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मैथिली कथा: भैंसूरक घोघ आ भाभौक योग

मैथिली कथा: भैंसूरक घोघ आ भाभौक योग

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी भैंसुर केर घोघ, भाभौक योग!! राम कुमार भैयाक आइ गाम सँ दिल्ली अयला १५ दिन सँ बेसी भऽ गेल छलन्हि। श्याम कुमार हुनक छोट भाइ दिल्लिये मे रहैत छल। ओतहि छोट-छिन काज पकड़ि लेने छल। बाबुक मरलाक बाद श्याम कुमार केँ गाम छोड़य पड़ि गेल छलैक। बाबुक अमलियत मे ५-१० […]

मैथिल मुसलमान

मैथिल मुसलमान

कविता – मो. अशरफ राईन, हाल: कतार सँ हम महान हमर मजहब महान, माथ पर टोपी देहमे कुर्ता सान! तन मनमे मानवताक प्रेम भरल, छी हम ओ मैथिल मुसलमान!! मन दिल मिथिलाके नमन करैय, रगमे मिथिलाक सोणित बहैय ! छी हमहु मैथिलिए बासी यौ, जय मिथिला मैथिल हृदय कहैय !! नित दिन हमर होइत ईद […]

एखनहु बड दूर अछि भारत मे आदर्श प्रजातंत्र

एखनहु बड दूर अछि भारत मे आदर्श प्रजातंत्र

सन्दर्भ : भारतीय प्रजातंत्र केर चुनावी महायज्ञ  – शरद सिंगी   भारत केर प्रजातंत्र संख्याक दृष्टि सँ विश्वक सबसँ पैघ प्रजातंत्र अछि मुदा भारतीय प्रजातंत्र केँ विश्व मे दोषपूर्ण प्रजातंत्र मानल जाइत अछि। इंग्लैंड और स्विट्ज़रलैंड केर संस्था आदि द्वारा बनायल गेल सर्वोत्तम सँ निकृष्टतम प्रजातांत्रिक देशक सूची मे भारतक स्थान लगभग मध्य मे पड़ैत अछि। आस-पासक […]

बड़का गप छकरय मे पाइ थोड़े लगैत छैक!!

बड़का गप छकरय मे पाइ थोड़े लगैत छैक!!

गजल – रंजीत कुमार झा, कोलकाता बरका-बरका गप्प छकरऽ में लागॅ कत्तॉ पाइ छॅ? बरद अपन कूरहॅर सऽ नापब ककर कथी जाइ छॅ? फक्का-फक्का चट दऽ हूरब कोनो की लाइ-चूरलाई छॅ? शुद्ध-समाजक काज करऽ में सब बूधियार चिन्हाइ छॅ। लारब-चारब जऽ आबॅयॅ तऽ बॅसू माछ तराइ छॅ। सोक्ष बाट कलियुग में चलब ओ लोक बड […]

ह’म कवि एक फेसबुकिया छी

ह’म कवि एक फेसबुकिया छी

ह’म कवि एक फेसबुकिया छी – शिव कुमार झा टिल्लू ह’म कवि एक फेसबुकिया छी नहि घैल मुदा त’ चुकिया छी आनक ग’रमे महीन साइलेंसर हम फूटल फुकफुकिया छी ह’म कवि एक फेसबुकिया छी ….. भाव शिल्प अजवारिकें लिखलहुँ गहल लेखनी ताड़िकें लिखलहुँ भखरल कम्प्यूटर पर सदिखन ग्रहण आशकेँ जाड़िकें लिखलहुँ कोनो आलोचक देखता कहियो […]

मैथिली मे बाजू

मैथिली मे बाजू

मैथिली मे बाजू! – प्रवीण नारायण चौधरी अपन काज करू, मित्रक चिन्ता छोड़ू! ओ बाजथि हिन्दी बा कि अंग्रेजी, अहाँ प्रवीण सदिखन मातृभाषा मे बाजू! संस्कार आ सद्गति सदैव आत्माक परिष्करण सँ संभव छैक, आत्मा सँ बात करब तखनहि तत्त्व आ मर्म सेहो बुझबैक, तैँ, आत्माक भाषा, मोनक भाषा, मातृभाषा केँ सदिखन धारू! धर्मो रक्षति […]

कविताक सत्य

कविताक सत्य

आलेख – राम चैतन्य धीरज *एहि भूमण्डलीकरणक युग मे कविताक सीमा व्यापक भऽ गेल अछि। तेँ एहि व्यापकता मे संघर्षक आयाम केँ प्रस्तुत करब आवश्यक अछि। *क्षेत्रीय राष्ट्रीयता आ ओकर दर्शन संस्कृति पर जाहि प्रकारक खतरा मंडरा रहल अछि, ओ हमरा सचेत करैत अछि जे जँ अंग्रेजीक बाढि मे मैथिली भसिआइत रहत तँ मैथिलीक अस्तित्वो […]

केहेन जमाना उनटा

केहेन जमाना उनटा

केहेन जमाना उनटा… – प्रवीण नारायण चौधरी स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ई छल कहियो नीतिक बात, जातिवादिताक घोर वैमनस्यक राजनीति बहबैत अछि उनटा बसात!! मूर्ख-गँवारक संख्या बेसी – शिक्षित समाज गौण आइ; ताहि पर सँ लोकपलायन, मिथिलाक मर्म छै खतरा मे, केकरा बुझेबैक आ के ई बुझत, उनटे ज्ञान देत “अहाँ तोड़ैत छी!” […]

अहुँ केँ चाही सोना?

अहुँ केँ चाही सोना?

नैतिक कथा – उपनिषद् (अनुवाद: प्रवीण नारायण चौधरी) कोनो जंगल मे एकटा स्वर्णशिला पड़ल छल। दुइ गोट घुड़सवार ओतय आबि गेल। चूंकि दुनू गोटा एक्के समय पहुंचल छल, ताहि हेतु दुनू ओहि स्वर्णशिला पर अपन-अपन अधिकार जतौलक। पहिले वाक् युद्ध भेलैक और अंततः तलवार खिंचा गेलैक। क्षणे भरि पहिल तक दुनू एक-दोसर केँ जानितो तक नहि छल। […]

सात्त्विक इन्सानक राज कहिया बनत?

सात्त्विक इन्सानक राज कहिया बनत?

व्यंग्यवाण – विमलजी मिश्र, सुपौल, मिथिला   मिथिला आ संपुर्ण बिहार मे, टिटही, बेंग, गोबरछत्ता केर प्रादुर्भाव, चुनावी मौसम मे किछु बिशेषे भऽ जायत अछि । दु चारि टा’क टोली बनाकय अपन-अपन राग, गीत आ सोहर सँ लैत ‘राम नाम सत है’ तक, सब किछु अलापनै शुरु कय दैत अछि । भगत रंगा सियार सँ साँठ-गाँठ करैत, […]