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तीन गीत – शिव कुमार झा टिल्लू

तीन गीत – शिव कुमार झा टिल्लू

1 विवाह गीत (धुन कजरी ) शिव कुमार झा टिल्लू ************************************ वरक रूप देखि सभ बमबम छमछम सारि नाचै छथि ना गितहारिन सभ मंद मुसकि क’ कोबर गाबै छथि ना ….. अपने सरहोजि आसन ओछौलनि कनिया वर केँ संग बैसौलनि गितहारिन लेल सासु विलक्षण विझणी बाँटै छथि ना …. नवका दुलहा गुणक सरोवरि धन सम्पति […]

सुन्न आँगन मे चान लऽ एलै – शिव कुमार टिल्लू

सुन्न आँगन मे चान लऽ एलै – शिव कुमार टिल्लू

सुन्न आँगनमे चान ल’ एलै ( गीत ) शिव कुमार झा टिल्लू **************************** जखने मारलि सजल नैन वाण ई देह निष्प्राण भ’ गेलै छोड़लि रभसल सुधा ठोर तान ओ फेरसँ परान ल’ एलै …. रीति प्रीतिक फिकिर कोन बाते संग श्वेत- रास आन रहू काते हमर जिनगी भेल प्रेयसीक मान बूड़ल सन मुस्कान ल’ एलै […]

मोरंग सँ मऊ धरि एक बनाउ – शिव कुमार झा टिल्लू

मोरंग सँ मऊ धरि एक बनाउ – शिव कुमार झा टिल्लू

मोरंग सँ मऊ धरि एक बनाउ शिव कुमार झा टिल्लू ************************* सुनू औ मीत प्रीतिक संगीत अपन संस्कृति केर अलख जगाउ भुवन संग मधुप सुमन सेहो भूप आरसी दीपक -इजोत बढाउ हमरे गज आ हमर नवीन हमरे राज आ हमहीं दीन !!! वियोगी -हासमी- अमर -प्रवीण एक मैथिल टा जाति बनाउ………… विहंगम वयना लाज बचौलनि […]

शिक्षाक माध्यम आ ओकर प्रभाव

शिक्षाक माध्यम आ ओकर प्रभाव

विश्व भरि मे प्रसिद्ध छैक जे कोनो भाषाक कथनीकेँ अपना मातृभाषामे अनुवाद करू आ सबसँ नीक जेकाँ ओहि कथनक सारकेँ बुझू। प्राचिन समयसँ लैत वर्तमान आधुनिक शिक्षा प्रणालीमे लोकभाषाक महत्त्व सर्वोपरि छैक। शिक्षककेँ प्रशिक्षणकालसँ लैत निर्देश-पत्रिका मार्फत सेहो यैह सिखायल जाइत छैक जे गूढ सँ गूढ ज्ञानकेँ छात्रक मातृभाषा (स्थानीय भाषा) मे सिखाउ, ताहिसँ समझ-शक्ति […]

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् – जमशेदपुर अध्यक्ष मे अमलेश झा निर्वाचित: अन्तर्वार्ता

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् – जमशेदपुर अध्यक्ष मे अमलेश झा निर्वाचित: अन्तर्वार्ता

– प्रवीण नारायण चौधरी, विराटनगर, मार्च १५, २०१५, मैथिली जिन्दाबाद! अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद् – मिथिलाक एक प्राचिन सुसंगठित संस्था जे भाषिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक आ सामाजिक विषय पर कार्य करैत आबि रहल अछि आ जेकर सबसँ मजबूत शाखा जमशेदपुर केँ मानल जाइत अछि, ताहि संस्थाक अध्यक्षक रूप मे अनेको बुजुर्ग-पुरान नेतृत्वकर्ताक सोझाँ युवा नेतृत्वक जीत वर्तमान […]

सलहेशक फूलबाड़ी मे फूलायल अनुपम फूल

सलहेशक फूलबाड़ी मे फूलायल अनुपम फूल

– सुनील गुप्ता, सिरहा। मार्च १५, २०१५. मैथिली जिन्दाबाद। मिथिलाक लोकराजा – लोकदेवता आ महावीर-पराक्रमी सलहेश आ हुनक प्रेमिका कुसुमाक संग प्रेमगाथाक जीवन्त गान करयवला अनुपम फूल सिरहाक लहान समीप सुप्रसिद्ध सलहेश फूलबाड़ी मे पुन: वैशाख १ गते मैथिली नव-वर्षक दिन फूलायल अछि। ज्ञात हो जे ई फूल भैर बरिस मे एक्कहि दिन, अही दिन […]

छठि मैया आ डूबैत-उगैत सूरुजके पूजा

छठि मैया आ डूबैत-उगैत सूरुजके पूजा

छैठ परमेश्वरी के पूजा समस्त मिथिलावासी लेल अति प्राचिन पारंपरिक पूजन समारोह थीक। सामूहिक रूपमें बेसीतर महिला लेकिन गोटेक पुरुष व्रतधारी सभ संग अनेको प्रकारके पकवान व ऋतुफल संग संध्याकालीन सूर्यकेँ हाथ उठाय नमस्कार अर्पण करैत पुनः उषाकाल भोरहरबेसँ छठि परमेश्वरी (उगैत सूरज) केर दर्शन लेल व्रतधारी करजोड़ि ठरल जलमें ठाड़्ह इन्तजार करैत छथि। सूर्योदय […]

चुगला (गीत नाटिका)

चुगला (गीत नाटिका)

चुगला चुगलखोरी करनिहारके कहल जाइत छैक। मिथिलामें मैथिल सभक एक महत्त्वपूर्ण पावैन सामा-चकेवा में चुगला-दहन के गाथा छैक। चलू यैह बहाना हम किछु संस्मरण करी पावैन सामा-चकेवा जे मिथिलामें लोक-पर्व रूप मनयबाक अति प्राचिन परंपरा अछि।  पात्र परिचय: सामा – याने द्वारकाधीश श्री कृ्ष्णकेर बेटी के नाम! प्रकृति-प्रेमसँ आविर्भूत! सदिखन चिड़ै-चुनमुनी, जंगल-पहाड़, नदी-झरना-पोखैर-वन-उपवनमें रमनिहैर !  […]

तीन बात

तीन बात

प्रत्येक मनुष्य लेल निम्न तीन बात विचारपूर्वक करबाक चाही। १. शरीरक तप: देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्। ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते॥ देवता, द्विज (ब्राह्मण व जीवन मे संस्कार प्रदान केला उपरान्त दोसर बेर जन्म भेनाय माननिहार), गुरु, प्राज्ञ (विद्वान्, ज्ञानी, गुणी) केर पूजन; शौच (शारीरिक मलादि सँ निवृत्ति, स्नान आ सफाइ आदि) आ मार्जव (शारीरिक सरलता, साधारण […]

श्री महागणेशपञ्चरत्नस्तोत्रम् (श्रीशङ्कराचार्यकृतम्)

श्री महागणेशपञ्चरत्नस्तोत्रम् (श्रीशङ्कराचार्यकृतम्)

मुदाकराक्त मोदकं सदा विमुक्तिसाधकम्। कलाधरावतंसकं विलासि लोकरक्षकम्॥ अनायकैक नायकं विनाशितेभदैत्यकम्। नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम्॥१॥ नतेतरातिभीकरं नवोदितार्कभास्वरम्। नमत्सुरारि निर्जरं नताधिकापदुद्धरम्॥ सुरेश्वरं निधीश्वरं गजेश्वरं गणेश्वरम्। महेश्वरं तमाश्रये परात्परं निरन्तरम्॥२॥ समस्त लोकशङ्करं निरस्तदैत्यकुञ्करम्। दरेतरोदरं वरं वरेभवक्त्रमक्षरम्॥ कृपाकरं क्षमाकरं मुदाकरं यशस्करम्। मनस्करं नमस्कृतां नमस्करोमि भास्वरम्॥३॥ अकिञ्चनार्तिमार्जनं चिरन्तनोक्ति भाजनम्। पुरारिपूर्व नन्दनं सुरारि गर्वचर्वणम्॥ प्रपञ्च नाशभीषणं धनञ्जयादि भूषणम्। कपोलदानवारणं भजे पुराणवारणम्॥४॥ […]