Home » Archives by category » Article » Literature

प्रत्येक नारीक जीवन मे तीन चरण – जे बुझत से जियत जीवन

प्रत्येक नारीक जीवन मे तीन चरण – जे बुझत से जियत जीवन

लेख-विचार – ममता झा “नारी अहाँक रूप अनेक” – हम पुछलहुँ लोक सब सँ जे नारीक कतेक रूप अइ… कियो माँ कहलक, कियो बहिन कहलक, कियो हमसफर, कियो ममता के मूरत त कियो दोस्त त कियो सच के सुरत कहलक। सब अपना-अपना हिसाब सँ वर्णन केलक। नारीक जन्म आ जीवनक पड़ाव तीन बेर अबैत अइ। […]

एतेक मे वर कि बरदो नहि भेटत आइ

एतेक मे वर कि बरदो नहि भेटत आइ

लघुकथा – रूबी झा दहेज के मूल अर्थ बिसैर हम मिथिलावासी बेटा केँ बरद-महिस जेकाँ अपन दाम लगबैत छी। बेटा केँ बाप बेचैय छथि आ बेटी केँ बाप खरीदैत छथि। ई घृणीत कार्य सब सँ बेसी हमर सबहक ब्राह्मण समाज में होइत अछि। वर केँ दहेज जतेक देल गेल ओहि हिसाबे कनियाँ केँ नुवा, गहना, […]

श्रीहित ध्रुवदासजी – भगवान् केर एक अनुपम भक्त केर कथा

श्रीहित ध्रुवदासजी – भगवान् केर एक अनुपम भक्त केर कथा

स्वाध्याय लेखः श्रीहित ध्रुवदासजी – संकलनः कल्याण, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी श्रीध्रुवदासजीक घरक कि नाम रहनि, किछु पता नहि। हिनकर पूर्व-संस्कार हिनका मे मात्र ५ वर्षक अवस्था मे उत्कट वैराग्य आर प्रभु-प्रेमक लगन उत्पन्न कय देने रहय। बालकभक्त ध्रुव सेहो ५ वर्ष मे अपना मे एहेन लगन पेने रहथि। एहि साम्य केर कारण हिनका लोक […]

सावन महीना मे कि खाय आ कि नहि खाय – कियैक नहि खाय

सावन महीना मे कि खाय आ कि नहि खाय – कियैक नहि खाय

सावन विशेष आलेख सावन मास मे कि खाय, कि नहि खाय – साभारः वेब दुनिया, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी   श्रावण मास मे किछु खास चीज बिल्कुल नहि खायल जाइत अछि। एहि बरसैत-गरजैत मौसम मे किछु फल सब्जी केँ नहि खेबाक चाही। कियैक तँ एहि सब्जी सभ मे एहि समय विषैलापन बढ़ि जाइत छैक जे […]

युवा रचनाकार बीरेन्द्र कुमार सिंह केर मैथिली रचना

युवा रचनाकार बीरेन्द्र कुमार सिंह केर मैथिली रचना

साहित्य युवा कवि-लेखक बीरेन्द्र कुमार सिंह केर साहित्य रचना १. कविता – “सहोदर सँ लगियौ छाती” प’ह फटलै कोइली कुहकलै सिहरि उठलै छाती मीठे-मीठे कूक सुनादे बगड़िया गबैत चल सुन्दर पाँती कोसी कमला झिर-झिर बहैय’ एहि मिथिला-मधेशक माटी खा ले हमर किरिया सप्पत हम सभ नाती-परनाती जागू यौ कक्का डेग उठबियौ “सहोदर सँ लगियौ छाती” […]

बेटी पुछलनि बाप सँ – हमर कोन गाम थिक (लघुकथा)

बेटी पुछलनि बाप सँ – हमर कोन गाम थिक (लघुकथा)

लघुकथा – रूबी झा सासूर सँ दुइ-चारि बेर रैस-बइस कँ आयला के बाद बहुत दुःखी भऽ पुछलखिन्ह अन्नपूर्णा अपन पिता सँ – बताऊ, हम कोन गामक छी आ हमर घर कतय अछि? अचंभित भय बजलाह नेन कान्त जी (अन्नपूर्णा के पिता) – ई की तोँ पुछैय छैं एखन, ई सवाल पूछैय के कि परोजन? अन्नपूर्णा […]

तारा नन्द दास रचित एक अति-अति विशिष्ट मिथिला-वर्णनः संक्षिप्त मिथिला दर्शन

तारा नन्द दास रचित एक अति-अति विशिष्ट मिथिला-वर्णनः संक्षिप्त मिथिला दर्शन

साहित्य-सृजन – तारा नंद दास, ग्राम- सखवाड़, सरिसवपाही, दरभंगा, बिहार । संक्षिप्त मिथिला-दर्शन सुकृत्य कृत पावन मिथिलाधाम सुसंस्कृत सुंदर श्रेष्ठ महान एतय अवतरित भेली माँ सीता, राजा जनक समान एतय एला पाहुन पुरुषोत्तम राम सदृश भगवान गौतम गेहिनी भेली पावनी पाबि रूप अभिराम रामचरण रज केर प्रभाव सौं एतहि अहिल्याधाम पाग प्रतीक एतय सम्मानक माथ पाग […]

मैथिलीक सुप्रसिद्ध साहित्यकार राना सुधाकर केर ५ गोट विशिष्ट रचना

मैथिलीक सुप्रसिद्ध साहित्यकार राना सुधाकर केर ५ गोट विशिष्ट रचना

साहित्य सम्माननीय स्रष्टा ‘राना सुधाकर’ दिश सँ…… १. गजल बस कथा-पिहानी जीवन अछि सुख-दुःख दर्दक गठबंधन अछि ककरो सँ अपेक्षा राखब नहि बिल्कुल पतझड़ केर मौसम अछि अपनत्वक मतलब आइ कतऽ सभक सम्बन्ध मे अनबन अछि अछि गंधहीन अनुराग हमर किनको आंगन नहि अरिपन अछि आकृति मनोहर बिला गेल चनकल असमय मे दर्पण अछि २. […]

सोनम केर अंगना मे

सोनम केर अंगना मे

लघुकथा – वंदना चौधरी सोनम केर माय अपन बेटा सोहन जे कि इंजीनियर छलैन्ह हुनका लेल कनियाँ तकैत छलीह। कनियाँ एहेन जे कि खूब पढ़ल-लिखल आ देखैयो में खूब सुंदर होयबाक संग घरेलू कामकाज में सेहो दक्ष होइथ। दोसर तरफ सोनम केर लेल सेहो सेटल लड़काक तलाश छलैन्ह। मुदा पहिने सँ एकटा शर्त रखने छलीह […]

फूल दाय आ हुनकर पुतोहु ‘बौआ’

फूल दाय आ हुनकर पुतोहु ‘बौआ’

लघुकथा – रूबी झा फूल दाय केर पाँचटा बेटा छलन्हि। चारिटा शहर में आ एकटा गाम में रहैत छलन्हि। बाहर में जे बेटा सब रहैत छलखिन्ह ओ सब कहैत छलखिन्ह, “माँ तों हमरे सब लग रह, गाम पावैने-तिहारे जायल कर। आब तँ बाबूजी सेहो नैह रहलथि, एतेक दिन तों बाबूजी केर बहाना लगा चलि जाइत […]

Page 1 of 24123Next ›Last »