स्त्री छलहुँ, तखन द्रौपदीक पीड़ा […]

जीवनक संघर्ष (मैथिली कविता)

जीवनक संघर्ष (मैथिली कविता)

कविता – वन्दना चौधरी बैसल छेलौं बहुत प्यासल, व्याकुल एकटा गाछ के तर में जे कखन ओ इनार स बान्हल डोरी जाहि में छै एकटा डोल बान्हल, ओ ऊपर आओत और हम अपन प्यास बुझेब। तखने आओल एक झंझावात के आवाज़, मोन त कुही भके कनेय लागल, किये त आब हम पियासल रैह जेब। ओ […]

निखंड साड़ी आ काकी संग बरसाइत पाबनिक पूजा

निखंड साड़ी आ काकी संग बरसाइत पाबनिक पूजा

मैथिली लघुकथा – रूबी झा बरसाइत पावैन छल। मीना कहली पति सँ सब आय नव नुवा पहिरै छै, हमरा त अहाँ किनो नै देलौं। पिछलो साल नैहर गेल रही भातिजक उपनयन में भेटल विदाई में नुवा उहे पहिर क’ केलौं। एते बात सुनि बजला विद्या नन्द (मीना के पति), “अगर अहाँ २०टा टका हर महिना […]

गोपाल बाबूक दुइ कवितः ईर्ष्या आ लाटरी

गोपाल बाबूक दुइ कवितः ईर्ष्या आ लाटरी

कविता – गोपाल मोहन मिश्र १. ईर्ष्या कियै हम अप्पन दुख सं बेसी, दोसरक सुख सं दुखी होईत छी । कियै ईर्ष्याक आगि में तपि कै, कुंदन तs नहि, मात्र कोइला बनि सुलगैत छी ।   एतेक सुलगलहुं कि अप्पन खुशीक चमक सेहो धुंधला लागय लागल, नहि देखि सकलहुं अप्पन सुख अप्पन आनंद,मात्र कुढ़ति रहलहुं, […]

सरला केँ रेडियो कीनबाक सख भले पूरा नहि भेलनि लेकिन वैह सख जीवन बना देलकनि

सरला केँ रेडियो कीनबाक सख भले पूरा नहि भेलनि लेकिन वैह सख जीवन बना देलकनि

मैथिली लघुकथा – रूबी झा कहल गेल छै भाग्य स बेसी और समय स पहिने ककरो किछु नै भेटै छै। हमरा जनैत ई बात शत-प्रतिशत सत्य छै। एक टा महिला छलैथि जिनकर नाम सरला छलैन हुनका रेडियो के बहुत ज्यादा सौख रहैन। भाय हुनका ३००टका द क गेलखिन ओ सोचली एकर रेडियो कीनि लेब, लेकिन […]

दादीक परिस्थिति

दादीक परिस्थिति

मैथिली लघुकथा – डा. लीना चौधरी ओहो केहेन दिन छल जखन घरक कर्ता-धर्ताक सारा पड़हक छाउरो ठंढा नहि भेल छलन्हि आ दोसर दिश घरक लोक सब सम्पत्तिक बँटवारा लेल पंचायत बैसा लेने रहय। दादाजीक जिबैत धरि संयुक्त परिवार रहल, लेकिन आब हुनका चलि गेला सँ हुनकर सहोदर भाइ व हुनका लोकनिक परिवार केँ ई डर […]

हीरा बहिनक हीरा भाइ-भाउज-परिवार (लघुकथा)

हीरा बहिनक हीरा भाइ-भाउज-परिवार (लघुकथा)

मैथिली लघुकथा – रूबी झा हीरा १७ साल के रहैथि तहने हुनका पर विपत्ति के पहाड़ टूटि गेलनि। पति स्वर्गवासी भ गेलखिन और हुनकर जिन्दगी अन्हार भ गेलनि।हीरा के माँ पहिनहे स्वर्गवासी भ गेल रहथिन। और हुनक पिताजी दोसर विवाह क लेने रहथि और हीरा सब भाइ-बहिन पर बिल्कुल ध्यान नै दैथि। हीरा स जे […]

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