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सोनालीक आत्मनिर्णय तथा अन्तिम मंजिल

सोनालीक आत्मनिर्णय तथा अन्तिम मंजिल

लघुकथा – रूबी झा सोनाली तेसर बेर माँ बनैय वाली छलैथ,और दुइ टा बेटी पैहने छलखिन्ह। एहि बेर सासूरक पूरा परिवार यानि कि सासु-ससुर, पति, दियादनी-भैंसुर, ननैद, दियर सब मिलिकय कहैय छलखिन्ह दिन-राति, अहाँ चलू अस्पताल अल्ट्रासाउंड कराबऽ लेल, अगर फेरो बेटिये हैत तँ ओकरा सफैया करबा लेब, माने जे कोखिये में कन्या-भ्रूण हत्या कय […]

जीवन एकटा कठही गाड़ी – हिम्मत नै हारी, हिम्मत नै हारी

जीवन एकटा कठही गाड़ी – हिम्मत नै हारी, हिम्मत नै हारी

गीत – प्रदीप पुष्प जीवन – गीत जिनगी एकटा कठही गाड़ी हिम्मत नै हारी, हिम्मत नै हारी कतबो थाकल होइ सवारी हिम्मत नै हारी, हिम्मत नै हारी १) कखनो सुख केर चिक्कन बाट होइ कहियो दुख केर खाधि अभरि जाय कहियो नौ – छह थार साजल होइ कहियो भुखले दिवस गुजरि जाय मूँह मलिन नै […]

एक गृहस्थ केँ केना जीबाक चाही – साधारण नियम लेकिन महत्वपूर्ण अछि सभक लेल

एक गृहस्थ केँ केना जीबाक चाही – साधारण नियम लेकिन महत्वपूर्ण अछि सभक लेल

गृहस्थ लेल साधारण नियम (स्रोत: कल्याण) १. प्रातकाल सूर्योदयसँ पहिले उठू। २. उठिते भगवान् केर स्मरण करू। ३. शौच-स्नान आदि सँ निवृत होइत भगवान् केर उपासना, सन्ध्या, तर्पण आदि करू। ४. बलिवैश्वदेव (नमकरहित पाकल भोजनसँ अग्निकेँ हवन) केलाके बाद समयपर भोजन करू। ५. रोज प्रातकाल माता, पिता आ गुरु आदि श्रेष्ठजनकेँ प्रणाम करू। ६. इन्द्रियकेर […]

“प्रारम्भिक राजतंत्रः विदेह”   (मिथिलाक इतिहास, लेखकः डा. उपेन्द्र ठाकुर)

“प्रारम्भिक राजतंत्रः विदेह” (मिथिलाक इतिहास, लेखकः डा. उपेन्द्र ठाकुर)

इतिहास – डा. उपेन्द्र ठाकुर “प्रारम्भिक राजतंत्रः विदेह”   (मिथिलाक इतिहास, लेखकः डा. उपेन्द्र ठाकुर)   विदेह नाम सम्बद्ध प्रदेश तथा एकर जनता एहि दुनूकेँ देल गेल छलैक। ब्राह्मण ग्रन्थ सभक सम्पादनक समय मध्यदेशक पूर्वमे कौशल विदेह नामक सजातीय जन सभक महासंघ छल, जकर महत्व पुरु-पंचाल जन सभसँ थोड़बो कम नहि छलैक।*१ प्राचीनकालमे विदेह देश […]

चनादाय केर सवाल पुरूष प्रधान समाज सँ छन्हि – वाणी भारद्वाजक टटका लघुकथा

चनादाय केर सवाल पुरूष प्रधान समाज सँ छन्हि – वाणी भारद्वाजक टटका लघुकथा

लघुकथा – वाणी भारद्वाज एकपक्षीय निर्णय सं क्षुब्ध चनादाय चनादाय तीन साल पर अपन माँ लग जा रहल छलीह. गृहस्थी मे ओझरायल तइयो एहि बेर चारिये दिनक असगरे धिया-पुताक घरबला पर छोड़ि स्वयं नैहरा जाय लेल उत्साहित छलीह. माँ अपन छोट बालक आ हुनकर पत्नी तथा दुइ टा बच्चा संगे रहैत छलीह. जेना अपन खुट्टा […]

आजुक मैथिलानी अपन गृहस्थी आ बाल-बच्चाक पालन पोषण केना करथि (विज्ञ विचार)

आजुक मैथिलानी अपन गृहस्थी आ बाल-बच्चाक पालन पोषण केना करथि (विज्ञ विचार)

लेख – स्नेहा प्रकाश ठाकुर जतय चाह ओतय राह “अहाँ केना मैनेज करैत छी ?” ई प्रशन हमरा स अनगिनत बेर पूछल जा चुकल अछि । और हर बेर हम ईहे जवाब दैत छी जे हम एक टा औरत छी और माँ भी, हम किछुओ कय सकैत छी । एक टा औरत खुद भी अपन […]

हाकिम भाइक दू-नेतः बहिन आ बेटी मे फर्कक मार्मिक कथा

हाकिम भाइक दू-नेतः बहिन आ बेटी मे फर्कक मार्मिक कथा

लघुकथा – रूबी झा बेटी-बहिन केँ बहुतो व्यक्ति बड आन कय केँ बुझति छथि। जुग बदललैया, बेटीक प्रति पिताक बहुत हद तक सोच बदललैन्हें, लेकिन बहिन के प्रति एखनो लगभग ओहने सोच हावी देखैत छी। एहि बात केर उदाहरण समाज में बहुतो जगह अपने लोकनि देखने हेबैय। देवचन्द्रबाबू सरकारी आला अधिकारी छलथि। बहिनक विवाह में […]

अद्भुत आ समर्पित युवा समाजसेवी मनोज शर्मा

अद्भुत आ समर्पित युवा समाजसेवी मनोज शर्मा

विशिष्ट व्यक्तित्व परिचयः मनोज शर्मा – दहेज मुक्त मिथिलाक दरभंगा संयोजक, एक अद्भुत समर्पित युवा समाजसेवी – प्रवीण नारायण चौधरी अभियानी हुअय त एहेन!   बात २०१७ ईस्वीक थिकैक। दहेज मुक्त मिथिला अभियान सँ प्रेरित भेनिहार मे २ टा मिथिलाक बेटा शामिल भेलाह। एकटा पूणे सँ, एकटा मद्रास सँ। दुनू वीर सपूत छथि अपन धरतीक। […]

सफल महिलाक जीवन मे पतिक महत्व ‍- स्नेहा प्रकाश ठाकुरक लेख ‘हमर जीवनसाथी’

सफल महिलाक जीवन मे पतिक महत्व ‍- स्नेहा प्रकाश ठाकुरक लेख ‘हमर जीवनसाथी’

लेख – स्नेहा प्रकाश ठाकुर हमर जीवनसाथी मैथिली में एक टा फकरा छैक जे हाथी चढ़ि क गौरी पूजलौं जे एहेन वर भेटल, सैह हम अपन दिया बुझइ छी। आइ हम बात करब अपन जीवनसाथी प्रकाश कुमार ( B.E electrical) के । हमर बियाह भेल 24 फरवरी 2012 केँ । हम ओहि समय एमए द्वितीय […]

मिथिलाक इतिहासः धारावाहिक – मिथिला निर्माण केना भेल तेकर रोचक पौराणिक गाथा

मिथिलाक इतिहासः धारावाहिक – मिथिला निर्माण केना भेल तेकर रोचक पौराणिक गाथा

मिथिलाः उत्पत्ति एवं नाम – डा. उपेन्द्र ठाकुर (निरन्तरता मे… क्रमशः सँ आगू) एहि भूमिक उद्भवक एकटा रोचक कथा विष्णुपुराण मे भेटैछ जकर अनुसरण श्रीमद्भागवत कयलक अछि। एहि विवरणक अनुसार इक्ष्वाकुक पुत्र निमि सहस्रवर्षव्यापी यज्ञ प्रारम्भ कयलनि तथा वसिष्ठकेँ आचार्य बनबा लेल कहलथिन। वसिष्ठ उत्तर देलथिन जे “अहाँ पाँच सय वर्ष धरि प्रतीक्षा करू, कारण […]