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पाकिस्तान केर समस्या धर्मान्धता आ कट्टरताः गरीबीक समाधान सउदी अरब युवराज सँ अपेक्षा

पाकिस्तान केर समस्या धर्मान्धता आ कट्टरताः गरीबीक समाधान सउदी अरब युवराज सँ अपेक्षा

पाकिस्तानक गरीबी कि सउदी अरब युवराज दूर कय सकता?   #CrownPrinceinPakistan – आइ ट्विटर पर हैश टैग मूवमेन्ट मे ट्रेन्ड करयवला गरमागरम खबैर अछि जे पाकिस्तान मे सउदी अरब केर युवराज मोहम्मद बिन सलमान आबि रहला अछि। आइ पूरा पाकिस्तान मे एकटा नव आशाक किरण जागल बुझा रहल य। मुसलमान एकता आ भाईचारा केर पैघ-पैघ […]

अष्टावक्र संहिता – अध्याय ७ – उच्चतर ज्ञान

अष्टावक्र संहिता – अध्याय ७ – उच्चतर ज्ञान

अष्टावक्र संहिता – अध्याय सातम – उच्चतर ज्ञान   पिछला अध्याय छठम् मे गुरु अष्टावक्र ब्रह्मलीन होयबाक – आत्मारूपी परमात्मा संग एकाकार होयबाक चारि तरीका बतेलनि। ताहि पर जनक समान उच्च ज्ञानी शिष्य अपन उद्गार प्रकट करैत अपन मनोभाव केँ गुरु अष्टावक्र केर सोझाँ केना राखि रहल छथि, तेकर विवरण मात्र ४ श्लोक मे देखल […]

वैलेन्टाइन डे पर महाकवि विद्यापतिक महान रचना – राधा विरह – प्रेमक पराकाष्ठाक दर्शन

वैलेन्टाइन डे पर महाकवि विद्यापतिक महान रचना – राधा विरह – प्रेमक पराकाष्ठाक दर्शन

वैलेन्टाइन डे विशेष – मैथिली भाव क्रिश्चियन कल्चर केर महापर्व ‘वैलेन्टाइन डे’ केर असैर अपन हिन्दू सभ्यता पर पड़ैत देखि विद्यापतिक ई सुन्दर सन रचना कथित प्रेम दिवस पर राखि रहल छीः   कुञ्ज भवन सँ निकसल रे, रोकल गिरिधारी। एकहि नगर बसु माधव हे, जनि करू बटमारी॥   छोड़ू-छोड़ू कान्ह मोर आंचर रे, फाटत […]

अष्टावक्र संहिता – अध्याय ५ – विलय केर चारि तरीका

अष्टावक्र संहिता – अध्याय ५ – विलय केर चारि तरीका

अष्टावक्र संहिताः अध्याय ५ – विलय केर चारि तरीका   अष्टावक्र संहिता मे जनक समान प्रखर ज्ञाता एक शिष्य छथि, अष्टावक्र समान महान् ज्ञानी आ ऋषि समान गुरु छथि। शिष्य आ गुरुक बीच वार्ताक स्तर सेहो अत्यन्त उच्च अछि। हम मुमुक्षु स्वाध्यायी जँ स्वयं केँ एहि उच्च स्तर पर स्थापित कय केँ हिनका लोकनिक बीच […]

अष्टावक्र संहिताक चारिम अध्याय – आत्मज्ञानक महिमामंडन

अष्टावक्र संहिताक चारिम अध्याय – आत्मज्ञानक महिमामंडन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी अष्टावक्र संहिता – चारिम अध्यायः आत्मज्ञान केर महिमामंडन   पूर्व तीन अध्याय मे पहिल आत्मज्ञान केर परिचिति, दोसर आत्मज्ञान सँ आनन्दक अनुभूति, पुनः तेसर अध्याय मे आत्मज्ञान प्राप्त भेल तथापि द्वंद्व व आसक्ति तथा सांसारिकता मे रमण करबाक नियति कोना – इत्यादि प्रश्न सँ परीक्षा कयला उत्तर पुनः चारिम अध्याय […]

अष्टावक्र संहिता – तेसर अध्याय – आत्मज्ञान केर परीक्षा

अष्टावक्र संहिता – तेसर अध्याय – आत्मज्ञान केर परीक्षा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी अष्टावक्र संहिता – तृतीय अध्याय   आत्मज्ञान केर परीक्षा   प्रिय पाठक लोकनि! अष्टावक्र संहिताक दुइ अध्याय समाप्त भऽ गेल। पहिल मे अष्टावक्र द्वारा स्वयं केर पहिचान यथार्थ रूप सँ, तत्त्व रूप सँ कोना कयल जाय आर सांसारिक अस्तित्व केँ स्वयं सँ कोना जोड़ल जाय ताहि पर परिचिति देल गेल […]

मैथिल – पुराण वर्णित पहिचान

मैथिल – पुराण वर्णित पहिचान

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी मैथिल (पौराणिक पहिचान) शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्। हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥ मा सरस्वतीक चरणकमल मे बेर-बेर प्रणाम करैत एकटा छोट संस्मरण लिखय लेल चाहब। एहि संस्मरण यात्रा पर पाठक वर्ग केँ आनबाक एकमात्र उद्देश्य यैह अछि जे हमरा लोकनिक उद्गमविन्दु (मातृभूमि) मिथिला […]

मैथिली गीत केर मधुरता मे नक्कल आ फूहड़ताक प्रयोग कि युगक मांग थिकैक?

मैथिली गीत केर मधुरता मे नक्कल आ फूहड़ताक प्रयोग कि युगक मांग थिकैक?

भक्ति गीत मे सैयाँ-सजनियाँ आ दियर-भाउजक भरमार   ई ट्रेन्ड बाबाधाम केर बाट मे बेसी देखल जाइत छलैक जे बोलबम गीत मे ‘पिया ध’ क’ ध’ क’ करत’ करेज…’, सैंयाँ, भौजो, नन्दो, दियर, पिया के संग सबटा अबैत छल। मिथिलाक लोक बोलबम खूब जाइत अछि। आब ओतय सँ ई गीतक ट्रेन्ड मैथिली गीत-संगीत मे सेहो […]

सीतामढी – पुनौराधाम – एक पूर्ण तीर्थ जतय सँ कियो खाली हाथ नहि लौटैत अछि

सीतामढी – पुनौराधाम – एक पूर्ण तीर्थ जतय सँ कियो खाली हाथ नहि लौटैत अछि

संस्मरण – प्रवीण नारायण चौधरी सीतामढी एक पूर्ण तीर्थ – वरदान भेटब अवश्यम्भावी   आउ, जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम मे एक पुष्प चढाबी!   एहि पवित्र स्थान पर अपने लोकनि कतेक गोटे गेल छी से हमरा नहि पता, लेकिन जीवन मे ३ बेर यात्रा आ २ बेर दर्शन लेल ठीक एहि मन्दिर प्रांगण, जानकी जी केर […]

हनुमानजी द्वारा भगवान् राम केर स्तुति

हनुमानजी द्वारा भगवान् राम केर स्तुति

हनुमत्कृत श्रीरामस्तुति   नमो रामाय हरये विष्णवे प्रभविष्णवे। आदिदेवाय देवाय पुराणाय गदाभृते॥ विष्टरे पुष्पके नित्यं निविष्टाय महात्मने। प्रहृष्टवानरानीकजुष्टपादाम्बुजाय ते॥ निष्पिष्टराक्षसेन्द्राय जगदिष्टविधायिने। नमः सहस्रशिरसे सहस्रचरणाय च॥ सहस्राक्षाय शुद्धाय राघवाय च विष्णवे। भक्तार्तिहारिणे तुभ्यं सीतायाः पतये नमः॥   श्रीहनुमानजी कहलनि –   सबपर शासन करयवला, सर्वव्यापी, श्रीहरिस्वरूप श्रीरामचन्द्रजी केँ नमस्कार अछि। आदिदेव पुराणपुरुष भगवान् गदाधर केँ नमस्कार […]

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