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टाइम पास मिथिला: एम्हरो एक नजरि देल जाउ

टाइम पास मिथिला: एम्हरो एक नजरि देल जाउ

आधुनिक विज्ञानक युग – टेलिविजन आ मोबाइलक युग इन्टरनेट सँ जुड़ल युग – हाथे-हाथ मे फेसबुकक युग सौ मे सँ ९५ यूजर टाइम पास मिथिला – ५ गो टा काजक मिथिला!! आउ, एम्हरो एक नजरि देल जाउ!!                                

मिथिलापुत्र ‘विजय प्रकाश’ केर बहुचर्चित पोथी ‘अपनी एकाग्रता कैसे बढायें’ केर विमोचन

मिथिलापुत्र ‘विजय प्रकाश’ केर बहुचर्चित पोथी ‘अपनी एकाग्रता कैसे बढायें’ केर विमोचन

आजुक विशेष संपादकीय: सन्दर्भ मिथिलापुत्र विजय प्रकाश द्वारा पुरखौली काजकेँ निरंतरता देबाक महत्त्वपूर्ण योगदान! मनुष्य-जीवन केर सर्वथा उच्चतम् फलादेश मोक्षक संग जीवन-पर्यन्त लेल वांछित ‘कल्याण’ प्राप्तिक निमित्त गीतोपदेश कहैत अछि:  मय्येव मन आघत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय॥ अर्थात् मात्र ‘हमरा’ मे चित्त लगाउ, अपन बुद्धि ‘हमरे’मे लगाउ, निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशय:॥गीता १२ – ८॥ एकर बाद अहाँ […]

रामचरितमानस: रूपक आ माहात्म्य – “महाकवि तुलसीदास केर अपूर्व प्रस्तुति’

रामचरितमानस: रूपक आ माहात्म्य – “महाकवि तुलसीदास केर अपूर्व प्रस्तुति’

रामचरितमानस मिथिलावासीक लेल खास कियैक सनातन धर्म मे ईश्वर अनेक छथि, परन्तु राम तथा कृष्णक महत्त्व बहुत खास अछि। खास होयबाक कारण जे एहि दुइ अवतार केँ मनुष्य अपनहि रूप मे देखि मानुसिक क्रियाकलापक संग महापुरुषक आचार-विचार जुड़ल देखि दुनू चरित्रक अनुकरण सँ अपन जीवन केँ सफल बनेबाक चेष्टा करैत अछि। मनुष्यरूप मे रहैत सीता […]

टिकट भेट जायत – व्यंग्य प्रसंग

टिकट भेट जायत – व्यंग्य प्रसंग

टिकट भेट जायत “भैया! अहाँ चिन्ता नहि करब। हम राजधानी पूरा हिलाकय राखि रहल छी। लगभग सब बड़का नेताक चाटुकारिता मे लागल छी। हल्ला-हुच्चर सेहो समुचिते मात्रा मे कय रहल छी। प्रेस सब मे फोटो पहुचय ताहुक पूरा इन्तजाम करैत छी।” “ठीक छैक छोटू!” “जँ भाजपा सँ टिकट कटियो जायत तऽ आआपा तऽ अपनहि बुझू। […]

धिया गरीबक कोना पोसायत यौ बाबु

धिया गरीबक कोना पोसायत यौ बाबु

– मनीष झा आँखि सँ झहरैत नोर कहै अछि यौ बाबू ! धिया गरीबक कोना पोसायत ? यौ बाबू ! किया कहै अछि लोक? धिया आन छै यौ बाबू ! कोनो पाप त’ केलौं नै हम जन्मैत ! यौ बाबू ! लक्ष्मी कहबितो खगल रहै छी यौ बाबू ! कियाक लागल अछि अंकुश हमरा पर […]

हम छी न्याय – हम छी नेआय: न्याय आइ ‘नेआय’

हम छी न्याय – हम छी नेआय: न्याय आइ ‘नेआय’

– अमरनाथ झा हम छी नेआय समदर्शी एहेन हम आंखि मे पट्टी अछि पलड़ा अछि झुकल, मुदा तौल नहिं घट्टी अछि पासंग कऽ तौली हम पट्टी अलगाय । हम छी नेआय । हमरा लग अंतर नहिं धनिक आ गरीबक सब कें अधिकार दी हुकुर हुकुर जीबक हड़बड़ी कोनो नइ दइ छी लटकाय । हम छी […]

ई देश सबहक नहि – मैथिली कविता ‘अग्निमित्र’

ई देश सबहक नहि – मैथिली कविता ‘अग्निमित्र’

ई देस सभक नहि, किछु खासक ई देस – डा. मित्रेश्वर चौधरी ‘अग्निमित्र’ “मा, हम सभ सन्तान भारत मा केर, देस हमर माता” “हँ, रिमिल” “हम सभ सहोदर, सभहक एक माय” “हँ, रिमिल” “सम्पूर्ण देस सभक’ नदी – पहाड़ – जंगल – खेत – खदान…..” “हँ, रिमिल” “हम नहि पतिआयब मा, हमरा ई गप्प बुझना […]

फेसबुक केर भाषाक आम-जीवन पर प्रभाव – एकांकी नाटक “फेसबुकिया परिवार”

फेसबुक केर भाषाक आम-जीवन पर प्रभाव – एकांकी नाटक “फेसबुकिया परिवार”

भूमिका: मैथिल आ फेसबुक ई नाटक (एकांकी) सेप्टेम्बर १, २०१२ केँ लिखल गेल छल। एहि मे कल्पना सँ फेसबुक द्वारा मिथिला समाजक किछु गूढ समस्या – यथा बेटीक कुटमैती, दूलहा निरीक्षण, दहेज व्यवस्था, वैवाहिक निर्णय, पारिवारिक माहौल आ ओकर प्रभाव आदि दरसेबाक चेष्टा कैल गेल छल। जानकारी दी जे यमन केर प्रीमियर ओतुका जनता सँ […]

भूकम्प आब जान पर केने अछि – व्यंग्य प्रसंग

भूकम्प आब जान पर केने अछि – व्यंग्य प्रसंग

व्यंग्य – सत्य नारायण झा कतय गेल ई वैज्ञानिक सभ । लगैत अछि नांगरि सुटकंत कए बिल मे नुका रहलैए । केखनो चंद्रमा पर त केखनो मंगल पर रहता ई नकडुब्बा सभ । एखन भूकम्प सँ लोक के की बचेता अपने नांगरि सुटकेने भागल फिरैत छथि । ओह एखन ऱामजीक भाई लखनलाल याद परैत छथि […]

गप कने हटि क’ : गीत-संगीतमे बढ़ैत अश्लीलता

गप कने हटि क’ : गीत-संगीतमे बढ़ैत अश्लीलता

आलेख: – पंकज चौधरी ‘नवलश्री’ गन्ना के रस तोरा… , करुआ तेल ….., ऊपर के ३२ नीचे के ३६, बीच मे का २४ बुझाता की ना…… किछु दिन पहिले घ’रक पड़ोसमे (पटनामे) एकटा विआह छल. एहि शुभ आ मांगलिक अवसरिपर राजा जनक जी के बाग़ में अलबेला रघुवर….., दुल्हिन धीरे-धीरे चलियौ….. आदि गीतक बदलामे भरि राति […]