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मैथिली मे बाजू

मैथिली मे बाजू

मैथिली मे बाजू! – प्रवीण नारायण चौधरी अपन काज करू, मित्रक चिन्ता छोड़ू! ओ बाजथि हिन्दी बा कि अंग्रेजी, अहाँ प्रवीण सदिखन मातृभाषा मे बाजू! संस्कार आ सद्गति सदैव आत्माक परिष्करण सँ संभव छैक, आत्मा सँ बात करब तखनहि तत्त्व आ मर्म सेहो बुझबैक, तैँ, आत्माक भाषा, मोनक भाषा, मातृभाषा केँ सदिखन धारू! धर्मो रक्षति […]

कविताक सत्य

कविताक सत्य

आलेख – राम चैतन्य धीरज *एहि भूमण्डलीकरणक युग मे कविताक सीमा व्यापक भऽ गेल अछि। तेँ एहि व्यापकता मे संघर्षक आयाम केँ प्रस्तुत करब आवश्यक अछि। *क्षेत्रीय राष्ट्रीयता आ ओकर दर्शन संस्कृति पर जाहि प्रकारक खतरा मंडरा रहल अछि, ओ हमरा सचेत करैत अछि जे जँ अंग्रेजीक बाढि मे मैथिली भसिआइत रहत तँ मैथिलीक अस्तित्वो […]

केहेन जमाना उनटा

केहेन जमाना उनटा

केहेन जमाना उनटा… – प्रवीण नारायण चौधरी स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ई छल कहियो नीतिक बात, जातिवादिताक घोर वैमनस्यक राजनीति बहबैत अछि उनटा बसात!! मूर्ख-गँवारक संख्या बेसी – शिक्षित समाज गौण आइ; ताहि पर सँ लोकपलायन, मिथिलाक मर्म छै खतरा मे, केकरा बुझेबैक आ के ई बुझत, उनटे ज्ञान देत “अहाँ तोड़ैत छी!” […]

अहुँ केँ चाही सोना?

अहुँ केँ चाही सोना?

नैतिक कथा – उपनिषद् (अनुवाद: प्रवीण नारायण चौधरी) कोनो जंगल मे एकटा स्वर्णशिला पड़ल छल। दुइ गोट घुड़सवार ओतय आबि गेल। चूंकि दुनू गोटा एक्के समय पहुंचल छल, ताहि हेतु दुनू ओहि स्वर्णशिला पर अपन-अपन अधिकार जतौलक। पहिले वाक् युद्ध भेलैक और अंततः तलवार खिंचा गेलैक। क्षणे भरि पहिल तक दुनू एक-दोसर केँ जानितो तक नहि छल। […]

सात्त्विक इन्सानक राज कहिया बनत?

सात्त्विक इन्सानक राज कहिया बनत?

व्यंग्यवाण – विमलजी मिश्र, सुपौल, मिथिला   मिथिला आ संपुर्ण बिहार मे, टिटही, बेंग, गोबरछत्ता केर प्रादुर्भाव, चुनावी मौसम मे किछु बिशेषे भऽ जायत अछि । दु चारि टा’क टोली बनाकय अपन-अपन राग, गीत आ सोहर सँ लैत ‘राम नाम सत है’ तक, सब किछु अलापनै शुरु कय दैत अछि । भगत रंगा सियार सँ साँठ-गाँठ करैत, […]

मिथिला आ मैथिलीक ‘ब्राण्डिंग’

मिथिला आ मैथिलीक ‘ब्राण्डिंग’

मिथिला ब्राण्ड – मैथिली ब्राण्ड पता अछि मिथिलाक समृद्धि कतेक छैक आइयो? आत्मनिर्भरता हर तरहें मानव-जीवन लेल मिथिलाक भीतर सभ तरहें उपलब्ध छैक। बस एक संछिप्त रूप देखल जाउ – कुटीर उद्योग केँ संचालन हेतु जातीय-व्यवस्था सँ दक्ष घरैया लूरि द्वारा उत्पादनशीलताक विलक्षण उदाहरण मिथिलामें भेटैत छैक। कृषि प्रणालीमें सभ तरहक अनाज उपजौनाइ आ विभिन्न […]

वोटक लेल किछो करबाउ!

वोटक लेल किछो करबाउ!

वोटक लेल किछो करबाउ! देखियौ आयल फेर चुनाउ चाही वोट छूछ नारा लगाउ पाछूक बात बिसरिये जाउ आगूक वादा झडी सजबाउ मतदाताकेर जाति बुझाउ जाति गुणे ओ वोट गनबाउ सदन देश सब एके रंग मैनजन डुगडुगी बजाउ या बम मारू गोली लगबाउ कोहुना लोकक मन फोडाउ नेता माने बनियौटी केनाय नोट लगाउ वोट खसबाउ नियम […]

कुर्सों दुर्गास्थान: मिथिला क्षेत्र मे पर्यटन विकासक आदर्श सूत्र

कुर्सों दुर्गास्थान: मिथिला क्षेत्र मे पर्यटन विकासक आदर्श सूत्र

आलेख – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाक्षेत्र मे प्रबुद्ध समाज द्वारा गाम-गाम धरोहर केर निर्माण संभव भेल अछि। सब गाम मे अपना तरहक एकटा कीर्ति पुरखा लोकनि द्वारा प्रेरणास्पद ढंग सँ बनल रहबाक भिन्न-भिन्न गाथा सब सुनल जा सकैत अछि। हिन्दू धर्मशास्त्र मे दानक महत्त्व बहुत पैघ छैक, तहिना जनकल्याणकारी निर्माण कार्य मे सेहो समाज काफी […]

यम हम – हमहीं यम

यम हम – हमहीं यम

– प्रवीण नारायण चौधरी अजीब दुनिया ई देखू मनुखे मनुक्खक यम छै! मरला पर के देखय मृत्यु केँ जिबिते भेटय यम छै!   कि देखबय लेल चाहय छै ओ केकरो एना मारिकय? कि ओ नहि मरतय कहियो ओकरो मृत्यु त तय छै!!   बुझितो सबटा माया खेला लोक लौकिकता दौड़ छै! विरले हँसय छै मने-मने […]

रमजान आ गर्मीक आतंक

रमजान आ गर्मीक आतंक

गर्मीके कहर आ रमजान – आलेख बिन्देश्वर ठाकुर, कतार। हमर देश नेपाल । हम एक नेपाली । हमर काज कर’ बला मूलुक कतार । अहिठाँ हमरा लगायत बहुतो नेपाली आ अन्य देशके कामदार सब अपन रोजगारी लेल आएल छै । वास्तविक कही त ई एकटा मुस्लीमप्रधान देश छै । तें मुस्लीम सबहक बाहुल्यता होएब स्वभाविक […]