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मैथिली गीत – विद्यानन्द बेदर्दी, राजविराज

मैथिली गीत – विद्यानन्द बेदर्दी, राजविराज

– – -गीत- – –   कहऽ हो विधना, ई तु कि केलह? दु शरीर एक जान, अलग क’ देलह॥   जैरके छाउर भेलै, सजल सब सपना सजनी हमर गेलै, दोसरके अङ्गना विपैत पड़ैत खन तु कतऽ छेलह? कहऽ हो विधना. . .   एक-दोसर मे बाँटै छलौ, मिलकऽ प्यार स्वर्ग सन छल हमर, प्रेमक […]

अकावतीक खिस्सा

अकावतीक खिस्सा

स्रोत: सुभाषचंद्र झा, सहरसा द्वारा पठायल गेल एक पेपर कटिंग (संभवत: दैनिक जागरण मे प्रकाशित मैथिली हास्य-परिहास लेख) लेखक – केदार कानन अकावतीक खिस्सा अकावती मसोमातक खिस्सा मोन पड़ैत अछि। छोट रही तँ पीसी कहैत छलि जे एक दिन नौ बजे राति मे अकावती मरि गेली। आंगन मे कन्नारोहट शुरु भेल। दू-तीन घंटा कानला बाद सभ […]

भाषा आ सामुदायिक पहिचान

भाषा आ सामुदायिक पहिचान

आलेख – गोविन्द साह   (लेखक एक पूर्व स्वतंत्र पत्रकार, समाजसेवी, अभियानी तथा गैर-सरकारी संस्थान केर संचालनकर्ताक संग-संग राजनीतिकर्मीक रूप मे नेपाल मे कार्य केने छथि। हाल उच्च शिक्षा लेल वारसा विश्वविद्यालय, पोलैन्ड मे अध्ययनरत छथि। मैथिली आ भोजपुरीक बीच जन्म लऽ रहल आ स्थापित होयबाक लेल आ भाषिकासँ भाषा मे परिणति पेबाक लेल संघर्षरत बज्जिकाभाषी […]

मिथिलाक सात आन्हर आ शेरुआ कुकूर

मिथिलाक सात आन्हर आ शेरुआ कुकूर

(पार्श्व ध्वनि – तर्ज: तन-डोले-मन-डोले पर चलि रहलैक अछि) गीतक बोल: तू हमर मुह पोछ, हम तोहर मुह पोछ बस पोछिते काटब दिन हो! मैथिल चलल बेसुरपुरिया…. सब दिन आदति रहल चोरपनिके सोच नञि बदलल मैथिल गणके अपन मूल सब बिसरिके बैसल अनकर देक्सी जे फेरल सनके हम अहाँकेँ पूछी, अहाँ हमरा पूछी, भैर जिनगी […]

स्वधर्म केँ जुनि बिसरू मैथिल

स्वधर्म केँ जुनि बिसरू मैथिल

श्रेयान् स्वधर्मो विगुण: परधर्मात् स्वनु्ष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:॥३५॥ अपन धर्म श्रेयस्कर होइत अछि। अनकर अति मनोरम व्यवहृत धर्मे सँ अपन अपूर्णो धर्म बेसी नीक होइत छैक। अपन धर्म मे मरनाय सेहो नीक होइत छैक, आन धर्म भयावह (भय सँ आक्रांत) होइत छैक। गीताक तेसर अध्याय मे प्रयुक्त एहि श्लोक सँ एकटा पैघ सीख […]

किछु कहै छै हिया

किछु कहै छै हिया

गजल – राजीव रंजन मिश्र, कोलकाता किछु कहै छै हिया सदि घड़ी लोककेँ नै सुनय छै कहल से कमी लोककेँ सोह रहलै कहाँ कि सही कि गलत बोल अखड़ा बनल सरजमीं लोककेँ बात धारक चलल फानि चटपट उठल पानि देखल लगै कनकनी लोककेँ मोल कि थिक तपस्याक दरकार कि कोन निर्वाणकेँ धरफड़ी लोककेँ युग जमाना […]

जननी – मैथिली कविताक संग कविक भावार्थ

जननी – मैथिली कविताक संग कविक भावार्थ

जननी ○ दिवस पावस तीतल सुजनी, फटले नूआ काटल रजनी । ○ गहि भुजपाश नेह बरसाओल, छूबि गात हृदय हरसाओल । ○ नेन्ना नेह नयन भरि हेरल , आशीष हाथ माथ पर फेरल । ○ अंकम गहि गहि मस्तक चूमल, हियक अनुराग अंतर झूमल । ○ रूसल संतति चोट्टहि परतारल, निहुछि निहारि नजरि उतारल । […]

Ramleela of Mithila: A Forgotten Tradition of Folk Theatre

Ramleela of Mithila: A Forgotten Tradition of Folk Theatre

– Dr. Kailash Kumar Mishra [Dr. Kailash Kumar Mishra is an anthropologist, art-historain and Human Rights Expert; he is the Chairman of BRAINKOTHI, and RIRKCLRC. Dr. Mishra is  based in New Delhi. His emails: kailashkmishra@gmail.com, kkmbrainkothi@gmail.com] Introduction: The two great epics: Ramayana and Mahabharata from time immemorial have been influencing every sphere of life and […]

कतार सँ नेपाल भूकम्प पीड़ित केँ मैथिली-कवि अशरफ राईन द्वारा श्रद्धाञ्जलि-गजल अर्पण

कतार सँ नेपाल भूकम्प पीड़ित केँ मैथिली-कवि अशरफ राईन द्वारा श्रद्धाञ्जलि-गजल अर्पण

गजल धरती मचौलकै तान्डव भाइ बड़ विशाल जाहि मे पड़ि ध्वस्त भेलै सौंसे नेपाल कामना केलियै सुख स्मृद्धिक इश्वर सँ दुखद खबर सँग भेलै सुरु नया साल जेकरे कहि माई पुकारलियै सबकियो वैह बनलै सबहक जीवनक महाकाल घरसँ बेघर केलकै छीन लेलकै प्राण मुह मोइर लेलकै तोड़ि मायाक जाल कतेक दिनक भुखायल रहै धरती माई जे […]

नेपाल भूकंप पीड़ित केँ कविता द्वारा श्रद्धाञ्जलि – मैथिली कवि विमलजी मिश्र

नेपाल भूकंप पीड़ित केँ कविता द्वारा श्रद्धाञ्जलि – मैथिली कवि विमलजी मिश्र

देवा रौ! कोन विधि देलें वियोग! घर-घर मे मरघट अछि लागल-२ बिलखि रहल यै लोग! देवा रौ! कोन विधि देलें वियोग!   माय बहिन अंगना छलि बैसल हिया मे गढने सपना सैंतल! पथरायन नैन बोल फूटै ने-२ बनि गेल स्वर्गक योग! देवा रौ! कोन विधि देलें वियोग!   उजरल माँग चूड़ी सब टूटल मातु-पिता सब […]